रक्षाबंधन से पहले बहन ने भाई को दिया जीवनदान, लिवर डोनेट कर बचाई जान

भोपाल की रहने वाली जाह्नवी ने अपना लिवर डोनेट कर अपने भाई की जान बचाकर उसे नया जीवनदान दिया है. आने वाला राखी का त्योहार इनके लिए बेहद खास रहने वाला है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: July 21, 2019, 11:49 PM IST
रक्षाबंधन से पहले बहन ने भाई को दिया जीवनदान, लिवर डोनेट कर बचाई जान
रक्षाबंधन से पहले बहन ने भाई को दिया नया जीवनदान, लिवर डोनेट कर बचाई जान (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: July 21, 2019, 11:49 PM IST
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाली एक बहन ने अपना लिवर डोनेट कर अपने भाई की जान बचाकर उसे नया जीवनदान दिया है. इस तरह जाह्नवी ने एक बहन होने का फर्ज बखूबी निभाया है. मालूम हो कि रक्षाबंधन आगामी 15 अगस्त को है. उससे ठीक एक माह पहले जाह्नवी ने अपने भाई को जिंदगी का तोहफा देकर आने वाली इस राखी को और भी खास बना दिया है.

परिवार वाले समझ रहे थे मामूली बुखार, फिर जांच में निकली ये बीमारी
आपको बता दें कि आकृति इको सिटी भोपाल की रहने वाली 41 वर्षीय जाह्नवी दुबे कंसल्टिंग कंपनी केपीएमजी में काम करती हैं. उनका मायका जबलपुर में है. उनके 26 वर्षीय भाई जयेंद्र पाठक को करीब 10 दिन से तेज बुखार था. परिवार के लोग इस बुखार को मामूली वायरल समझ रहे थे. वहीं डॉक्टर भी बीमारी को ठीक से पकड़ नहीं पा रहे थे. इस तरह मर्ज बढ़ता गया और जयेंद्र को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

90 फीसदी तक खराब हो चुका था जयेंद्र का लिवर

तब जांच में डॉक्टरों ने बताया कि जयेंद्र का लिवर 90 फीसदी तक खराब हो चुका है, जिससे उसके बचने की संभावना नहीं है. इस बात को सुन परिवार वाले सन्न रह गए. वहीं जब यह बात भोपाल में रह रही जाह्नवी और उनके पति प्रवीण दुबे को पता चली तो वे घबरा गए.

लिवर ट्रांसप्लांट-liver transplant
बहन ने अपना लिवर देकर भाई की जान बचा ली


डॉक्टर की सलाह पर दिल्ली ले जाकर कराया लिवर ट्रांसप्लांट
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इसके बाद वे भागे-भागे जबलपुर पहुंचे, जहां डॉक्टरों से बात की तो पता चला कि उनके के बचने की संभावना सिर्फ 10 फीसदी है. इसके बाद जाह्नवी उस 10 फीसदी 100 प्रतिशत बनाने में जुट गई. उन्होंने डॉक्टरों से पूछा कि "इस 10 फीसदी में हम क्या कर सकते हैं ? डॉक्टर ने बोला कि मरीज को तत्काल दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल ले जाएं और जितनी जल्दी हो सके लिवर ट्रांसप्लांट करा लें, तभी जान बच सकती है."

"मैंने उसे अपने गोद में खिलाया है, मुझसे 15 साल छोटा है, किसी कीमत पर उसे जाने नहीं दूंगी"
जाह्नवी के पति प्रवीण ने बताया कि बीते 14 जुलाई को वो, जाह्नवी और उनका 14 साल का बेटा प्राचीश जबलपुर के लिए रवाना हुए. जाह्नवी पूरे रास्ते एक ही बात कह रही थी- "मैंने अपने भाई को गोद में खिलाया है, वो मुझसे 15 साल छोटा है उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूंगी. मैं उसे लिवर दूंगी." प्रवीण ने कहा कि जबलपुर पहुंचने के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे उनकी पत्नी जाह्नवी एयर एंबुलेंस से दिल्ली के लिए अपने भाई के साथ ही रवाना हो गई. प्रवीण ने बताया कि 15 जुलाई को सुबह जाह्नवी और उनके भाई का ऑपरेशन होना था. जबलपुर से कोई फ्लाइट नहीं थी, इसलिए वो और उनका 14 साल का बेट ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए.

डॉक्टर ने कहा- 'सर्जरी में 13 तरह के खतरनाक रिस्क हैं', प्रवीण बोले- 'ईश्वर पर पूरा विश्वास'
प्रवीण ने कहा कि डॉक्टरों को जाह्नवी के ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले उनकी सहमति चाहिए थी. अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों ने उन्हें फोन पर बताया कि इस ऑपरेशन में उनकी पत्नी की जान भी जा सकती है. क्या आप इसके लिए तैयार हैं. इस पर प्रवीण ने कहा कि "हां तैयार हूं." फिर डॉक्टरों ने कहा कि इस सर्जरी में 13 तरह के खतरनाक रिस्क हैं, लेकिन उन्होंने ईश्वर पर पूरा विश्वास जताते हुए ऑपरेशन के लिए हामी भर दी. इस तरह वे 13 घंटे अस्पताल के लॉबी में ही बैठे रहे. बता दें कि सोमवार रात करीब 9:30 बजे उनका ऑपरेशन खत्म हुआ.

बेटे को पेपर दिलाकर फिर लौटे दिल्ली
वहीं मंगलवार को मां से मिल पाया. गुरुवार को प्राचीश का पेपर था इसलिए बुधवार की फ्लाइट से वे बेटे के साथ भोपाल आ गए. वहीं परीक्षा खत्म होने के बाद वे फिर शनिवार को दिल्ली रवाना हो गए.

प्रवीण ने बताया कि ऑपरेशन के बाद जयेंद्र को होश आ गया है. परिजनों से बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें खास और अच्छी बात यह है कि जाह्नवी का लिवर जयेंद्र के शरीर में काम करने लगा है. अब वो पूरी तरह खतरे से बाहर आ चुका है. वहीं जाह्नवी को अभी 15 दिन तक अस्पताल में ही रहना होगा. इसके बाद भी उसे लंबे समय तक डॉक्टरों से जांच कराते रहने पड़ेगा.

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First published: July 21, 2019, 9:33 AM IST
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