OPINION : वो बातें जो अमित शाह को दूसरे अध्यक्षों से अलग करती हैं

इंदौर में अमित शाह ने कहा ये मालवा पूर्व अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे का गढ़ है और मैं आपसे चुनाव जीतने का गुर जानने आया हूं कि लगातार 15 साल तक सत्ता में कैसे रहा जा सकता है.

Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 8, 2018, 12:48 PM IST
OPINION : वो बातें जो अमित शाह को दूसरे अध्यक्षों से अलग करती हैं
अमित शाह. फाइल फोटो
Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 8, 2018, 12:48 PM IST
2019 के चुनाव आते आते अमित शाह  देश के ऐसे एकमात्र अध्यक्ष होंगे जिसने पूरे देशभर के राज्यों में चुनाव करवाएं हैं. भाजपा अध्य्क्ष अमित शाह ने इंदौर में कार्यकर्ताओं के महासम्मेलन में दंभ के पुट साथ भले ही ये बात कहीं . लेकिन इसका मतलब बूथ पर बैठने वाले कार्यकर्ताओं में जोश भरना भी था कि किस तरह आप जैसा कार्यकर्ता पार्टी के शीर्ष पर पहुंचने की कुव्वत रखता है.

एक योद्धा की तरह अपनी सेना का मनोबल कैसे बढ़ाना है ये उन्हें बखूबी आता है. और ऐसी ही कई बातें हैं जो अमित शाह को भाजपा के दूसरे अध्यक्षों से अलग करती हैं. शाह के अध्य्क्ष बनने के बाद मध्यप्रदेश का यह पहला चुनाव है. कुशाभाऊ ठाकरे लेकर , आडवाणी, वैंकेया, राजनाथ सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ चुका भाजपा का कार्यकर्ता अब इस चुनाव में अलग ही तब्दीली महसूस कर रहा है. कैडर बेस्ड पार्टी की पहचान रखने वाली भाजपा की कार्य संस्कृति अब किसी कॉर्पोरेट प्रोफेशनल की तरह दिखाई देने लगी है.



. इंदौर के 21 सौ बूथ, अन्य आठ जिलों को मिलाकर 5 हजार बूथ कार्यकर्ताओं और10 हजार से ज़्यादा आमंत्रित कार्यकर्ताओं के लिए ये सम्मेलन था. यहां प्रत्येक कार्यकर्ता को उसके नाम पर एंट्री दी गई थी. प्रत्येक मंडल, वॉर्ड सदस्यों के बैठने की जगह तय थी. कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन इस तरह था जैसे ये प्रोफेसर अमित शाह सर की क्लास हो और इसमें आए ‌विधायक, नेता, कार्यकर्ता सब स्टुडेंट्स हैं. माहौल में वही बैचैनी थी जो परीक्षा हॉल में बैठे हुए स्टुडेंट को होती है.

कब क्या सवाल हो जाए और उसका सही जवाब दे पाएं, इस जद्दोजहद में हर नेता तैयारी से बैठा हुआ था. कइयों ने तो बाकायादा कुछ जवाब रट भी लिए थे. कई कार्यकर्ताओं को लगता है कि शाह भाजपा के एकमात्र ऐसे अध्यक्ष हैं जो पार्टी के कार्यकर्ता को सिर्फ काम ही नहीं सौंपते बल्कि उसे ज़िम्मेदार भी बना देते हैं.

दो साल पहले शाह ने कार्यकर्ता सम्मेलन में कई ज़िलाध्यक्षों से पूछ लिया था कि आपके यहां कुल कितने बूथ हैं? कितने मंडल अध्यक्षों के नाम और मोबाइल नंबर याद हैं? खड़े होकर बताइए. अचानक पूछे गए इन सवालों का कुछ लोग तो जवाब ही नहीं दे पाए थे. जिन लोगों ने जबाव दिया, तो शाह ने उन नंबरों पर फोन लगाकर इसकी तस्दीक भी की कि नाम और नंबर सही हैं या नहीं.

इस बैठक में शाह ने चुनावी तैयारी और संगठन को लेकर एक फॉर्मूला दिया था. उसे चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट का पाठ कहा जा सकता है. हर विधान सभा क्षेत्र, वॉर्ड, मंडल और बूथ तक का प्रारूप इसमें तय किया गया है. और चुनाव इसी पर लड़ा जाना है. इस महा सम्मेलन में आने से पहले हर विधायक ने, मंडल अध्यक्षों ने उस फॉर्मूले की बुकलेट तैयार कर ली थी. और वो अपनी एक्जाम गाइड की तरह उसे अपने पास रखे हुए थे.

हालांकि इस बार शाह का अंदाज़ कुछ और था. उन्होंने किसी नेता या कर्यकर्ता से कोई सवाल ही नहीं किया. बल्कि उन्होंने तो यहां तक कहा कि ये मालवा पूर्व अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे का गढ़ है और मैं आपसे चुनाव जीतने का गुर जानने आया हूं कि लगातार 15 साल तक सत्ता में कैसे रहा जा सकता है.
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अपने भाषण में शाह एक जगह कार्यकर्ताओ से कहते हैं कि यह चुनाव नहीं मणिकर्ण योग है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समझने के लिए इसकी व्याख्या की जाए तो इसका मतलब है – शनि का शुभ स्थान पर बैठना और वहां वृहस्पति की दृष्टि होना. याने एक ऐसा दुलर्भ योग जिसमे एक भाव से दो सिद्धियां मिल जाएं. यानि 2018 के साथ 2019 की जीत. यानि यह चुनाव कार्यकर्ता के भरोसे है.लेकिन संगठन के लिए चौंकाने वाला पहलु यह भी है कि इस सम्मेलन में कार्यकर्ता की भीड़ नहीं पहुंच पाई. पांच हजार लोगों का खाना बच गया.

गुर सीखने आया

मैं यहां गुर सिखाने नहीं बल्कि गुर सीखने आया हूं कि 15 साल लगातार सत्ता में किस तरह रहा जा सकता है. भाजपा के सबसे मज़बूत गढ़ मालवा से 2018 और 2019 के चुनावी महा जनसंपर्क अभियान की शुरुआत करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने दिल की बातें कार्यकर्ताओं से कीं. ये पहला चुनाव है जब मध्यप्रदेश भाजपा का कार्यकर्ता अमित शाह से आमने –सामने रूबरू हो रहा है.

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