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को-वैक्सीन वॉलेंटियर दीपक मरावी की मौत के बाद पीपल्स मेडिकल कॉलेज ने दी सफाई-हमने कुछ गलत नहीं किया

भोपाल में को-वैक्सीन ट्रायल के 9 दिन बाद एक दीपक मरावी नाम के वॉवेंटियर की मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं.
भोपाल में को-वैक्सीन ट्रायल के 9 दिन बाद एक दीपक मरावी नाम के वॉवेंटियर की मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं.

पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन अनिल दीक्षित ने कहा-गैस पीड़ितों को टारगेट नहीं किया गया.तय गाइड लाइन (Guide line) के तहत जिन इलाकों में हेल्थ वर्कर (Health worker) गए वहां पर गैस पीड़ितों की आबादी ज्यादा थी

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भोपाल.राजधानी भोपाल (Bhopla) के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में चल रहे को-वैक्सीन (Co-vaccine) ट्रायल में 20 से 25% अशिक्षित लोगों को डोज लगाया गया. यह जानकारी खुद कॉलेज के डीन ने मीडिया के सामने साझा की. कॉलेज की तरफ से कहा गया कि जो गाइड लाइन तय की गई थीं उसी के तहत लोगों को ट्रायल में शामिल किया गया.

को-वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवाल पर पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन अनिल दीक्षित ने मीडिया के सामने आकर बयान जारी किया. उन्होंने कहा जिसे बदनामी करना है करे. हम पूरी मेहनत के साथ अपना काम कर रहे हैं. हमारे काम में कोई बाधा नहीं आ रही है. इसलिए हम किसी भी तरह का कानूनी कदम नहीं उठाएंगे. पूरी प्रक्रिया के तहत ट्रायल चल रहा है. ट्रायल में शामिल होने के लिए हेल्थ वर्कर के जरिए तय 4 किलोमीटर के दायरे में लोगों को जागरूक किया गया.

सब कुछ प्रोसेस के तहत किया...
अनिल दीक्षित ने बताया ट्रायल में शामिल लोगों में से 20 से 25% लोग अनपढ़ हैं.उनके दस्तावेजों पर अंगूठे लगवाए गए हैं. सभी को काउंसलिंग और पूरी प्रक्रिया के तहत ट्रायल में शामिल किया गया. गैस पीड़ितों को टारगेट नहीं किया गया.तय गाइड लाइन के तहत जिन इलाकों में हेल्थ वर्कर गए वहां पर गैस पीड़ितों की आबादी ज्यादा थी. मृतक दीपक मरावी को कौन सा डोज लगा है इसको डिकोड करने का अधिकार हमारे पास नहीं है. उन्होंने कहा 1700 वॉलिंटियर को ट्रायल में शामिल किया गया है. बायोटेक तय करता है कि कौन सा डोज किसे देना है.
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