मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद सीट छोड़ी तो देना होगा 30 लाख का आर्थिक दंड

इस बार मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने के बाद सीट छाेड़ना भारी पड़ सकता है. राज्य सरकार ने आवंटन के बाद सीट छोड़ने पर (सीट लिविंग बॉन्ड) आर्थिक दंड तीन गुना कर दिया है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: July 2, 2019, 11:04 AM IST
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद सीट छोड़ी तो देना होगा 30 लाख का आर्थिक दंड
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद सीट छोड़ी, तो देना होगा 30 लाख का आर्थिक दंड
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Updated: July 2, 2019, 11:04 AM IST
मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के अलावा डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस की सीटाें के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. हालांकि, इस बार छात्र को प्रवेश के बाद सीट छोड़ना भारी पड़ सकता है. राज्य सरकार ने आवंटन के बाद सीट छोड़ने पर (सीट लिविंग बॉन्ड) आर्थिक दंड तीन गुना कर दिया है. अब बॉन्‍ड के तहत सीट छोड़ने पर छात्र को 30 लाख रुपए देना होगा. बता दें कि पिछले वर्ष यह राशि 10 लाख रुपए थी. राशि जमा करवाने के बाद ही छात्र को उनके मूल दस्तावेज लौटाए जाएंगे. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. राहुल रोकड़े ने इसकी पुष्टि की है. इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस सत्र से फीस में भी वृद्धि कर दी है.


एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन फीस हुआ 1.14 लाख



अब एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों को 1.14 लाख रुपए हर साल शुल्क देना होगा. पिछले साल यह फीस 68 हजार रुपए थी. मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना समेत अन्य श्रेणी के छात्रों के लिए शुल्क 14 हजार रुपए है. हालांकि, इन छात्रों को पांच साल की ग्रामीण क्षेत्र में सेवा का बैंक गारंटी बॉन्ड भरना पड़ता है.


सीट छोड़ने पर वसूला जाएगा आर्थिक दंड 

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बता दें कि चिकित्सा शिक्षा विभाग काउंसलिंग के दौरान सीट आवंटन के समय छात्रों से बंधपत्र भी भरवाता है. अगर कोई छात्र प्रवेश लेने के बाद सीट छोड़ दे तो उससे यह रकम वसूली जाती है. पहले सीट लिविंग बॉन्ड 5 लाख था. वर्ष 2017 में इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया. अब इसे बढ़ाकर 30 लाख किया जा रहा है. कोई भी छात्र काउंसलिंग के अंतिम चरण के आखिरी दिन पढ़ाई के दौरान सीट छोड़ता है तो उसे निष्कासित कर आर्थिक दंड वसूला जाएगा.


अधिकारियों के मुताबिक, ऑल इंडिया और राज्य कोटा के छात्रों के लिए अलग-अलग मेरिट लिस्ट तैयार होती है. इसी आधार पर छात्र अलग-अलग राज्यों में शुल्क जमा करवाकर सीट आवंटित करवा लेते हैं. इसके बाद अपने पसंद का कॉलेज मिलने के बाद सीट छोड़ देते हैं, जिस कारण सीट खाली रह जाती है.


छात्रों का कन्फ्यूजन दूर करेगी यह गाइडलाइन 


काउंसलिंग के दौरान छात्रों को कई बातों को लेकर कन्फ्यूजन रहता है. बता दें कि दूसरे चरण की काउंसलिंग शुरू होने के दो दिन पहले अगर छात्र सीट छोड़ते हैं तो उनपर सीट लिविंग बॉन्ड लागू नहीं होगा, बल्कि उसके बाद लागू होगा.


किसी भी चरण में आवंटित सीट पर प्रवेश लेने के बाद सीट छाेड़ने पर छात्र सभी चरणों के लिए अपात्र होंगे और उनका पंजीयन निरस्त हो जाएगा. अगर दूसरे चरण की काउंसलिंग के दो दिन पहले छात्र त्यागपत्र दे देते हैं, तो उनके द्वारा जमा की गई राशि में से 10 प्रतिशत काटकर लौटाया जाएगा, लेकिन यह शुल्क काउंसलिंग के बाद दिया जाएगा. एनआरआई कोटा के छात्रों के लिए शुल्क से 25 हजार रुपए की कटौती की जाएगी.


पहले चरण में आवंटित सीट समयावधि के अंदर सीट से त्याग पत्र प्रवेशित संस्था में ऑनलाइन देना होगा. समयावधि बीतने के बाद नियमानुसार सीट लिविंग बॉन्ड लागू होगा. वहींं दूसरे चरण या उसके बाद के चरणों में मध्य प्रदेश के स्थानीय मूल निवासी छात्र मेरिट सूची में उपलब्ध नहीं हाेने की स्थिति में राज्य के बाहर के छात्रों को मेरिट कम च्वाइस के आधार पर सीट आवंटित की जाएगी. वहीं सीट अपग्रेड होने की स्थिति में अपग्रेडेड सीट या कॉलेज में प्रवेश लेना अनिवार्य है.


ऑनलाइन अपग्रेडेशन प्रक्रिया के दौरान छात्र की पूर्व प्रवेशित सीट खुद निरस्त हो जाती है, जो दूसरे पात्र छात्र को मिल जाती है.




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First published: July 2, 2019, 10:43 AM IST
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