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आखिरी सांस तक गैस पीड़ितों के लिए लड़े अब्दुल जब्बार को पद्मश्री की घोषणा, इधर परिवार के सामने रोटी का संकट

Manoj Rathore | News18Hindi
Updated: January 25, 2020, 11:10 PM IST
आखिरी सांस तक गैस पीड़ितों के लिए लड़े अब्दुल जब्बार को पद्मश्री की घोषणा, इधर परिवार के सामने रोटी का संकट
अब्दुल अब्बार की पत्नी ताहिरा बानो ने पद्मश्री की घोषणापर कहा कि हमें बहुत खुशी है. उन्होंने भूखे प्यासे रहकर भी पूरा जीवन गैस पीड़ितों की सेवा के लिए लगा दिया.

अब्दुल जब्बार अपनी आखिरी सांस तक भोपाल गैस पीड़ितों के लिए लड़े और उनकी सेवा में दिन रात एक कर दिए. अब सरकार उन्हें पद्मश्री देने जा रही है. ऐसे में उनके परिवार को जहां एक तरफ खुश है तो दूसरी तरफ चिंता से भी घिरा हुआ है. चिंता रोटी की, रोजी की और परिवार को चलाने की.

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  • Last Updated: January 25, 2020, 11:10 PM IST
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भोपाल. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने पद्म पुरस्कार पाने वाले नामों की घोषणा की. इस दौरान पद्मश्री पाने वाले नामों में एक नाम भोपाल के अब्दुल जब्बार का भी था. भोपाल ही क्या देश का हर व्यक्ति इस नाम से वाकिफ है. अब्दुल जब्बार अपनी आखिरी सांस तक भोपाल गैस पीड़ितों के लिए लड़े और उनकी सेवा में दिन रात एक कर दिए. अब सरकार उन्हें पद्मश्री देने जा रही है. ऐसे में उनके परिवार को जहां एक तरफ खुश है तो दूसरी तरफ चिंता से भी घिरा हुआ है. चिंता रोटी की, रोजी की और परिवार को चलाने की.

कोई कमाई का साधन नहीं
अब्दुल जब्बार की मौत के बाद इस परिवार में पहली बार एक खुशी की खबर आई. जिंदगी भर जब्बार की ओर से किए गए कार्यों को आखिर सराहा जा रहा है. लेकिन भावुक और खुशी के पल के बीच एक दर्द भी दिखा. दर्द था अब जब्बार के पीछे से घर को चलाने का. घर में कमाई का कोई साधन नहीं है. सरकार ने भी परिवार की कोई मदद नहीं की. जब्बार के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी कुछ जानकार लोग उठा रहे हैं. जब्बार के छोटे भाई होटल चलाया करते थे लेकिन वे भी कुछ कारणों की वजह से हाल में बंद हो गया.

पत्नी बोलीं- पूरा जीवन गैस पीड़ितों के लिए लगाया

अब्दुल अब्बार की पत्नी ताहिरा बानो ने पद्मश्री की घोषणापर कहा कि हमें बहुत खुशी है. उन्होंने भूखे प्यासे रहकर भी पूरा जीवन गैस पीड़ितों की सेवा के लिए लगा दिया. रात में फोन आता था तो भी वे चले जाते थे. कहते थे पहले काम है बाद में परिवार. अब बस एक ही इच्छा है कि मुझे सरकारी नौकरी मिल जाए तो परिवार का पोषण कर सकूं. अब तो जीना मुश्किल होता जा रहा है.

पापा की बहुत याद आती है
वहीं जब्बार के बड़े बेटे साहिल ने कहा कि 35 साल तक पापा ने संघर्ष किया, हार्ट पेशेंट थे, पैर में फंगस हो गया था लेकिन हमेशा गैस पीड़ितों के लिए काम करते रहे. वहीं छोटे बेटे समीर ने कहा कि पापा की बहुत याद आती है. वहीं पापा के काम देख कर खुशी भी बहुत होती है. वहीं सबसे छोटी बेटी मरियम ने कहा कि पापा से बहुत प्यार करती हूं और उनकी याद भी बहुत आती है.जिस संगठन को खड़ा किया, वो भी नहीं दे रहा साथ
अब्दुल जब्बार के छोटे भाई ने कहा कि जिस संगठन को खड़ा करने में भाई ने सालों लगा दिए वह भी अब साथ नहीं दे रहा है, मेरा होटल भी बंद हो गया है. सरकार ने न हम लोगों की पहले मदद की और न ही अब कोई उम्मीद है. बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी नहीं उठा पा रहे हैं.

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First published: January 25, 2020, 11:10 PM IST
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