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बदले बदले से नजर आ रहे हैं कमलनाथ : नये साल में बदल रहे हैं अपनी छवि

पूर्व सीएम कमलनाथ अब कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे.
पूर्व सीएम कमलनाथ अब कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे.

सीएम शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj) के मुकाबले पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) को सबसे ज्यादा रिजर्व नेचर का माना जाता है. कमलनाथ बैठक करने और फैसले लेने पर ज्यादा फोकस करते हैं. इसके उलट शिवराज सिंह चौहान आम जनता के बीच सक्रिय रहते हैं.

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भोपाल.मध्य प्रदेश (MP) के पूर्व सीएम और वर्तमान पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamalnath) बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं.नये साल में उन्होंने कमरा बंद रणनीति के अलावा बैठकों और मुलाकातों का दौर शुरू कर दिया है. वो कार्यकर्ताओं की उन शिकायतों को दूर कर रहे हैं कि कमलनाथ हमसे मिलते नहीं हैं.

कमलनाथ ने खुलकर कहा अब जो भी उनसे मुलाकात करना चाहता है वह ईमेल पर खबर भेज दें. फिर हालात देखते हुए वो हर वर्ग के लोगों से मिलने के लिए तैयार हैं. कमलनाथ का यह बदला हुआ अंदाज बता रहा है कि वो अब खुद को बदलने की तैयारी में हैं. उन्होंने एक दिन पहले मीडिया से चर्चा में कहा कि जो भी उनसे मिलना चाहता है वो ईमेल पर रिक्वेस्ट भेज कर उनसे मुलाकात कर सकता है. लोगों से मुलाकात कर अब वह लोगों से आम मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

सीधा संवाद
कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने बताया कि कमलनाथ का बदला अंदाज कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए है. अब नई जिम्मेदारियों के साथ कमलनाथ आगामी चुनाव की रणनीति बना रहे हैं. पहले सत्ता में रहते हुए उन पर जिम्मेदारियां ज्यादा थीं.लेकिन अब विपक्ष में होने के नाते लोगों से मिलना और उनके दर्द दूर करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है.इसलिए वो जनता और पार्टी सदस्यों से सीधे संवाद कायम करना चाहते हैं.



एक मेल भेजिए
सीएम शिवराज सिंह चौहान के मुकाबले पूर्व सीएम कमलनाथ को सबसे ज्यादा रिजर्व नेचर का माना जाता है. कमलनाथ बैठक करने और फैसले लेने पर ज्यादा फोकस करते हैं. इसके उलट शिवराज सिंह चौहान आम जनता के बीच सक्रिय रहते हैं. शिवराज के मुकाबले कमलनाथ से नेताओं और कार्यकर्ताओं का सीधा संपर्क न होने का मामला हाल ही में प्रभारी और सह प्रभारियों की बैठक में भी गूंजा था. उसके बाद कमलनाथ अपने रूटीन और कार्यशैली में बदलाव कर रहे हैं. यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ये अच्छी पहल होगी. अपने मुखिया पीसीसी चीफ के आसानी से उपलब्ध रहने और समस्याएं सुनने से कार्यकर्ताओं का हौसला और उत्साह बढ़ेगा.
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