पाकिस्तानी और रिफ्यूजी है इनकी पहचान, बंटवारे के बाद नागरिकता की उम्मीद में गुजरे कई साल, अब CAA ही सहारा

भारत पाक बंटवारे के बाद से आज तक नहीं मिली नागरिकता

बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आने के 74 साल बाद भी हजारों शरणार्थी भारत के हर कोने कोने में आ बसे, जिन्हें आज तक भारत की नागरिकता नहीं मिली. उनकी पहचान पाकिस्तानी या रिफ्यूजी के नाम से ही होती है. इस पाकिस्तानी टैग नेम से उन्हें लानत जैसा महसूस होता है.

  • Share this:
भोपाल. बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आने के 74 साल बाद भी हजारों शरणार्थी भारत के हर कोने कोने में आ बसे, जिन्हें आज तक भारत की नागरिकता नहीं मिली. उनकी पहचान पाकिस्तानी या रिफ्यूजी के नाम से ही होती है. इस पाकिस्तानी टैग नेम से उन्हें लानत जैसा महसूस होता है. वह पाकिस्तानी से भी जलील और प्रताड़ित कर निकाले गए और भारत आकर पांच पुश्तों के बाद भी लबारिश सी जिंदगी जी रहे हैं. यहां हज़ारों परिवारों को अपनी पहचान मिलने का इंतजार है. ऐसे हज़ारों लोग हैं जो अब कहीं के नहीं रहे. न वह पाकिस्तान के नागरिक हैं न भारत ने उन्हें नागरिकता दी.

बंटवारे ने उनका सबकुछ छीन लिया. नाम, पता, पैसा, दौलत, और सुकून. अब बचा है तो एक लानत वाला नाम जिससे उन्हें नफ़रत हो चुकी है. मगर मज़बूरी में उन्हें इसी नाम के साथ जीना पड़ रहा है. भारत पाक के बंटवारे को 74 हो गए. ऐसे लोगों ने युद्ध, प्रताड़ना, संघर्ष, हिंसा सब झेला,और बंटवारे के कारण अपना देश पाकिस्तान छोड़कर भारत आए सैकड़ों परिवार आज भी जब अपने पुराने दिन याद करते है, तो सहम जाते है. लेकिन 74 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद कई लोगों का देहांत हो चुका है. कुछ लोगों की पांच पीड़ियों के बाद भी उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली. वह आज भी रिफ्यूजी या पाकिस्तानी के नाम से जाने जाते हैं.

ये परिवार ज़ब भोपाल आए तो उन्हें भोपाल के रेलवे स्टेशन के पास बने रिफ्यूजी केम्प में ठहराया गया. जहां बने बैरक में आज भी उनके परिजन रह रहें हैं. इस बैरक में पांच पीढ़ियों का साथ जीवन कटाने वाले लोगों कों अपनी पहचान मिलने का इंतजार है. कुछ आसपास किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं. हालांकि शिवराज सरकार ने भी सैकड़ों ऐसे परिवारों को उनका मौलिक अधिकार दिया है. वह अब भारतीय होने पर गर्व महसूस कर रहें हैं. बंटवारे के समय पाकिस्तान से हैदराबाद के सिंध प्रांत होते हुए सेकड़ों परिवार भोपाल आ बसे. जहां आज भी वह रिफ्यूजी कैंप में रह रहें हैं.

उन्होंने बताया कि वे पाकिस्तान प्रांत में अपने पूरे परिवार के साथ रहते थे. जहां पर उनकी जमीन थी. इस जमीन पर वे खेती करते थे, जिससे आराम से उनका जीवनयापन हो रहा था. बंटवारे के बाद वे एक-एक रोटी के लिए तरस रहे हैं. 74साल के बाद भी उनके पास खुद का घर नहीं है. दुकान किराए की है, घर किराए का है और अब तो उन्हें लगता है कि यह जिंदगी भी किराए की ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) लाकर लोगों को देश में रहने का मौलिक अधिकार दिया है.

बंटवारे के वक्त जो गुजराती थे उनके लिए गुजरात बना दिया. जो पंजाबी थे उन्हें पंजाब प्रांत में बसा दिया. लेकिन सिंधियों के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की थी. ऐसे में वह देश की अलग-अलग जगहों में आज भी अपना ठिकाना ढूंढ रहे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा CAA लाने के बाद अब लोगों को आस जगी है कि वे भी भारत के नागरिक कहलाएंगे.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.