अपना शहर चुनें

States

EXCLUSIVE प्यारे मियां केस: हाथरस जैसी अमानवीयता, नाबालिग की मौत के बाद पिता के पुलिस पर गंभीर आरोप

परिजनों को बिना बताए पुलिस करना चाह रही थी नाबालिग का अंतिम संस्कार.
परिजनों को बिना बताए पुलिस करना चाह रही थी नाबालिग का अंतिम संस्कार.

बच्ची के गुरुवार को हुए अंतिम संस्कार के बाद हमारे चैनल ने उसके पिता से एक्सक्लूसिव बातचीत की. पिता ने चैनल से कई बड़े खुलासे किए. उन्होंने आरोप लगाया - हमने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बेटी के शव को घर ले जाने के लिए बार-बार मिन्नतें कीं, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी.

  • Last Updated: January 22, 2021, 11:19 AM IST
  • Share this:
भोपाल. प्रदेश के बहुचर्चित प्यारे मियां यौन शोषण मामले में विवाद थमते नजर नहीं आ रहे. एक तरफ नाबालिग बच्ची का नींद की गोलियां खाना, दूसरी तरफ परिजनों का बच्ची को जहर देने का आरोप और फिर अब पिता द्वारा पुलिस पर लगाए नए गंभीर आरोप. मामला उत्तरप्रदेश के हाथरस कांड जैसा दिखाई दे रहा है, जिसमें अमानवीयता की हदें लांघी गई थीं. गौरतलब है कि मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि नाबालिग बच्ची की मौत नींद की गोलियां खाने से हुई है.

बच्ची के गुरुवार को हुए अंतिम संस्कार के बाद हमारे चैनल ने उसके पिता से एक्सक्लूसिव बातचीत की. पिता ने चैनल से कई बड़े खुलासे किए. उन्होंने आरोप लगाया - हमने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बेटी के शव को घर ले जाने के लिए बार-बार मिन्नतें कीं, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी. अधिकारी बार-बार कहते रहे कि ये मामला दो समुदायों के बीच का है, इसलिए विवाद बढ़ सकता है. मैं इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा की मांग करता हूं. हमें पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है.

पत्नी करती रही इंतजार, पुलिस ने तैयार की अर्थी



बच्ची के पिता ने बताया कि पत्नी और रिश्तेदार घर पर बेटी को आखिरीबार देखने के लिए इंतजार करते रहे. लेकिन, पुलिस बच्ची के शव को सीधे भदभदा श्मशान ले गई. जबकि, हमने घर पर अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली थी. पुलिस मेरी पत्नी और मोहल्ले की कुछ महिलाओं को बस में लेकर श्मशान घाट आई. उन्होंने कहा कि पुलिस ने श्मशान घाट पर पूरी व्यवस्था कर रखी थी और अर्थी भी उन्होंने ही बनाई थी, क्योंकि पुलिस को बड़ी जल्दी थी अंतिम संस्कार की. पिता ने बताया कि डॉक्टर और पुलिस का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं था.
पिता ने कहा- बच्ची कुछ बताना चाहती थी

मृतक बच्ची के पिता ने कहा कि बालिका गृह में बेटी हमें कुछ बताना चाहती थी, लेकिन वहां का स्टाफ बच्ची को जोर से बोलने से मना करता था. जिस दिन बच्ची ने नींद की गोलियां खाईं उस दिन उसकी पेशी थी.

मां ने कहा- बेटी को जबरदस्ती दी गोलियां, सीबीआई जांच करे

मां ने जब बेटी का शव को देखा तो वह स्तब्ध रह गईं. उनकी आंखें खुली थीं और जुबां थमी हुई थी. दरअसल, बुधवार को बेटी की मौत की खबर मां को इसलिए नहीं दी गई थी कि कहीं उन्हें सदमा न लग जाए. मां ने महिला थाना प्रभारी अजिता नायर, बाल कल्याण समिति के कृपा शंकर चौबे और बालिका गृह की अधीक्षिका अंतोनिया पर बेटी को जबरन गोलियां खिलाने का आरोप लगाया. उन्होंने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की.

ये है मामला

बुधवार को नाबालिग की मौत के बाद गुरुवार को पुलिस की निगरानी में दोपहर करीब 1.30 बजे पुलिस की निगरानी में उसका भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. इस केस में गौर करने वाली ये है कि नाबालिग इस केस की न तो आरोपी थी और न ही अपराधी. वह केवल फरियादी थी. पुलिस नाबालिग के शव को हमीदिया अस्पताल से सीधे श्मशान ले गई, जबकि मर्चुरी में पीड़िता के चाचा और पिता ने शव घर ले जाने की जिद की. इस बीच बैरागढ़ एसडीएम मनोज उपाध्याय ने हमीदिया पहुंचकर परिजों को दो लाख रुपए का चेक दिया. इसके बाद हबीबगंज सीएसपी भूपेंद्र सिंह ने पिता और चाचा को शव वाहन में बैठाकर विश्राम घाट रवाना कर दिया.

बच्ची ने खा ली थीं नींद की गोलियां- पुलिस
प्यारे मियां यौन शोषण मामले में मृतक नाबालिग बच्ची बालिका गृह में रह रही थी. पुलिस के मुताबिक, उसने कुछ दिनों पहले नींद की गोलियां खा ली थीं. इसके बाद उसे संदिग्ध परिस्थितियों में हमीदिया अस्पताल में भर्ती किया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया.  मामले को लेकर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने न्यायायिक जांच के आदेश दे दिए थे. पूरे मामले में कमला नगर थाना पुलिस ने मंगलवार को जांच शुरू कर दी थी. जांच के बाद बालिका गृह संरक्षण की अधीक्षिका एंटोनिया कुजूर इक्का को हटा दिया गया और नई अधीक्षिका योगिता मुकाती को नियुक्त किया गया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज