MP में जाली सर्टिफिकेट का खेल: फुटबॉल खिलाड़ी ने कबड्डी के कोटे पर हासिल की नौकरी

खेल विभाग में घोटाला
खेल विभाग में घोटाला

नियुक्तियों में व्‍यापक पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आने के बाद अब इसकी जांच कराई जा रही है. मध्‍य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान किए गए घोटालों पर से एक के बाद एक पर्दा हट रहा है. व्यापम और ई-टेंडर के बाद अब एमपी-पीएससी में फर्जीवाड़ा सामने आया है. मप्र लोक सेवा आयोग (MPPSC) की डीएसओ भर्ती में गड़बड़ी सामने आ रही है.परीक्षा में जाली सर्टिफिकेट (Fake Certificate) के जरिए जिला खेल अधिकारियों की नियुक्ति की गई.

जाली सर्टिफिकेट का खेल
खेल विभाग में जिला खेल अधिकारी की नियुक्ति में की गई गड़बड़ि‍यां अब पकड़ में आ रही हैं. लोक सेवा आयोग की जिला खेल अधिकारी परीक्षा में जाली सर्टिफिकेट का खेल जोरों पर चला. इसके आधार पर खिलाड़ियों ने नौकरी हासिल कर ली. गड़बड़ी का आलम ये रहा कि फुटबाल खिलाड़ी ने कबड्डी के सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी हासिल कर ली. ऐसा फर्जीवाड़ा करने वाले चार डीएसओ के नाम सामने आए हैं. उनकी अब जांच की जा रही है. इनके अलावा चार और डीएसओ संदेह के घेरे में हैं. सवाल खेल विभाग के अधिकारियों पर भी खड़ा हो रहा है कि आखिर सर्टिफिकेट को बिना जांचे-परखे कैसे पास कर दिया गया.


ये हैं जांच के दायरे में


1-कमल किशोर आर्य (सीहोर)- फुटबॉल के खिलाड़ी हैं, लेकिन सर्टिफिकेट लगाया कबड्डी का और उसी आधार पर नौकरी भी पा गए. वर्ष 2011 में 32 साल की उम्र में कबड्डी का नेशनल सर्टिफिकेट लगाकर डीएसओ परीक्षा में पास हुए.
2-संतरा,हैंडबॉल खिलाड़ी
3-अरविंद सिंह राणा, बालाघाट
4-शैलेंद्र जाट

चार डीएसओ संदेह के दायरे में

इन चारों के अलावा चार और DSO जांच के दायरे में हैं. इनमें प्रो.अहमद, पवि दुबे, जितेंद्र देवड़ा और उमा पटेल के नाम शामिल हैं.

अफसरों की मिलीभगत
खेल विभाग में डीएसओ की फर्जी निुयक्तियों का मामला अब जोर पकड़ रहा है. जांच की आंच की जद में अब एमपी-पीएससी औऱ खेल विभाग के अधिकारी भी आ गए हैं. खेल मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि बड़े स्तर पर गड़ब़ड़ियां हुई हैं. जाली सर्टिफिटेक मामले पर जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. जांच रिपोर्ट के बाद जल्द से जल्द दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

खेल विभाग में बिना परीक्षा के डीएसओ बने विकास आईपीएस अधिकारी के रिश्तेदार बताए जाते हैं. वो बिना एमपीपीएससी परीक्षा पास किए ही नौकरी पा गए. वह 13 साल से भोपाल में ही पदस्थ हैं. विकास खराड़कर एमपी-पीएससी की परीक्षा पास किए बिना डीएसओ बनाए गए और फिर डेपुटेशन के आधार पर उन्हें खेल विभाग में लाया गया. खेल विभाग के तत्‍कालीन पीएस अशोक सहाय ने आपत्ति जताई थी. उन्होंने विकास की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए थे. उनकी आपत्ति के बावजूद अकेले विकास खराड़कर का नाम आगे बढ़ाया गया था.

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