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आठ साल बाद खुलेगी पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस की फाइल

आठ साल बाद खुलेगी पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस की फाइल

राजधानी के बहुचर्चित पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस मामले में आठ साल बाद आरोपियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की है। राज्य सरकार ने एनआईए के अभियोजन अधिकारी सुभाष भट्टाचार्य को इस मामले की पैरवी के लिए विशेष अभियोजन अधिकारी नियुक्त किया है। पत्रकार पवन विद्रोही और उनके ड्राइवर की 31 जुलाई 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

राजधानी के बहुचर्चित पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस मामले में आठ साल बाद आरोपियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की है। राज्य सरकार ने एनआईए के अभियोजन अधिकारी सुभाष भट्टाचार्य को इस मामले की पैरवी के लिए विशेष अभियोजन अधिकारी नियुक्त किया है। पत्रकार पवन विद्रोही और उनके ड्राइवर की 31 जुलाई 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

राजधानी के बहुचर्चित पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस मामले में आठ साल बाद आरोपियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की है। राज्य सरकार ने एनआईए के अभियोजन अधिकारी सुभाष भट्टाचार्य को इस मामले की पैरवी के लिए विशेष अभियोजन अधिकारी नियुक्त किया है। पत्रकार पवन विद्रोही और उनके ड्राइवर की 31 जुलाई 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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राजधानी के बहुचर्चित पत्रकार पवन विद्रोही मर्डर केस मामले में आठ साल बाद आरोपियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की है। राज्य सरकार ने एनआईए के अभियोजन अधिकारी सुभाष भट्टाचार्य को इस मामले की पैरवी के लिए विशेष अभियोजन अधिकारी नियुक्त किया है। पत्रकार पवन विद्रोही और उनके ड्राइवर की 31 जुलाई 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इस बहुचर्चित मामले में भोपाल पुलिस और सीबीआई जांच कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर चुकी है। इस केस में पवन विद्रोही के तीन पार्टनर मुकेश जैन, राजेश जैन, राजेन्द्र जैन और यूपी शार्प शूटर जितेन्द्र सहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। आठ साल साल होने के बावजूद भी इस मामले में अभी तक अंतिम फैसला नहीं आया है। इसी के बाद राज्य सरकार ने सुभाष भट्टाचार्य को यह विशेष जवाबदारी सौंपी है।

ईटीवी से खास बातचीत में सुभाष भट्टाचार्य ने कहा कि अब इस मामले की तेजी से सुनवाई कर उनकी कोशिश होगी कि दोषियों को इस साल के अंत तक सजा दिलाई जा सकें। इस मामले में जांच एजेंसियों ने 34 लोगों को गवाह बनाया था। अब इन सभी के बयान दोबारा अदालत में होंगे। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 21 अप्रैल की तारीख तय की है।

पवन विद्रोही की जिस तरीके से हत्या की गई थी उससे राजधानी में दहशत फैल गई थी। घटना वाले दिन वह अपने ड्राइवर सरदार सिंह के साथ जेके रोड़ से गुजर रहे थे। उनके साथ आरोपी पार्टनर राजेन्द्र जैन और राजेश भी मौजूद थे। पवन और ड्राइवर पर फिल्मी स्टाईल से हमला हुआ था। साजिश में शामिल दोनों पार्टनर पवन और सरदार सिंह को घायल होने के बावजूद नजदीक के किसी अस्पताल नहीं ले गए। वह घटनस्थल से कई किलोमीटर नर्मदा अस्पताल पहुंचे तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।

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