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शिखर का पत्‍थर नहीं, नींव का पत्‍थर बनने की जरूरतः भैयाजी जोशी
Bhopal News in Hindi

Manoj Rathore | News18Hindi
Updated: January 30, 2020, 11:23 PM IST
शिखर का पत्‍थर नहीं, नींव का पत्‍थर बनने की जरूरतः भैयाजी जोशी
जोशी ने स्वर्गीय अपारबल सिंह के कामों को एक मिसाल बताया और उन कामों से प्रेरणा लेने की बात कही. (फाइल फोटो)

भोपाल पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह ने नेताओं को दी नसीहत, कहा- पूर्ण समर्पण ही संघ है.

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  • Last Updated: January 30, 2020, 11:23 PM IST
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भोपाल. राजधानी में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय अपारबल सिंह ठाकुर साहब को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार्यवाह भैयाजी जोशी पहुंचे. कार्यक्रम में बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे. अपने संबोधन के दौरान जोशी ने बीजेपी के नेताओं को नसीहत दे डाली. उन्होंने कहा- आज हर कोई शिखर का पत्थर बनना चाहता है लेकिन सबसे पहले हर व्यक्ति को समर्पित नींव का पत्थर बनना चाहिए, पूर्ण समर्पण ही संघ है.

उनके काम मिसाल
जोशी ने स्वर्गीय अपारबल सिंह के कामों को एक मिसाल बताया और उन कामों से प्रेरणा लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि तन मन से कार्य करने वाला ही हमेशा एक सफल प्रचारक बनते हैं. संघ में प्रचारक बनना इतना आसान काम नहीं है. व्यक्ति का पूर्ण समर्पण ही संघ है.

संघ समाप्त हो जाता

भैयाजी जोशी ने संघ के समाप्त होने की संभावनाओं को भी बंया किया. उन्होंने श्रद्धांजलि सभा में मौजूद बीजेपी नेताओं, कार्यकर्ताओं और संघ पदाधिकारियों से कहा कि 60 के दशक में धैर्य रखकर चलने वालों का परिणाम आज दिखाई दे रहा है. प्रतिबंध हटने के बाद संघ को धैर्यपूर्वक आगे ले जाने का काम किया गया. ऐसा नहीं होता, तो संघ के समाप्त होने की संभावना थी. उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ी को हमेशा मार्गदर्शन लेना चाहिए. अपारबल जी का जाना संघ की संपदा में एक चीज के जाने जैसा है.

कौन हैं अपार बल सिंह ठाकुर साहब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक अपारबल सिंह ‘ठाकुर साहब’ का निधन हो गया है. उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव लहरौली जिला भिण्ड में किया गया. अपारबल सिंह 1965 में प्रचारक बने, 1986 में संघ के इंदौर प्रांत कार्यालय प्रमुख बनाए गए. 1993 से वे समिधा के कार्यालय प्रमुख थे. अपारबल सिंह विद्यार्थी जीवन में स्वयंसेवक के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और निरंतर समाज निर्माण के कार्य में सक्रिय रहे. भिंड में जिला और विभाग प्रचारक का दायित्व संभालने के बाद इंदौर चले गए. 1993 में अपारबल सिंह क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख के दायित्व के साथ भोपाल आए और लगभग 27 सालों तक भोपाल में सक्रिय रहे. आपातकाल के समय उन्होंने सत्ता के खिलाफ आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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First published: January 30, 2020, 11:23 PM IST
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