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MP में किसान आंदोलन की आहट, कमलनाथ सरकार के लिए बन सकती है 'मुसीबत'

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 13, 2019, 4:11 PM IST
MP में किसान आंदोलन की आहट, कमलनाथ सरकार के लिए बन सकती है 'मुसीबत'
भारतीय किसान संघ का आंदोलन सरकार के लिए बन सकता है चुनौती.

भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) ने किसानों की मांगों को लेकर कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. यूनियन 15 अक्टूबर को राजधानी भोपाल (Bhopal) में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी. यकीनन यह सरकार के लिए मुश्किल चुनौती साबित होगी.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसान आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है. भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) ने किसानों की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. किसान संघ का आरोप है कि कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) किसानों की सुध नहीं ले रही है, लिहाजा आने वाली 15 अक्टूबर को राजधानी भोपाल (Bhopal) में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा. प्रदेश भर के किसान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को मुख्‍यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा. भारतीय किसान संघ ने ऐलान किया है कि अगर किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में किसान और उग्र आंदोलन करेंगे. भारतीय किसान संघ ने प्रमुख तौर पर दो मांगें सरकार के सामने रखी हैं.

ये हैं प्रमुख मांगें
>>अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई के तहत सभी किसानों को राहत राशि दी जाए.
>>किसानों की माली हालत को देखते हुए सरकार द्वारा घोषित दो लाख रुपए तक का कर्ज तुरंत माफ किया जाए.

कमलनाथ पर सख्त, लेकिन...
भारतीय किसान संघ को संघ और बीजेपी समर्थित किसान संगठन माना जाता है. ऐसे में मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन को लेकर अब सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि आखिर केंद्र को लेकर किसान संघ सख्त क्यों नहीं है? वो भी तब जब मध्य प्रदेश सरकार लगातार ये कह रही है कि बाढ़ आपदा के बावजूद केंद्र सरकार मध्य प्रदेश के लिए राहत राशि जारी नहीं कर रही है. सीएम कमलनाथ ने इस सिलसिले में बीते दिनों पीएम मोदी से भी मुलाकात की थी.

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भारतीय किसान यूनियन को संघ और बीजेपी समर्थित किसान संगठन माना जाता है.

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किसानों का कितना नुकसान ?
राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के 52 में से 39 जिलों में अतिवृष्टि और बाढ़ से बहुत अधिक नुकसान हुआ है. सूबे में जून से सितंबर महीने के बीच हुई वर्षा से लगभग 60 लाख 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की 16 हजार 270 करोड़ रुपये की फसल प्रभावित हुई है, इसमें लगभग 53 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत तक फसल क्षतिग्रस्त हुई है. राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश में अति-वृष्टि से सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की राशि 2285 करोड़ रुपये आंकी गई है. जबकि फसलों के कुल नुकसान का अनुमान लगभग 16 हजार 270 करोड़ रुपये है.

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First published: October 13, 2019, 3:47 PM IST
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