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ANALYSIS: विश्वास मत की बजाए अविश्वास प्रस्ताव का सामना क्यों करना चाहते हैं सीएम कमलनाथ?
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News18 Madhya Pradesh
Updated: March 17, 2020, 7:38 PM IST
ANALYSIS: विश्वास मत की बजाए अविश्वास प्रस्ताव का सामना क्यों करना चाहते हैं सीएम कमलनाथ?
कमलनाथ चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी उनके खिलाफ सदन में अविश्वास का प्रस्ताव लेकर आए (फाइल फोटो)

कमलनाथ विश्वास मत (Vote of Confidence) हासिल करने के बजाए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) का सामना करना चाहते हैं. दरअसल विधायकों की आवश्यक संख्या के अभाव में ये रास्ता उनके लिए ज्यादा मुफीद है और यही प्रदेश में यही सत्ता की कुंजी भी है.

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दिनेश गुप्ता
भोपाल. ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद अपनी सत्ता बचाने में जुटे मुख्यमंत्री कमलनाथ (CM Kamalnath) ने विधानसभा के फ्लोर पर अपना बहुमत साबित करने के लिए जो शर्त रखी उसमें राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji tandon) कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं. कमलनाथ चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी उनके खिलाफ सदन में अविश्वास का प्रस्ताव लेकर आए. एक तरह से उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वो राज्यपाल के निर्देश पर सदन में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास मत का प्रस्ताव पेश नहीं करेंगे.

कमलनाथ सरकार के पक्ष में नहीं है ये गणित
विधायकों का गणित कमलनाथ के अनुकूल नहीं है. मुख्यमंत्री कमलनाथ यह अच्छी तरह जानते हैं कि बेंगलूरू में बैठे विधायकों के इस्तीफे यदि स्वीकार किए जाते हैं तो उनकी सरकार स्पष्ट तौर पर अल्पमत में आ जाएगी. कमलनाथ और कांग्रेस की रणनीति यह है कि विधायकों को किसी तरह से भोपाल लाया जाए. बागी विधायक सीआरपीएफ की सुरक्षा के बगैर भोपाल आने को तैयार नहीं है. बेंगलूरू में कुल 22 विधायक थे. विधानभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने इनमें से 6 विधायकों के इस्तीफे उनके भोपाल आए बगैर मंजूर कर लिए थे. इसके बाद से ही भरतीय जनता पार्टी लगातार 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के लिए दबाव बना रही है. जबकि विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति कह चुके हैं कि जब तक विधायक सामने नहीं आते वे इस्तीफे पर फैसला नहीं लेंगे. विधानभा अध्यक्ष द्वारा 6 विधायकों के इस्तीफे उनकी मौजूदगी के बगैर मंजूर किए जाने से कांग्रेस बैकफुट पर थी. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 114 सीटें जीती थीं. विधानसभा में बहुमत के लिए कुल 116 सीटों की जरूरत होती है.



सदन में कांग्रेस भजपा का संख्या बल
कांग्रेस ने बसपा-सपा और निर्दलीय विधायकों का समर्थन लेकर सरकार बनाई थी. सदन में बसपा के दो और सपा का एक विधायक है. ये तीनों विधायक सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में मौजूद नहीं थे. ये माना जा रहा है कि इन विधायकों ने अपने विकल्प खुले रखे हैं. कांग्रेस के 16 बागी विधायक पार्टी का व्हीप जारी होने के बाद भी सदन में नहीं आए. 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 92 रह जाती है. 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद अब कांग्रेस के विधायकों की कुल संख्या 108 है. भारतीय जनता पार्टी के 107 विधायक हैं. 16 बागी विधायक यदि सदन में नहीं रहते हैं तो कमलनाथ की सरकार फ्लोर टेस्ट से निकल नहीं पाएगी. यही कारण है कि वे फ्लोर टेस्ट से बच रहे हैं.



News - कमलनाथ अविश्वास प्रस्ताव का सामना इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि इसमें राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं होती
कमलनाथ अविश्वास प्रस्ताव का सामना इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि इसमें राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं होती


अविश्वास प्रस्ताव पर क्यों है कमलनाथ का जोर
मुख्यमंत्री कमलनाथ के विश्वास मत हासिल करने के लिए जो प्रक्रिया राज्यपाल लालजी टंडन निर्धारित की है, उसमें हाथ उठाकर वोट लेने के लिए कहा गया है. पहले राज्यपाल ने इलेक्ट्रानिक वोट के निर्देश दिए थे. विधानसभा सचिवालय ने जब कहा कि मशीन खराब है तो हाथ उठाकर प्रस्ताव के पक्ष-विपक्ष में वोट लेने के लिए कहा गया. अविश्वास प्रस्ताव पर कमलनाथ का जोर इसलिए है कि इस प्रक्रिया में राजभवन का किसी भी तरह का कोई दखल नहीं रहता है. अध्यक्ष प्रस्ताव पर निर्णय ध्वनि मत से भी ले सकते हैं, भले ही सदन में कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम हो. अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने की प्रक्रिया विधानसभा कार्य संचालन नियमों में दी गई है. प्रस्ताव की सूचना विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के पहले दी जानी होती है.

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर स्पीकर के अधिकार
सदन में प्रस्ताव पर चर्चा की मंजूरी मिल जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह इस पर चर्चा और वोट कब कराए. इस प्रक्रिया में न्यूनतम समय 10 दिन का लगता है. विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च की सुबह साढ़े दस बजे तक के लिए स्थगित है. सदन की कार्यवाही जब शुरू होगी, प्रस्ताव उस वक्त ही पेश हो सकता है. प्रक्रिया में लगने वाले समय को देखते हुए भाजपा इस विकल्प पर नहीं जाना चाहती. मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव कहते हैं कि जब राज्यपाल ने ही मुख्यमंत्री से विश्वास मत हासिल करने के लिए कहा है तो हमे अविश्वास प्रस्ताव का उपयोग करने की आवश्यकता क्या है?

अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस भाजपा के हैं अलग-अलग दावे
मुख्यमंत्री कमलनाथ का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी थी. मुख्यमंत्री के इस दावे की पुष्टि विधानसभा सचिवालय ने अब तक नहीं की है. विधानसभा के प्रमुख सचिव कहते हैं कि उन्हें सूचना प्राप्त नहीं हुई. पूर्व मंत्री नरोत्त्म मिश्रा कहते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. राज्यपाल ने सोमवार को कमलनाथ सरकार को विश्वास मत हासिल करने के लिए एक और मौका दिया था. राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 17 मार्च को सदन में विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिए थे. राज्यपाल के निर्देश के बाद भी आज विधानसभा की कार्यवाही नहीं हुई.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है. इस पर सुनवाई बुधवार को होनी है. मुख्यमंत्री कमलनाथ जैसा दावा कर रहे हैं कि भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है और चर्चा के लिए स्वीकार नहीं हुआ है तो नियमों के अनुसार भाजपा के हाथ में अब यह हथियार भी फिलहाल नहीं बचेगा. इस प्रस्ताव के लिए भाजपा को अगले सत्र का इंतजार करना होगा. मध्य प्रदेश विधानसभा के कार्य संचालन नियमों में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है कि दो अविश्वास प्रस्ताव के बीच की समयावधि क्या होगी. अर्जुन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में एक ही सत्र के दौरान दो-दो बार विधानसभा का प्रस्ताव आ चुका है.

बीजेपी के समक्ष बचे विकल्प
राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में भारतीय जनता पार्टी के पास एक मात्र विकल्प सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का इंतजार करना ही है. विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च से पहले शुरू होने की कोई संभावना भी फिलहाल नहीं है. सुप्रीम कोर्ट यदि फ्लोर टेस्ट के लिए कोई समयावधि तय करता है तो ही सदन की कार्यवाही 26 मार्च से पहले शुरू हो पाएगी. एक विकल्प यह भी हो सकता है कि पर्याप्त सुरक्षा मिलने पर बागी विधायक अपने इस्तीफे को मंजूर करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित हो जाएं. इसकी संभावना बेहद कम है. राज्य सरकार कोई पत्र सीआरपीएफ को लिखे तब कुछ संभावना बन सकती है.

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First published: March 17, 2020, 7:38 PM IST
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