आएगा तो मोदी ही...MP में असर कर गया जुमला, वोट परसेंटेज ने बढ़ाया जीत का फासला
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आएगा तो मोदी ही...MP में असर कर गया जुमला, वोट परसेंटेज ने बढ़ाया जीत का फासला
अमित शाह, पीएम मोदी

एमपी में होशंगाबाद, इंदौर, विदिशा, भोपाल, सागर, खजुराहो, राजगढ़, टीकमगढ़, शहडोल, मंदसौर, बैतूल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, दमोह और देवास में बीजेपी प्रत्याशियों ने 3 लाख से ज़्यादा मतों से जीत दर्ज करायी.

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'फिर एक बार मोदी सरकार' और 'आएगा तो मोदी ही' लोकसभा चुनाव में पूरे कैंपेन दौरान लगा ये नारा और जुमला ऐसा असर दिखाएगा, इसकी कल्पना किसी को नहीं थी. मध्य प्रदेश में भी मोदी मैजिक ऐसा चला कि बाकी सब हवा हो गए. 5 महीने पहले ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताने वाले मतदाताओं ने बीजेपी को सिर आंखों पर बैठा लिया. प्रदेश की 29 में से 28 सीटें बीजेपी की झोली में चली गयीं. इन 28 में से 16 प्रत्याशी थोड़े बहुत नहीं बल्कि 3 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीते.

ऐसी हार की उम्मीद ना तो कांग्रेस ने कभी की थी और ना ऐसी सफलता की आशा बीजेपी ने की होगी. दावे ज़रूर सबसे अपने-अपने थे. मध्य प्रदेश में 28 सीट में से 16 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी 3 लाख से ज़्यादा वोटों से जीते.इनमें से 3 प्रत्याशियों की जीत का अंतर 5 लाख से ज़्यादा रहा. होशंगाबाद सीट पर राव उदय प्रताप सिंह रिकॉर्ड 5 लाख 53 हज़ार 682 वोट से जीते. इंदौर से शंकर लालवानी 5 लाख 47 हज़ार 764 वोट से और विदिशा में रमाकांत भार्गव 5 लाख 3 हज़ार 84 वोट से विजयी रहे.

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सिर्फ 5 महीने में मतदाता ने जनादेश पलट दिया. विधानसभा चुनाव के मुक़ाबले बीजेपी को लोकसभा चुनाव में 17 फीसदी ज़्यादा वोट मिले. इसका सीधा फायदा सीट और प्रत्याशियों की जीत-हार के अंतर पर पड़ा. बीजेपी के पक्ष में इस बार 58 फीसदी वोट पड़े. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में ये 54.02 था. उस वक्त बीजेपी को 29 में से 27 सीट मिली थीं. 3.8 फीसदी वोट बढ़ने पर बीजेपी के खाते में एक सीट का और इज़ाफा हो गया. कांग्रेस के पक्ष में 34.50 वोट पड़े. 2014 में उसे 34.89 फीसदी वोट मिले थे और 2 सीट उसके खाते में आयी थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में उसके 6 फीसदी वोट बढ़े जिसके बल पर कांग्रेस ने 114 सीट जीतकर सत्ता हासिल कर ली. लेकिन मोदी लहर में उसका ये बढ़ा हुआ 6 फीसदी वोट वापस बीजेपी के खाते में चला गया.
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इस वोट प्रतिशत का असर जीत-हार के मुक़ाबले पर भी पड़ा. एमपी में होशंगाबाद, इंदौर, विदिशा, भोपाल,सागर, खजुराहो, राजगढ़,टीकमगढ़, शहडोल,मंदसौर, बैतूल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, दमोह और देवास में बीजेपी प्रत्याशियों ने 3 लाख से ज़्यादा मतों से जीत दर्ज करायी.
मध्य प्रदेश में हार-जीत के इस बड़े फासले की वजह मोदी फैक्टर रहा. राष्ट्रवाद और सर्जिकल स्ट्राइक से प्रभावित मतदाता ने मोदी के नाम पर वोट दिए. विधानसभा चुनाव की तरह कांग्रेस, किसान कर्ज़माफी का मुद्दा नहीं भुना पायी और लोकसभा चुनाव के वादे न्याय योजना को वो जनता को समझा नहीं पायी.

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