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Bhopal : विवाद में फंसा Dial 100 का 600 करोड़ का टेंडर! जाली दस्तावेज लगाने का आरोप

जिस कंपनी को टेंडर नहीं मिला उसने घोटाले का आरोप लगाया है.

जिस कंपनी को टेंडर नहीं मिला उसने घोटाले का आरोप लगाया है.

टेंडर घोटाले की जांच पूरी हो चुकी है और एडीजी संजय झा ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है.संजय झा ने बताया कि इस मामले में जीवीके ने जो शिकायत की है वह सही नहीं पाई गई है. जो दस्तावेज टेंडर में लगाए गए हैं उसका वेरिफिकेशन किया गया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में डायल हंड्रेड (Dial 100) फेस 2 का 600 करोड़ का टेंडर (Tender) विवाद में फंस गया है.जिस कंपनी को टेंडर मिला है उस पर जाली दस्तावेजों के जरिए टेंडर लेने का आरोप लग रहा है. इस मामले की जांच की मांग उस कंपनी ने की है जिसे टेंडर नहीं मिल पाया था.

मध्यप्रदेश में डायल हंड्रेड फेस टू में 1000 गाड़ियां चलाई जानी हैं.इसके लिए शासन ने टेंडर जारी किए थे. इसी टेंडर प्रक्रिया में GVK EMRI और अशोका बिल्डकॉन कंपनी शामिल हुई थीं.अशोका बिल्डकॉन ने मेसर्स ABP ट्रेवल्स एंड फेसिलिटी मैनेजमेंट के साथ जॉइंट वेंचर में टेंडर में हिस्सा लिया था. GVK ने ABP ट्रेवल्स एंड फेसिलिटी मैनेजमेंट पर IBM कंपनी का फर्जी दस्तावेज टेंडर में लगाने का आरोप लगाया है.GVK ने पुलिस के दूरसंचार मुख्यालय, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री से मामले की शिकायत की है. इस बीच इस मामले की जांच कर रहे एसपी साकेत पांडे का पुराने मामलों का हवाला देकर कम्युनिटी पुलिस में ट्रांसफर कर दिया गया.अब दूरसंचार एडीजी संजय झा ने मामले की जांच कर फाइल शासन को भेजी है.

शिकायत में दिए ये फैक्ट...
GVK ने 4 फरवरी को दूरसंचार मुख्यालय के एसएसपी से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि अशोका बिल्डकॉन के पास अनुभव नहीं है. इसके साथ जॉइंट वेंचर करने वाली मेसर्स ABP ट्रेवल्स एंड फेसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी छत्तीसगढ़ और राजस्थान में डिसक्वालीफाई हो चुकी है. टेंडर में जो नियम और प्रावधान दिए गए थे उसका पालन नहीं किया गया. यह भी आरोप लगाए गए कि आईबीएम कंपनी गुड़गांव और बेंगलुरु में 250 वीकल लगाने के दस्तावेज कंपनी ने टेंडर में लगाए. जबकि ये दस्तावेज जाली बताए जा रहे हैं. वहां पर कंपनी की इतनी गाड़ियां लगायी ही नहीं हैं.
छत्तीसगढ़ के प्रोजेक्ट को बताया संदिग्ध


मेसर्स ABP ट्रेवल्स एंड फेसिलिटी मैनेजमेंट छत्तीसगढ़ में हंड्रेड डायल का काम देख रही है. हालांकि वहां पर यह कंपनी सिर्फ वाहनों में ड्राइवर उपलब्ध कराती है. छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों ने 100 डायल में काम करने के दस्तावेज भी इस कंपनी को मुहैया कराए हैं और वही दस्तावेज कंपनी ने टेंडर में लगाए हैं. जीवीके ने यह भी आरोप लगाए हैं कि जो टेंडर छत्तीसगढ़ में इस कंपनी को मिला है वह भी संदिग्ध है.

पुलिस ने दी क्लीनचिट
इस मामले की जांच कर रहे एसपी साकेत पांडे को पुराने मामलों का हवाला देकर हटाया गया और उनका ट्रांसफर दूसरी जगह कर दिया गया.हालांकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और एडीजी संजय झा ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है.संजय झा ने बताया कि इस मामले में जीवीके ने जो शिकायत की है वह सही नहीं पाई गई है. जो दस्तावेज टेंडर में लगाए गए हैं उसका वेरिफिकेशन किया गया है. आईबीएम कंपनी के जिस अधिकारी ने दस्तावेज जारी किए हैं, उसने इस बात को स्वीकार किया है कि वह इस तरीके के दस्तावेज को उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत हैं.
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