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बालाघाट: मनमाना चंदा नहीं देने पर 14 आदिवासी परिवारों का हुक्का-पानी बंद

इन आदिवासी परिवारों से गांव के दबंगों ने दुर्गा उत्सव के लिए चंदा मांगा था.
इन आदिवासी परिवारों से गांव के दबंगों ने दुर्गा उत्सव के लिए चंदा मांगा था.

सामाजिक बहिष्कार (Social boycott) के कारण इन आदिवासी परिवारों को राशन-पानी नहीं मिल रहा. गांव में कोई इनसे बात तक नहीं कर रहा.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (MP) के बालाघाट जिले में मनमाना चंदा नहीं देने पर गांव के दबंगों ने 14 आदिवासी परिवारों का बहिष्कार कर उनका हुक्का पानी बंद कर दिया है. दबंगों से परेशान होकर आदिवासी परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई है. पुलिस ने इस शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से गांव प्रमुखों को समझाने की कोशिश की है.

मामला बालाघाट ज़िले के मोतेगांव का है. जब थाना प्रभारी से मामला नहीं संभला, तो पीड़ित परिवारों ने बालाघाट एसपी और एडिशनल एसपी से मदद मांगी और बात प्रदेश के गृहमंत्री तक पहुंच गयी. उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है.

थाना प्रभारी भाई नहीं करा पाए सुलह
पीड़ित परिवारों ने इस मामले की शिकायत पहले थाना लामता में की. इस शिकायत पर थाना प्रभारी ने भी उन दबंगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन गांव के दबंग नहीं माने. जब मामला सुलझा नहीं, तब पीड़ित पक्ष ने बालाघाट अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और एसपी के पास शिकायत की
चंदा नहीं देने पर बहिष्कार


पीड़ितों के अनुसार गांव में सार्वजनिक दुर्गा उत्सव के तहत प्रतिमा स्थापित की गई थी. जिसमें गांव के दबंगों ने प्रत्येक परिवार पर 201 रूपये का चंदा तय किया था. अधिकांश लोगों ने चंदा दिया. लेकिन गांव के गरीब 14 आदिवासी परिवार ये चंदा नहीं दे पाए. पीड़ितों का कहना है उन पर चंदा देने के लिए दबंगों ने दबाव बनाया. 14 परिवारों ने  151 रुपए चंदा देने की जब बात कही तो  दबंगों ने उनसे  पूरा चंदा मांगा.  कुछ दिनों तक जब पूरा चंदा नहीं दिया तो इन दबंगों ने  उनका हुक्का पानी बंद कर दिया. उन्हें परेशान किया जाने लगा. उनका गांव से बहिष्कार कर दिया.

परेशानी में हैं आदिवासी परिवार
पीड़ितों ने बताया कि 201 रूपये के लिये दबाव बनाया गया तो 39 परिवार में अधिकांश ने दे दिया सिर्फ 14 परिवार इतना पैसा नहीं दे पाए. यही कारण रहा कि गांव में दबंगों ने 14 परिवारों का  सार्वजनिक तौर पर बहिष्कार कर दिया. बहिष्कार के बाद इन परिवारों को किराना दुकान से सामान नहीं मिल रहा. चरवाहे उनके मवेशी चराने नहीं ले जा रहे.डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे. गांव में कोई उनसे बात नहीं कर रहा. उन्होंने कहा हम सभी लोग गांव वालों के साथ मिलजुलकर रहना चाहते हैं. लेकिन उन्हें रहने नहीं दिया जा रहा है.



पुलिस ने अभी तक नहीं लिया सख्त एक्शन
इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौतम सोलंकी ने बताया कि प्रकरण की जांच के लिये परसवाड़ा एसडीओपी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है. जांच में जो भी स्थिति सामने आएगी कार्रवाई की जाएगी.रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का कहना है यदि इस तरीके का मामला सामने आया है और पुलिस में शिकायत हुई है तो तत्काल अड़ीबाजी समेत दूसरी धाराओं में एफ आई आर दर्ज करनी चाहिए.
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