Analysis: मालवा-निमाड़ की अहम लड़ाई के बीच अमेरिका चले गए ज्योतिरादित्य सिंधिया

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी की मौजूदगी का कार्यकर्ताओं पर असर पड़ा है, लेकिन यह देखने वाली बात होगी की यह वोट में तब्‍दील होता है या नहीं.

Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 5:43 PM IST
Analysis: मालवा-निमाड़ की अहम लड़ाई के बीच अमेरिका चले गए ज्योतिरादित्य सिंधिया
चुनाव में भी सिंधिया ने उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा समय अपने लोकसभा क्षेत्र गुना-शिवपुरी को दिया है. (File Photo)
Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 5:43 PM IST
मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव बस अब अपने आखिरी दौर में है. मालवा–निमाड़ की आठ सीटों पर बड़ा दांव लगा हुआ है, लेकिन सियासी गर्मी और दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर को छोड़ कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया अमेरिका रवाना हो गए हैं. चुनाव कैंपेन को छोड़ कर सिंधिया का विदेश जाना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है. चुनाव में भी सिंधिया ने उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा समय अपने लोकसभा क्षेत्र गुना-शिवपुरी को दिया है.

गुना-शिवपुरी में 12 मई को वोटिंग के बाद सिंधिया सिर्फ एक चुनावी सभा करने धार पहुंचे जहां उनके कोटे से दिनेश ग्रेवाल को टिकट मिला है. अगर ज़मीनी हालात की बात की जाए तो जानकारों की राय में सिर्फ छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में ताकत दिखा चुकी कांग्रेस को एकजुट रखने के लिए लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री समेत बड़े नेताओं को जोर लगाना पड़ रहा है.



जीत के दावे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव सिंह कहते हैं कि इस बार हम दोगुनी ताकत से सीट निकालेंगे. सिंधिया अमेरिका में अपने बेटे की ग्रेज्युएशन सेरेमनी के लिए गए हैं. वहां से भी वे लगातार संपर्क में हैं. अपने समर्थक सभी मंत्रियों- विधायकों को उन्होंने अपने क्षेत्र में सक्रिय रहने और जिम्मेदारी से काम करने के लिए कहा है.

सरकार-संगठन एक
कमलनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी. यानी सरकार और संगठन एक हो गया है. जिसका असर अब ग्राउंड में दिखाई दे रहा है. मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया बीमार होने के बाद प्रदेश में नहीं लौटे हैं. स्थानीय संगठन के बूते और अपनी समर्थकों की फौज के दम पर उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. कुछ जिलों में गुटबाजी सामने आई है. बड़े नेताओं की नाराज़गी और मंत्रियों की अपने इलाके में निष्क्रियता का असर लगातार दिखा.

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मालवा- निमाड़ सबसे ख़ास
19 मई को आखिरी दौर की वोटिंग है. इसमें मालवा- निमाड़ की आठ सीटें आ रही हैं. यह वे इलाके हैं, जिसके दम पर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी का रास्ता तय किया है. करीब 80 विधानसभा सीटों वाला यह इलाका कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद रहा. यहां इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, देवास, खंडवा, खरगोन, धार, रतलाम जैसी सीट आती हैं. जिनमें से पांच सीटें एससी और एसटी वर्ग की हैं.

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इलाके में बढ़ा है कांग्रेस का वोट बैंक
कांग्रेस ने यहां के शहरी इलाकों में 30 फीसदी अपना वोट बढ़ाया है तो एससी-एसटी वर्ग में वह भाजपा से 45 फीसदी वोट बैंक से आगे बढ़ी है. लेकिन, इन सभी सीट पर कांग्रेस को भाजपा से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है. उज्जैन रतलाम को छोड़ दिया जाए तो सभी छह सीटों पर कांग्रेस पिछले दो से तीन दशक से लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाई है.

विधान सभा चुनाव से अलग स्थिति
कांग्रेस के पास एक उम्मीद है, वह है विधानसभा चुनाव में जीती हुई सीटें. लेकिन जीत का अंतर इतना कम है कि उसे लोकसभा में टिकाए रखना आसान नहीं है. देखा जा रहा है कि विधानसभा के अपने चुनाव में तो विधायक या मंत्री ने पूरी ताकत झोंकी थी लेकिन लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस के ही प्रत्याशी के लिए मैदान नहीं पकड़ रहा है.

तीनों बड़े नेता अपने चुनाव में
कई मंत्री और विधायक अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के कारण अपने क्षेत्र से गायब रहे. सिंधिया समर्थक नेता मंत्री पूरे समय गुना – शिवपुरी में रहे. दिग्विजय सिंह समर्थकों ने अपना इलाका छोड़कर भोपाल में डेरा जमाया. मुख्यमंत्री कमलनाथ भी छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से विधानसभा का उपचुनाव लड़े वहीं उनके बेटे नकुलनाथ ने लोकसभा प्रत्याशी रहे हैं. नतीजा ये रहा कि उनका ज्यादातर समय छिंदवाड़ा तक सीमित रहा.

कमलनाथ की चेतावनी
छिंदवाड़ा में चुनाव खत्म होने के बाद कमलनाथ भोपाल से चुनाव की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. उन नेताओं को मंत्रियों को चेतावनी दे रहे हैं जो अपने इलाके से नदारद हैं या गैर सक्रिय हैं. इधर दिग्विजय सिंह भी 12 मई को भोपाल चुनाव होने के बाद चुनाव कैंपेन में उतर गए हैं. धार, इंदौर, मंदसौर, शाजापुर में उन्होंने दौरे शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की चुनावी कैंपेन से पार्टी वर्कर चार्ज हुआ है. लेकिन इसे वोट में तब्दील करना कांग्रेस के लिए बड़ा मुद्दा है.

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