भोपाल गैस पीड़ितों ने किया ऐलान, 'मुआवजा नहीं तो वोट नहीं'
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बता दें, 3 दिसम्बर 1984 को भोपाल में 'यूनियन कार्बाइड' नाम की कम्पनी के कारखाने से 'मिथाइल आइसो साइनाइड' गैस का रिसाव हुआ था.

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मध्यप्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भोपाल गैस त्रासदी चुनावी मुद्दा बन गया है. भोपाल में 1984 में हुए गैस कांड के पीड़ितों ने मुआवज़े की मांग करते हुए अपने मकानों के बाहर पोस्टर टांग दिए हैं. गैस कांड के इन पीड़ितों ने आरोप लगाया कि हादसे के 33 साल बाद भी सरकार ने उन्हें मुआवज़ा नहीं दिया है.

मकानों की दीवारों और छतों पर लगे पोस्टरों में लोगों ने पॉलिटिकल पार्टियों की नीयत पर सवाल उठाया है. पोस्टरों में लिखा गया है कि राज्य में होने जा रहे चुनाव में उस पार्टी को वोट किया, जो पावर में आने के बाद उन्हें मुआवज़ा देगी. लोगों ने अपने मकानों के बाहर भी लिखवा दिया है कि गैस पीड़ितों को मुआवज़ा जो दिलवाएगा, वही वोट ले जाएगा.

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित ने कहा कि जो भी पार्टी वोट मांगने आएगी वो बीजेपी की हो या कांग्रेस की हो, हम अपना स्टाम्प पत्र देंगे. उसपर वो लिखकर दें और वादा करेंगे तो हम उसी को वोट देंगे. ये भोपाल के गैस पीड़ितों की आवाज़ है.



बता दें, 3 दिसम्बर 1984 को भोपाल में 'यूनियन कार्बाइड' नाम की कम्पनी के कारखाने से 'मिथाइल आइसो साइनाइड' गैस का रिसाव हुआ था. जिसकी चपेट में आने से साढ़े पांच लाख लोग 558,125 प्रभावित हुए थे. जिनमें 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हज़ारों लोग विकलांग हो गए थे.
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