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Bhopal News: मध्य प्रदेश में अब अपराधियों को पकड़ेंगे पुलिस के देसी 'साइलेंट किलर'

Bhopal News: मध्य प्रदेश में अब अपराधियों को पकड़ेंगे पुलिस के देसी 'साइलेंट किलर'

फिलहाल इन पप्स को पुलिस ट्रेनिंग दे रही है.

फिलहाल इन पप्स को पुलिस ट्रेनिंग दे रही है.

MP POLICE DOG SQUAD: खोजी कुत्तों के मामले में मप्र पुलिस भी अब स्वदेशी की राह पर चल पड़ी है. राज्य पुलिस की डॉग स्क्वॉड में अब तक विदेशी नस्ल के कुत्ते ही शामिल थे, लेकिन उसने पहली बार देसी नस्ल के कुत्तों पर भरोसा जताया है.

भोपाल. मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वॉड (Dog squad) में अब देसी ब्रीड के कई डॉग भी शामिल कर लिए गए हैं. अभी तक ये रुतबा सिर्फ विदेशी नस्ल के कुत्तों को ही हासिल था. ये देसी डॉग अब जांच में पुलिस की मदद करेंगे. मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में यह पहला मौका है. जब देसी ब्रीड के डॉग पर पुलिस भरोसा जता रही है.

राजधानी भोपाल में 23 वीं बटालियन में डॉग स्क्वॉड का मुख्यालय है. यहां पर देसी ब्रीड के छह पपीज को ट्रेनिंग के लिए लाया गया है. यहां पर इन सभी को पुलिस अपने अनुसार ट्रेनिंग देगी. इससे पहले देसी ब्रीड के डॉग का इस्तेमाल सेना और पैरामिलिट्री फोर्स ने शुरू किया था. उन्हीं की तर्ज पर अब एमपी पुलिस भी अब ये देसी नस्ल के कुत्ते लेकर आयी है. बता दें कि मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में देसी नस्ल के डॉग को पुलिस और सेना में शामिल करने की बात की थी.

10 जोड़ी देसी डॉग को ट्रेनिंग
एमपी पुलिस ने 10 जोड़ी देसी नस्ल के पपीज खरीदे हैं. इन्हें भोपाल में ट्रेनिंग दी जा रही है.23वीं बटालियन के पीटीएस डॉग में ट्रेनिंग लेने के बाद इन्हें डॉग इन्वेस्टिगेशन में शामिल कर लिया जाएगा. ये पप्स 6 देसी नस्ल मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, राजा पलायम, कन्नी, कोम्बाई और चिप्पीपराई के हैं.



जानें कितने खतरनाक हैं ये डॉग्स
कोम्बाई डॉग है साइलेंट किलरः कोम्बाई डॉग (Combi Dog) को साइलेंट किलर (Silent Killer) भी कहा जाता है. क्योंकि यह चुपचाप तरीके से अपने काम को अंजाम देने में माहिर होते हैं.कोम्बाई का नाम तमिलनाडु के एक शहर के नाम पर पड़ा है.ये घर के बाहर बैठकर चुपचाप नजर रखते हैं और घर या किसी भी जगह में दाखिल होने वाले संदिग्ध लोगों पर हमला कर देते हैं.सीआरपीएफ ने इस नस्ल को भर्ती किया है.इसकी औसत उम्र 12 से15 साल होती है.
मुधोल हाउंड डॉग की चीते जैसी रफ्तारः मुधोल हाउंड (Mudhol Hound Dog) जर्मन शेफर्ड से भी तेज होता है. इसकी रफ्तार चीते जैसी है.कर्नाटक के बगलकोट के मुधोल की यह प्रजाति शिकार और रफ्तार में जर्मन शेफर्ड से तेज मानी जाती है.इसे कैरावान भी कहते हैं. स्वामिभक्ति के लिए भी इसे जाना जाता है. इसी कारण इसे 2017 में भारतीय सेना में शामिल किया गया, बाद में इसकी पहचान स्नाइफर डॉग के तौर पर उभरी.इसकी औसत उम्र 10 से 12 वर्ष होती है.
राजा पलायम डॉग रखवाली में माहिरः राजा पलायम डॉग (Raja Palayam Dog) की 20 साल की औसत उम्र होती है. इस डॉग के सम्मान में 9 जनवरी 2005 को 15 रु. कीमत का डाक टिकट जारी किया था. इनका नाम तमिलनाडु के राजापलयम शहर के नाम पर रखा है. यह सुअर के शिकार और रखवाली के लिए जाने जाते हैं.
कन्नी डॉग रहते हैं बेहद वफादारः तमिल में कन्नी का मतलब शुद्ध होता है. बेहद वफादार होने के कारण इस नस्ल का नाम कन्नी रखा गया है. यह (Kanni Dog) डॉग जंगली जानवरों के शिकार में माहिर होते हैं. इन्हें जमींदार पाला करते थे. कन्नी की औसत उम्र 14 से 16 वर्ष होती है.
चिप्पीपराई डॉग लगाते हैं सबसे ऊंची छलांगः चिप्पीपराई डॉग (Chippiparai Dog) सबसे ऊंची छलांग लगाने में माहिर होते हैं. यह किसी भी स्थिति से निपटने और किसी का भी पीछा करने में उस्ताद माने जाते हैं.हर बाधा को पार करने में इन्हें महारथ हासिल है. तमिलनाडु के मदुरै के शहर चिप्पीपराई पर इनका नाम पड़ा है, जो केरल की पेरियार झील के पास भी मिलते हैं. रफ्तार 10 फीट तक की छलांग लगाना इनकी खूबी है.इनकी उम्र 12 से15 वर्ष होती है.
रामपुर ग्रेहाउंड डॉग सबसे बड़ा शिकारीः रामपुर ग्रेहाउंड (Rampur Grey Hound) नस्ल के डॉग सबसे बड़े शिकारी होते हैं.  20वीं शताब्दी की शुरुआत में रामपुर के नवाब अहमद अली खान ने अफगान हाउंड इंग्लिश ग्रेहाउंड की क्रॉस ब्रीड से यह नस्ल तैयार की थी.इसे शिकार के लिए तैयार किया था. इसकी उम्र 13 से14 वर्ष होती है.

Tags: Criminal police, Dog squad, Mp police academy

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