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कांग्रेस का आरोप : निजी क्षेत्र की बिजली खरीदने के लिए सिंगाजी पावर प्लांट में ठप्प किया गया

bhopal. कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग की है.

bhopal. कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग की है.

Bhopal : जीतू पटवारी का आरोप है कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान 3 महीने अप्रैल 2020 से जून 2020 तक इकाई में उत्पादन बंद रखा गया.इससे प्रदेश को हर महीने मिलने वाली 1320 मेगावाट की बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी.

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भोपाल.सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट को बंद कर निजी क्षेत्र से बिजली खरीदने का मामला तूल पकड़ रहा है.कांग्रेस ने  आरोप लगाया है कि साज़िशन उस प्लांट की दो इकाई बंद कर निजी क्षेत्र से महंगी दर पर बिजली खरीदी गयी.कांग्रेस विधायक (Congress MLA) जीतू पटवारी (Jeetu Patwari) ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है और नियम 52 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की है.

जीतू पटवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि निजी बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सिंगाजी पावर प्लांट की इकाई बंद की गयी.और महंगी दर पर बिजली खरीद कर भारी भ्रष्टाचार किया गया.जीतू पटवारी ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की है. उनकी इस मांग का कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी और विशाल जगदीश पटेल ने समर्थन किया है.

टरबाइन टूटी या साज़िश!
जीतू पटवारी ने पत्र में लिखा है कि सिंगाजी ताप परियोजना की इकाई 3 और 4 की टरबाइन टूटने का हवाला दिया गया और उसके बाद उत्पादन बंद कर दिया गया.ये इकाई जो 6600 करोड़ रुपये में बनायी गयी थीं.पटवारी का आरोप है कि ये उत्पादन ठप करने की साजिश थी. कांग्रेस विधायक ने निजी क्षेत्र से बिजली खरीदी में 100 से 200 करोड़ रुपए के लेनदेन का आरोप लगाया है. कांग्रेस विधायक ने इस बात का भी आरोप लगाया है कि पावर प्लांट की इकाई में उत्पादन को बंद कर निजी क्षेत्र से ₹14 प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदी गई है.इसका बोझ आम जनता की जेब पर पड़ा है.
सरकार से मांगा जवाब


जीतू पटवारी ने ये भी आरोप लगाया कि बिजली के क्षेत्र में अधिकारियों और निजी कंपनियों की मिलीभगत के कारण बड़ा घोटाला हुआ है.उन्होंने इस पर सरकार से जवाब मांगा है कि सिंगाजी पावर प्लांट के लिए सरकार की कार्य योजना क्या है. विधानसभा में इस संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब को कांग्रेस विधायक ने अधूरा बताया.इस बात की शिकायत भी विधानसभा अध्यक्ष से की है कि पूरे मामले में तथ्यों को छुपाया गया है.

3 महिने उत्पादन ठप्प
लॉकडाउन के नाम पर 3 महीने अप्रैल 2020 से जून 2020 तक इकाई में उत्पादन को बंद रखा गया जिससे प्रदेश को हर महीने मिलने वाली 1320 मेगावाट की बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी. इसके एवज में सरकार ने निजी क्षेत्र से महंगी दर पर बिजली खरीदी.इस पूरे मामले में विधानसभा में चर्चा की अनुमति होना चाहिए.
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