भोपाल : गैस पीड़ितों ने कोरोना से हुए नुकसान के लिए अलग से मुआवज़े की मांग की

2020 में भोपाल में गैस पीड़ितों की संख्या 4 लाख 63 हजार पचास

भोपाल ग्रुप फ़ॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने बताया कि यूनियन कार्बाइड के खुद के दस्तावेज यह बताते हैं कि मिथाइल आइसो सायनेट (MIC) के असर से स्थाई क्षति पहुंचती है. इसके बावजूद 90% पीड़ितों को अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त मानते हुए मात्र 25,000 मुआवजा दिया गया.

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भोपाल.भोपाल (Bhopal) गैस पीड़ितों के 4 संगठनों ने कोरोना (Corona) से हुई क्षति के लिए यूनियन कार्बाइड और डाउ केमिकल से अतिरिक्त मुआवजे की मांग की है. संगठनों का दावा है कि आम लोगों के मुकाबले 6.5% गुना ज्यादा गैस पीड़ित लोगों को कोरोना हुआ.

संगठनों का दावा
संगठनों ने कहा कोरोना की वजह से 56% मौतें गैस पीड़ित आबादी में हुईं. ये जिले की आबादी का 17% है. संगठनों ने गैस राहत अस्पतालों के रिकॉर्ड सर्वोच्च न्यायालय में लंबित सुधार याचिका में पेश करने की मांग की. उन्होंने 90% गैस पीड़ितों को अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त मानते हुए 25 हजार के मुआवजे की मांग रखी है.

ये है फैक्ट फ़ाइल
-2020 में भोपाल में गैस पीड़ितों की संख्या 4 लाख 63 हजार पचास.
-कोरोना से हुई मौत की संख्या 450. इनमें से 254 गैस पीड़ित
-कोरोना की मृत्यु दर के हिसाब से गैस पीड़ित आबादी (463050 में होने वाली मौतों की संख्या 74
-गैस पीड़ित आबादी में कोरोना की वजह से हुई मृत्यु दर आम आबादी से साढे छह फीसदी ज्यादा है.

ये है मांग
भोपाल ग्रुप फ़ॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा  ने बताया कि यूनियन कार्बाइड के खुद के दस्तावेज यह बताते हैं कि मिथाइल आइसो सायनेट (MIC) के असर से स्थाई क्षति पहुंचती है. इसके बावजूद 90% पीड़ितों को अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त मानते हुए मात्र 25,000 मुआवजा दिया गया. विश्व व्यापी महामारी ने विश्व के भीषणतम हादसे के पीड़ितों के साथ हुई नाइंसाफी को साफ़ उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कोरोना महामारी के बहाने से डाउ केमिकल ने हज़ारो मजदूरों की छटनी की है और सैनिटाइजर के उत्पादन से मुनाफ़ा कमा रही है.

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