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Bhopal: प्यारे मियां मामला- नाबालिग लड़कियों के परिजनों का आरोप, हमारी बेटियों की जान को खतरा, जांच महज दिखावा

नाबालिग लड़कियों के परिजनों ने जांच पर संदेह जताया है. (फाइल फोटो)
नाबालिग लड़कियों के परिजनों ने जांच पर संदेह जताया है. (फाइल फोटो)

नाबालिग लड़कियों के परिजनों का आरोप है कि जांच सिर्फ दिखावा है. हमें इस पर भरोसा नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटियों की जान को खतरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:14 PM IST
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भोपाल. प्यारे मियां यौन शोषण मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे. इस मामले में गुरुवार को फिर नया विवाद खड़ा हो गया. राष्ट्रीय बाल आयोग की टीम ने पता लेने के बावजूद अभी तक मृतक नाबालिग लड़की के परिजनों से मुलाकात नहीं की. वहीं, दूसरी नाबालिग लड़कियों के परिजनों का आरोप है कि जांच सिर्फ दिखावा है. हमें इस पर भरोसा नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटियों की जान को खतरा है. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बच्चियों को बचाने की अपील की है.

जानकारी के मुताबिक, नाबालिग लड़कियों के परिजन नेहरू नगर स्थित बालिका गृह में राष्ट्रीय बाल आयोग की टीम के सवालों के जवाब दे चुके हैं. लेकिन, राष्ट्रीय बाल आयोग  की टीम मृतका नाबालिग के परिजनों से अभी तक नहीं मिली है. जबकि टीम मृतका के परिजनों का पता भी ले चुकी है. वहीं दूसरी नाबालिग लड़कियों के परिजन बालिका गृह में अपनी बेटियों से मिलने के लिए इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें बेटियों से नहीं मिलने दिया गया.

दो दिन बाद अध्यक्ष को सौंपी जाएगी रिपोर्ट



बताया जाता है कि टीम ने पीड़ित नाबालिग लड़कियों और बालिका गृह की अधीक्षक से यह पूछा कि आखिर नींद की गोलियां पीड़िता के पास कहां से आई, तो इसका जवाब कोई नहीं दे सका. टीम दो दिन बाद आयोग के अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेगी.
इंतजार करते रहे बेटियों से मिलने का

बता दें, बालिका गृह में नाबालिग लड़कियों के परिजनों को उनकी बेटियों से नहीं मिलने दिया गया. परिजनों ने बताया कि वे बेटी को देखकर उनके सुरक्षित होने की तसल्ली कर लेना चाहते थे. लेकिन उनसे कहा गया कि आज टीम आई है, इसलिए मिलवा नहीं सकते. काफी देर तक परिजन नेहरू नगर बालिका गृह के बाहर बैठे रहे. कई बार उन्होंने निवेदन किया, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया.

परिजनों की सीएम से अपील- कुछ करिए, बच्चियों की जिंदगी खतरे में

लड़कियों के परिजनों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की है कि उनकी बेटियों को भी जान का खतरा है. परिजनों ने अपील की- कुछ कीजिए सर, क्या गरीब की बेटी की जिंदगी की कोई कीमत नहीं. बालिका गृह के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि ये लोग ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे हमारी बेटी कोई अपराधी हो. हमसे बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता है. हम चाहते हैं हमारी बेटी हमें सौंप दी जाए. अब हमें बालिका गृह और यहां के अधिकारियों पर भरोसा नहीं. हमारी बेटी की भी जान को खतरा हो सकता है. पता नहीं क्या मिलाकर दे रहे हैं खाने में. बाकी बालिकाओं की भी तबीयत लगातार खराब हो रही है.

एसआईटी कर रही है जांच

गौरतलब है कि एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर SIT गठित की गई. सीएम ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश दिए कि घटना में दोषी अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए. एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है. इस जांच दल में पुलिस मुख्यालय में महिला अपराध शाखा की आईजी, आईपीएस अधिकारी दीपिका सूरी के साथ सीएसपी टीटी नगर और एक प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं.

बालिका गृह में बिगड़ गई थी लड़कियों की हालत

गौरतलब है कि 25 जनवरी को जांच के लिए SIT रिववार को जब बालिका गृह पहुंची तो टीम को देखकर लड़कियों को चक्कर आने लगे थे, उल्टी होने लगी थी. एक लड़की के पेट में अचानक दर्द शुरू हो गया था. हालत बिगड़ती देख दो लड़कियों को जेपी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया था.फिलहाल सभी स्वस्थ हैं.

नींद की गोलियां खान से हो गई थी बच्ची की मौत

प्यारे मियां यौन शोषण मामले में एक बच्ची की हाल ही में संदिग्ध मौत हो गई थी. पुलिस के मुताबिक, उसने कुछ दिनों पहले नींद की गोलियां खा ली थीं. इसके बाद उसे संदिग्ध परिस्थितियों में हमीदिया अस्पताल में भर्ती किया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया.  मामले को लेकर कलेक्टर अविनाश लवानिया ने न्यायायिक जांच के आदेश दे दिए थे. पूरे मामले में कमला नगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी. जांच के बाद बालिका गृह संरक्षण की अधीक्षिका एंटोनिया कुजूर इक्का को हटा दिया गया और नई अधीक्षिका योगिता मुकाती को नियुक्त किया गया है.

पुलिस की निगरानी में हुआ था अंतिम संस्कार

नाबालिग की मौत के बाद पुलिस की निगरानी में उसका भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. इस केस में गौर करने वाली ये है कि नाबालिग इस केस की न तो आरोपी थी और न ही अपराधी. वह केवल फरियादी थी. पुलिस नाबालिग के शव को हमीदिया अस्पताल से सीधे श्मशान ले गई, जबकि मर्चुरी में पीड़िता के चाचा और पिता ने शव घर ले जाने की जिद की. लेकिन, पुलिस नहीं मानी.
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