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भोपाल में स्पेशल-20 ठग गिरोह का पर्दाफाश, फिल्मों की तर्ज पर वारदात देते थे अंजाम

भोपाल में क्राइम ब्रांच ने स्पेशल-20 ठग गिरोह के दो आरोपियों रमेश प्रजापति और सलीम को गिरफ्तार किया है.
भोपाल में क्राइम ब्रांच ने स्पेशल-20 ठग गिरोह के दो आरोपियों रमेश प्रजापति और सलीम को गिरफ्तार किया है.

भोपाल (Bhopal) में फिल्म की तर्ज पर स्पेशल-20 बन कारोबारियों को ठगने वाले गिरोह (Special-20 gang) का पर्दाफाश, यूपी के बाद भोपाल में 25 अस्पताल संचालकों को लूटने की फिराक में थे आरोपी. भोपाल क्राइम ब्रांच (Bhopal Crime Branch) ने डॉक्टर की शिकायत के बाद लुटेरों को दबोचा.

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भोपाल. बॉलीवुड की हिट फिल्म 'स्पेशल-26' की तर्ज पर ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले स्पेशल-20 गिरोह (Special-20 gang) का भोपाल क्राइम ब्रांच (Bhopal Crime Branch) ने पर्दाफाश किया है. गिरोह ने यूपी के बाद भोपाल (Bhopal) में डेरा डाल लिया था. गिरोह ने एक प्राइवेट अस्पताल के संचालक से दो लाख रुपए की ठगी भी कर ली थी. आरोपियों के निशाने पर भोपाल के दूसरे बड़े कारोबारी थे. लेकिन उससे पहले ही अस्पताल संचालक की शिकायत पर गिरोह का पर्दाफाश हो गया. क्राइम ब्रांच ने प्राइवेट अस्पताल के संचालक डॉ. अल्ताफ मसूद की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की. पुलिस ने तकनीकी सबूतों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनकी पहचान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) निवासी रमेश प्रजापति और सलीम के रूप में की गई है.

बच्चों के इलाज के नाम पर धोखाधड़ी
डॉ. मसूद ने क्राइम ब्रांच में की गई शिकायत में बताया कि उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया था. फोन करने वाले ने खुद को बीएसएनएल का जीएम एके पांडे बताया था. डॉ. मसूद ने बताया कि कथित जीएम ने उनसे कहा कि बीएसएनएल के कर्मचारियों के बच्चों का इलाज कराने के लिए आपके अस्पताल को चुना गया है. इसके बाद आरोपी का एक साथी डॉ. मसूद को कुछ दस्तावेज भी देकर गया. साथ ही उनसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 2 लाख रुपए भी ले लिए. डॉ. मसूद के मुताबिक इसके बाद आरोपी ने मोबाइल फोन बंद कर लिया. दस्तावेज की जांच हुए तो वह फर्जी निकले. इसके बाद डॉ. मसूद ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की.

यूपी के बाद भोपाल में ठगी का था प्लान
क्राइम ब्रांच की पूछताछ में खुलासा हुआ कि रमेश अपने गांव में स्कूल चलाता है. 2017 में उसने 20 लोगों की फर्जी टीम बनाकर खलीलाबाद की ज्वेलरी शॉप पर खुद को लखनऊ इनकम टैक्स का अधिकारी बताकर छापेमारी की थी. फर्जी छापेमारी के जरिए आरोपी दुकान से 23 किलो सोना लेकर चलते बने. इस वारदात से यूपी में सनसनी फैल गई और पुलिस ने आरोपियों को धर दबोचा. क्राइम ब्रांच के मुताबिक गिरोह का भांडा फूटने के बाद रमेश प्रजापति समेत अन्य आरोपियों ने ठिकाना बदल लिया. वे मध्य प्रदेश आ गए. गिरोह भोपाल में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का प्लान बना रहा था.



भोपाल के 25 अस्पताल टारगेट पर
आरोपी रमेश प्रजापति ने पूछताछ में कबूल किया कि भोपाल में ठगी के लिए उसके गिरोह ने प्लान तैयार किया था. इसके लिए वह और उसका साथी सलीम फर्जी पहचान पत्र के जरिए होटल में रुका हुआ था. पूछताछ में उसने कबूल किया कि भोपाल के 25 अस्पताल उसके निशाने पर थे, जिनकी रेकी के लिए उसने किराए पर एक कार भी ली थी. पुलिस के मुताबिक रमेश प्रजापति अच्छी अंग्रेजी बोलता है, इसलिए पहली नजर में किसी को उस पर शक नहीं होता. क्राइम ब्रांच की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह वारदात के लिए यूपी से अपने और साथियों को बुलाने वाला था, लेकिन इससे पहले ही पकड़ा गया.

 

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