Assembly Banner 2021

मध्य प्रदेश में विकास की योजनाएं बनीं, मगर 15000 करोड़ खर्च नहीं कर पाई सरकार, अब लैप्स होने का खतरा

जिन विभागों में लैप्स हो रही है उसमें खुद वित्त विभाग भी शामिल है.

जिन विभागों में लैप्स हो रही है उसमें खुद वित्त विभाग भी शामिल है.

MP News: प्रदेश सरकार पर 30 मार्च की स्थिति में ₹2 लाख 9000 का कर्ज है, लेकिन विकास योजनाओं का पैसा भी खर्च नहीं कर पाने को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. बजट लैप्स होने से सरकार की चिंता बढ़ी हुई है.

  • Share this:
भोपाल. वित्तीय वर्ष खत्म होने को है. बही-खातों का हिसाब दुरुस्त किया जा रहा है. मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों ने आखिरकार अपने विभाग के बजट का कितना इस्तेमाल किया इसका लेखा-जोखा भी सामने आ रहा है. चौंकाने वाली बात यह है लगभग सभी विभागों ने अपना पूरा पैसा खर्च ही नहीं किया है. प्रदेश में विकास की योजनाओं का ऐलान तो खूब किया गया, लेकिन सरकार 15000 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं कर पाई.

अब जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में अभी दो दिन बाकी हैं, अनुमान के मुताबिक विभागों का करीब 15000 करोड़ रुपए से ज्यादा लेफ्ट यानी बचे रह जाने के कगार पर है. यानी वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकारी विभाग यह पैसा खर्च ही नहीं कर पाए. हालांकि वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि जो तीसरे क्वार्टर में राशि खर्च नहीं कर पाए हैं, उसे अंतिम क्वार्टर में खर्च करने की अनुमति दी जा रही है. विभागों को मिली यह वह राशि है जो उन्हें विकास के काम में खर्च करनी थी.

किस विभाग में कितना बजट लैप्स
आंकड़ों पर अगर नज़र डालें तो सबसे ज्यादा राशि जिन विभागों में लैप्स हो रही है उसमें खुद वित्त विभाग भी शामिल है. इसके साथ स्कूल और कृषि जैसे विभाग शामिल हैं जो सरकार की प्राथमिकता में रहते हैं. पंचायत 250 करोड़, सामान्य प्रशासन विभाग के 60 करोड़, गृह विभाग 550 करोड़, जेल 40 करोड़, वित्त 1811 करोड़, ऊर्जा 400 करोड़, कृषि 1 हज़ार करोड़, पशुपालन 81 करोड़, पीएचई 50 करोड़, जल संसाधन 450 करोड़, नगरीय विकास 200 करोड़,  PWD 650 करोड़,  स्कूल शिक्षा 1700 करोड़ शामिल हैं.



क्यों नहीं हुआ बजट खर्च ?
बजट लैप्स होने के सवाल पर अब कई बातें सामने आ रही हैं. इनमें प्रमुख वजह देखें तो नये निर्माण कार्य थे वो शुरू नहीं हो पाए. जल संसाधन विभाग में नयी योजना के लिए राशि मंजूर नहीं हो पाई. नये भवनों के निर्माण के लिए भी राशि स्वीकृत नहीं हो पाई. सरकार ने विभागों से योजना व्यय के तहत आवंटित बजट को खर्च करने का निर्देश दिया है. प्रदेश सरकार पर 30 मार्च की स्थिति में ₹2 लाख 9000 का कर्ज है.  बजट लैप्स होने से सरकार की चिंता बढ़ी हुई है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज