Analysis : Union Budget 2019 : औसत रहा जनता का बही-खाता

बजट 2019 - बजट में महिलाओं की आय़ बढ़ाने पर फोकस ही नहीं है.आय़ बढ़ाने को लेकर प्रावधान जरूर होने चाहिए थे.

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 5, 2019, 7:21 PM IST
Analysis : Union Budget 2019 : औसत रहा जनता का बही-खाता
निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट
Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 5, 2019, 7:21 PM IST
मोदी सरकार की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहला बजट पेश किया. बजट का नाम जनता का बहीखाता रखा गया. इसमें हर वर्ग को खुश करने की कोशिश जरूर की गई,लेकिन बहीखाता औसत रहा.बहीखाता के नाम पर बस परंपरा निभाने की कोशिश हुई.

भोपाल में आर्थिक मामलों के जानकार शशिकांत के नज़रिए से-बहीखाता में सबसे ज्यादा कृषि पर फोकस किया जाना था. लेकिन बजट में कृषि को सिर्फ वित्त मंत्री सिर्फ छूकर निकल गईं. प्राइमरी एजुकेशन में भी बजट के बाद लोगों को बदलाव की उम्मीद थी. लेकिन कोई नए प्रावधान ना होने से निराशा ही हाथ लगी. पब्लिक हेल्थ सैक्टर में भी कोई बड़े प्रावधान नहीं हैं.रेलवे में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही प्राइवेटाजेशन का भी कोई जिक्र नहीं है. सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य जम्मू कश्मीर के लिए सरकार के पास बजट में कुछ भी नहीं है.

रोजगार पर फोकस नहीं
बहीखाता में बेरोज़गारी को लेकर कोई बात नहीं की गई है.बेरोज़गारी को लेकर काफी बहस भी हुई है.पीएम नरेंद्र मोदी जो युवाओं की पहली पसंद हैं. युवाओं ने पीएम मोदी को सबसे ज्यादा वोट किया था, लेकिन

2014तक पानी पहुंचाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी
बहीखाता में कहा गया है कि 2024तक पानी के लिए प्लान.पानी सरकार की संवैधानिक जि़म्मेदारी है,लक्ष्य नहीं है.सबके लिए पानी तो सरकार को उपब्लध कराना ही होगा. सरकार को खुद अपनी तरफ से कोई प्लान तैयार करना होगा.

सरकार ने इस बार बहीखाता में डिफेंस सैक्टर के लिए कुछ भी प्लान नहीं किया है.डिफेंस सैक्टर के साथ ही पहली बार है जब किसानों के लिए कोई नयी योजना नहीं हैं. सरकार पिछले बजट में उदय योजना लेकर आयी थी. वो सफल नहीं होने पर वन ग्रिड वन नेशन योजना लायी गयी.
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बैंकिंग सैक्टर--
पब्लिक बैकिंग में 70 हजार करोड़ बजट का प्रावधान किया गया है.इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुए जेटली ने बैकों के लिए 2 लाख करोड़ की पूंजी लगाने की बात कही थी.अब सरकार 70हज़ार करोड़ क्यों ला रही है.बैकों की हालत खराब है.सवाल वही है कि आखिर पिछला पैसा कहां गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा बैकों के एनपीए की 4 लाख करोड़ की रिकवरी की गई है.बैंको का असली एनपीए क्यों नहीं बताया गया है.

टैक्स में-पैन कार्ड की जरूरत नहीं, डिजिटल पर चार्ज नहीं लगेगा
-बहीखाता में होना ये था कि टैक्स की प्रकिया को और सरल करना चाहिए था.आधार कार्ड से जोड़ने के पीछे कोई तर्क समझ नहीं आ रहा है.

मुद्रा योजना में एक लाख तक का लोन
मुद्रा योजना के लिए पूर्णकालिक बजट में वित्त मंत्री ओवर ड्राफ्ट लेकर आई हैं.महिलाओं के लिए ओवर ड्राफ्ट बस फौरी राहत है. बुराइयों के बीच छोटी सी अच्छाई है. लेकिन बजट में महिलाओं की आय़ बढ़ाने पर फोकस ही नहीं है.आय़ बढ़ाने को लेकर प्रावधान जरूर होने चाहिए थे.

हायर एजुकेशन
उच्च शिक्षा में बजट बढ़ाया गया है. भले ही छोटी रकम है.नई शिक्षा नीति के हिसाब से सरकार क्या करेगी,उसका रोडमैप नहीं है.स्टार्टअप के लिए अगल से टीवी प्रोग्राम भले ही सराहनीय कदम है..लेकिन चैनल पर बस स्टार्टअप्स के बारे में जानकारी मिलेगी, फंडिग कौन करेगा, संसाधन कहां से आएंगे.

लघु उद्योग
लघु उद्योगों के लिए लोन प्रक्रिया को सरल करने की ज़रूरत है...लेकिन ब्याज दरों के बारे में पूर्णकालिक बजट चुप है.

एनजीओ सैक्टर
एनजीओ के लिए स्टॉक एक्सचेंज एक वेलकमिंग स्टेप है,प्रोत्साहन भरा कदम है.एनजीओ के लिए नियम कड़े होने की जरूरत है.कड़े नियम होंगे तो फायदेमंद होगा.

मीडिया में एफडीआई
मीडिया में एफीडीआई से फायदा होगा.पहले 26 प्रतिशत ओपन अप था, जो फायदेमंद नहीं रहा. अभी मीडिया में गिरावट है तो मीडिया सैक्टर में कौन निवेश करने के लिए आएगा.मीडिया में एफडीआई का निर्णय पांच साल पहले आता तो ज्यादा फायदेमंद रहता.

तीन सेक्टर पर होना था फोकस
कृषि
मैन्युफैक्चरिंग
सर्विस सेक्टर.
इन तीनों क्षेत्रों को बढ़ावा देने की ज़रूरत है.

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First published: July 5, 2019, 7:05 PM IST
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