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फिर पार्टी लाइन से हटकर बोले लक्ष्मण सिंह-कांग्रेस को कृषि बिल पूरी तरह खारिज नहीं करना चाहिए

लक्ष्मण सिंह अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं.
लक्ष्मण सिंह अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं.

पीसीसी अध्यक्ष कमल नाथ (Kamalnath) ने बीजेपी के किसान सम्मेलनों पर निशाना साधते हुए कहा था शिवराजजी की पिछले 17 वर्षों में की गयी घोषणाओं पर गौर करें तो उस हिसाब से हमारे प्रदेश का किसान (Kisan) आज देश में सबसे समृद्ध होना चाहिये

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भोपाल.कृषि बिल (Agricukture bill) पर जारी सियासी तकरार के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक (Congress MLA) लक्ष्मण सिंह ने फिर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कांग्रेस पार्टी को कृषि बिल को पूरी तरह खारिज नहीं करना चाहिए. न्यूज़ 18 से बातचीत में लक्ष्मण सिंह ने कहा कांग्रेस पार्टी का स्टैंड पूरी तरह बिल खारिज करने पर नहीं होना चाहिए बल्कि उसमें सुधार के लिए कहा जाना चाहिए.

लक्ष्मण सिंह के मुताबिक फ्रूट प्रोसेसिंग, वेजिटेबल प्रोसेसिंग और स्टोरेज में प्राइवेट प्लेयर के आने पर कोई प्रतिबंध नहीं हो. खुद कांग्रेस ने भी फ्रूट और वेजिटेबल के प्रोसेसिंग के लिए प्राइवेट सेक्टर को आमंत्रित किया था. हालांकि उन्होंने कहा मोटे अनाज का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए बिल के प्रावधान ठीक नहीं हैं. सरकार को एमएसपी बढ़ाने और खरीद समय पर हो इसका ध्यान रखना चाहिए. एफसीआई की जगह निजी क्षेत्र को लाने की वकालत लक्ष्मण सिंह ने की है.





बीजेपी के किसान सम्मेलन
कृषि बिल को लेकर बीजेपी लगातार किसानों के बीच जा रही है. आंदोलन का असर भले ही हरियाणा और पंजाब में हो लेकिन मध्यप्रदेश में कृषि बिल के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. 15 और 16 दिसंबर को बीजेपी ने प्रदेश के 7 संभागों में किसान सम्मेलनों का आयोजन कर किसानों को इसके फायदे गिनाए. इन सम्मेलनों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा समेत तमाम दिग्गज नेता शामिल हुए. बीजेपी पूरी तरह से किसान बिल के समर्थन में है.

कांग्रेस का स्टैंड
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस कृषि बिल को लेकर लगातार बीजेपी पर निशाना साध रही है. पीसीसी अध्यक्ष कमल नाथ ने बीजेपी के किसान सम्मेलनों पर निशाना साधते हुए कहा था शिवराजजी की पिछले 17 वर्षों में की गयी घोषणाओं पर गौर करें तो उस हिसाब से हमारे प्रदेश का किसान आज देश में सबसे समृद्ध होना चाहिये. लेकिन मध्यप्रदेश की स्थिति तो उसके विपरीत है. आज प्रदेश का किसान क़र्ज़ के दलदल में फंसकर सबसे ज़्यादा आत्महत्या कर रहा है. प्रदेश में खेती घाटे का धंधा बन चुकी है. इसी से शिवराजजी की किसानों के लिए की जाने वाली हवा-हवाई घोषणाओं की हक़ीक़त  समझी जा सकती है.
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