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भ्रष्टाचार का अड्डा AIIMS: यहां कोई काम बिना पैसे के नहीं होता ? जानिए कहां पहुंचे CBI के हाथ

भोपाल एम्स पर सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है. यहां जमकर भ्रष्टाचार होने की खबर है. (फाइल फोटो)

भोपाल एम्स पर सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है. यहां जमकर भ्रष्टाचार होने की खबर है. (फाइल फोटो)

Madhya Pradesh: भोपाल एम्स के बड़े कारनामे सामने आ रहे हैं. यह अब रिश्वतखोरी का गढ़ बन गया है. सीबीआई को पता चला है कि यहां कोई भी काम बिना रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के नहीं होता. CBI कोरोना काल में हुई खरीद की भी जांच कर रही है. यहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल का एम्स (AIIMS) अब रिश्वतखोरी का गढ़ बन गया है. आरोप है कि यहां कोई भी काम बिना रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के नहीं होता. डिप्टी डायरेक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह के रिश्वतखोरी कांड के बाद अब CBI कोरोना काल में हुई खरीदी की भी जांच कर रही है. यहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका है.

CBI ने शनिवार को शाहपुरा थाने के सामने एम्स के डिप्टी डायरेक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह गिरफ्तार किया था. वे मेडिकल संबंधित बिल पास करने के एवज में एक लाख की रिश्वत ले रहे थे. सूत्रों के अनुसार सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि धीरेंद्र ने एम्स में हुई खरीद में जमकर भ्रष्टाचार किया है. आरोपी डायरेक्टर अप्रूव्ड बिलों को भी रिश्वत के लिए रोक लेता था. बिना रिश्वत के बिल पास नहीं करता था.

WhatsApp व्हाट्सएप कॉल पर बात करता था

डिप्टी डायरेक्टर धीरेंद्र आवाज रिकॉर्ड न हो इसलिए WhatsApp व्हाट्सएप कॉल पर बात करता था. इसी के जरिए रिश्वत भी मांगता था. CBI की सर्चिंग में डिप्टी डायरेक्टर के शाहपुरा स्थित घर से 7 लाख नगद, 80 लाख की म्युचुअल फंड में निवेश समेत 3 मकान, 2 फ्लेैट, कई प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. रिश्वतखोरी के अलावा एम्स के लिए खरीदे जाने वाले सामान में बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार का शक है. इस मामले में आय से अधिक संपत्ति को लेकर भी सीबीआई जांच कर रही है. जानकारी के अनुसार सीबीआई को मेडिकल सामग्री सप्लाई करने वाले एक कॉन्ट्रेक्टर ने शिकायत की थी कि उसका चालीस लाख रुपये का बिल पास करने की एवज में एम्स प्रशानिक विभाग के डिप्टी डायरेक्टर धीरेन्द्र प्रताप सिंह पांच लाख रुपये मांग रहा है. प्राथमिक तौर पर सीबीआई की जांच में शिकायत सही पाई गई और इसके बाद सीबीआई ने प्लानिंग और घेराबंदी का आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.

एम्स नहीं छोड़ना चाहता था आरोपी

आरोपी धीरेंद्र एम्स की नौकरी छोड़कर नहीं जाना चाहता था. इसके लिए उसने अपना डेप्युटेशन का समय भी बढ़वा लिया था. वह एम्प्री और आईआईएफएम में पोस्टेड रह चुका है. 12 साल से प्रतिनियुक्ति पर नौकरी कर रहा है. पिछले साल ग्वालियर से धीरेंद्र को प्रतिनियुक्ति पर एम्स भेजा गया. अक्टूबर में कार्यकाल खत्म होने पर उसने IITM (भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान)से अपना कार्यकाल बढ़ाया लिया था. अब एम्स की गवर्निंग बॉडी धीरेंद्र प्रताप सिंह के निलंबन को लेकर जल्द फैसला लेगी.

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