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ANALYSIS : मोदी लहर में हिल गयी मध्य प्रदेश में कांग्रेस के किले की हर दीवार

कमलनाथ, दिग्विजय, सिंधिया

कमलनाथ, दिग्विजय, सिंधिया

मोदी का यह नारा असर कर गया कि आपका वोट सीधे मुझे जाएगा. इसने गुना- शिवपुरी में सिंधिया को हरा दिया और छिंदवाड़ा में जीत का अंतर मामूली कर दिया.

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मध्यप्रदेश में सबसे चौंकाने वाला चुनावी परिणाम याने कांग्रेस के स्टार लीडर ज्योतिरादित्य सिंधिया के किले का ढ़ह जाना और मुख्यमंत्री कमनलाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की दीवारों का हिल जाना है. मोदी लहर में सिंधिया चुनाव हार गए हैं. वहीं कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ हारते –हारते बचे हैं. छिंदवाड़ा के सात में से चार विधानसभा क्षेत्रों में उनकी हार हुई है. सिर्फ तीन विधानसभा वो जीत पाए हैं.
प्रियदर्शिनी सक्रिय थीं
यह मोदी के नाम की आंधी थी. जिसने सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का किया है. गुना- शिवपुरी की अपनी सीट पर हालात मुश्किल हैं,इसका अंदाज शायद उन्हें पहले ही लग चुका था. विधानसभा चुनाव में तीन सीट्स पर कांग्रेस हार गई थी. अपने चुनावी कैंपेन में भी वे क्षेत्र की जनता से सवाल कर रहे थे कि उनका लोकसभा क्षेत्र होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार क्यों हारें ? डा. केपी यादव उनके सांसद प्रतिनिधि थे. उनकी बगावत उन्हें भारी पड़ गई. शायद इसीलिए सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया पूरे दो महीने तक गुना- शिवपुरी में चुनाव प्रचार करती रहीं.
आक्रामक शैली में सिंधिया
सिंधिया दिल्ली में बड़े कद के नेता हो चुके हैं. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें महासचिव बनाकर प्रियंका गांधी के बराबर यूपी का प्रभार दिया है. पिछले पांच साल में देखें तो कांग्रेस की आवाज़ सड़क से ज्यादा संसद में गूंजी है. कांग्रेस के ऐसे नेता जिन्होंने आक्रामक शैली में संसद में मोदी सरकार को घेरा हो उनमे एक नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी है. सिंधिया का सदन में नहीं होना कांग्रेस को भारी पड़ सकता है. ऐसे वक्त में जब कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन ख़डगे भी चुनाव हार चुके हों.
उच्च सदन में सिंधिया!
हाल – फिलहाल के राजनीतिक हालातों पर गौर करें तो इस बात की संभावना दिखाई दे रही है कि कांग्रेस हाईकमान अब ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा में भिजवा सकता है. वे संसद के उच्च सदन में कांग्रेस की ताकत बन सकते हैं. मध्यप्रदेश में एक साल के बाद राज्यसभा की सीट्स खाली हो रही हैं. दो से ज्यादा पद खाली होंगे जिसमें एक नाम सिंधिया का होगा.
अनुभनहीन नकुलनाथ
कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ मध्यप्रदेश से दिल्ली में एकमात्र सांसद होंगे. 28 सीट्स यहां से कांग्रेस हार चुकी है. नकुला नाथ की जीत याने कमलनाथ की जीत है. जो यहां से लगातार 9 बार के सांसद रहे. अपनी पिता की विरासत को संभालने वाले नकुलनाथ का राजनीतिक अनुभव सिर्फ अपने पिता के लिए चुनाव प्रचार तक सीमित रहा है. मैदानी राजनीति से वे दूर रहे हैं. दून स्कूल और अमेरिका से एमबीए की डिग्री लेने वाले नकुलनाथ के लिए पहली जीत राजनीति को करीब से देखने और सीखने की होगी.
नींव हिल गई हैं
मोदी की आंधी ने दरअसल कमलनाथ के इस मज़बूत किले की नींव को हिला दिया है. नकुल नाथ सिर्फ 37 हजार वोटों से चुनाव जीते हैं. कमलनाथ स्वयं भी अपना विधानसभा का उपचुनाव मात्र 25 हजार वोटों से जीत पाए. यह पहला मौका है जब कमलनाथ के गढ़ में उनकी जीत का अंतर इतना कम हुआ हो. पिता – पुत्र ये चुनाव तो जीत गए हैं. लेकिन इस जीत ने दरकती दीवारों की कहानी बयां कर दी है.
सिर्फ मोदी का असर
राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता कहते हैं कि सिंधिया की हार और छिंदवाड़ा में कमजोर जीत की वजह मोदी फैक्टर है. मोदी का यह नारा असर कर गया कि आपका वोट सीधे मुझे जाएगा. इसने गुना- शिवपुरी में सिंधिया को हरा दिया और छिंदवाड़ा में जीत का अंतर मामूली कर दिया.

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