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MP में अपराधियों से पिछड़ गयी साइबर पुलिस, सिर्फ 24 एक्सपर्ट के भरोसे हैं सैकड़ों केस

MP में अपराधियों से पिछड़ गयी साइबर पुलिस, सिर्फ 24 एक्सपर्ट के भरोसे हैं सैकड़ों केस

भोपाल में सबसे ज्यादा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं

भोपाल में सबसे ज्यादा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं

Bhopal. 1 अप्रैल 2018 से 9 अगस्त 2021 तक भोपाल में साइबर अपराध के 453 केस दर्ज हुए. इंदौर में इस दौरान भोपाल से करीब 100 मामले कम दर्ज हुए. उज्जैन में 213 मामले दर्ज किए गए.

भोपाल. मध्यप्रदेश में साइबर पुलिस (Cyber police) फेल साबित होती दिख रही है. क्योंकि हर बार अपराधी उससे आगे निकल जाते हैं. ये सच आंकड़े बयां कर रहे हैं. 3 साल में प्रदेश में तेजी से साइबर क्राइम बढ़े हैं. सिर्फ 24 एक्सपर्ट के भरोसे हजारों मामलों की जांच चल रही है.

एमपी में साइबर पुलिस से आगे साइबर अपराधी इसलिए निकल जाते हैं, क्योंकि हजारों साइबर अपराधियों से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में एक्सपर्ट नहीं हैं. एक्सपर्ट न होने से साइबर अपराधों की जांच में लेटलतीफी होती है. जब तक अपराधियों का सुराग लगता है, तब तक पुलिस काफी पीछे छूट जाती है.

24 के सहारे जांच
समय पर जांच नहीं होने से आरोपी भी नहीं पकड़े जाते हैं. पूरे प्रदेश में मात्र 24 साइबर एक्सपर्ट राष्ट्रीय स्तर के हैं. ऐसे में साइबर पुलिस अपनी जांच के लिए प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट का सहारा ले रही है. कांग्रेस बढ़ते साइबर अपराध को लेकर सरकार को घेर रही है.

एमपी में साइबर अपराध का बढ़ता ग्राफ
-मध्यप्रदेश में पिछले 3 साल से साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं. प्रदेश के 3 संभागों इंदौर, भोपाल और उज्जैन में ही 1 हजार से ज्यादा अपराध दर्ज किए जा चुके हैं.

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-इस मामले में भोपाल ने इंदौर को  पीछे छोड़ दिया है. 1 अप्रैल 2018 से 9 अगस्त 2021 तक भोपाल में साइबर अपराध के 453 केस दर्ज हुए. इंदौर में इस दौरान भोपाल से करीब 100 मामले कम दर्ज हुए. उज्जैन में 213 मामले दर्ज किए गए.

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से धोखाधड़ी
भोपाल में सबसे ज्यादा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं.1 अप्रैल 2018 से लेकर 9 अगस्त 2021 तक भोपाल में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से धोखाधड़ी के 290 अपराध मामले दर्ज किए गए, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन को मिलाकर साइबर फ्रॉड के केस 447 हैं. मध्यप्रदेश में ऑनलाइन धोखाधड़ी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण झारखंड के जामताड़ा जैसे गिरोहों का सक्रिय होना है.

साइबर अपराधों से ऐसे बचें
-ऑनलाइन धोखाधड़ी होने, सोशल मीडिया पर किसी तरह की ब्लैक मेलिंग जैसे अपराध होने पर तत्काल इसकी सूचना साइबर सेल को दें.

-किसी भी हालत में किसी को अपना एटीएम कार्ड या अन्य तरह की पर्सनल जानकारी न दें.

-फोन पर आया OTP किसी को भी न बताएं.

-बैंक किसी भी तरह की जानकारी फोन पर नहीं लेता है, इसलिए बैंक के नाम पर आए किसी भी कॉल को बैंक संबंधी कोई भी जानकारी न दें.

-सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी और फोटो आदि शेयर न करें.

-फोन पर लॉटरी, मोबाइल टावर लगवाने, KYC अपडेट, बैंक खाता और ATM ब्लॉक आदि की बात करने वाले को किसी तरह की जानकारी न दें.
-लॉटरी आदि के लालच में न आएं।

-परिचित बनकर फोन करने वाले द्वारा वॉट्सऐप या फोन पर भेजे गए किसी भी URL कोड को स्कैन न करें.

-अपने फोन, ATM या क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड किसी को न बताएं

सब रहें सतर्क
साइबर अपराध महिलाओं, पुरुषों के साथ अब बच्चों के साथ भी हो रहे हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा जागरुकता की जरूरत है और ऐसे अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस को हाईटेक करने की जरूरत भी है.

Tags: Cyber Crime News, Cyber Fraud, Cyber police, Madhya pradesh Police

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