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भोपाल की साक्षी ने प्लास्टिक की बोतलों और नारियल के खोलों में उगा दिए विदेशी पौधे

साक्षी ने अपने घर के पीछे तकरीबन 4000 पौधे उगा रखे हैं. (सांकेतिक फोटो, गेटी)
साक्षी ने अपने घर के पीछे तकरीबन 4000 पौधे उगा रखे हैं. (सांकेतिक फोटो, गेटी)

साक्षी के मिनी जंगल में 450 प्रजातियों के तकरीबन 4000 पौधे हैं. वे बताती हैं कि इन पौधों में विदेशी किस्मों की 150 प्रजातियां हैं. ये पौधे नारियल के खोल में, रीसाइकल किए गए बोतलों और डिब्बे में उगाए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2021, 9:00 PM IST
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भोपाल. पौधे उगाने से न केवल आपके आसपास की हवा की क्वॉलिटी (air quality) बेहतर होती है, बल्कि यह आपके दिलो दिमाग को भी शांत करता है. इस सलाह को भोपाल (bhopal) की साक्षी भारद्वाज (Sakshi Bharadwaj) ने दिल से लिया और अपने घर के पीछे एक 'छोटा जंगल' (mini jungle) रच दिया. यहां 450 प्रजातियों के तकरीबन 4000 पौधे हैं. वे बताती हैं कि इन पौधों में विदेशी किस्मों की 150 प्रजातियां हैं और वे सभी वर्टीकली उगाए गए हैं. ये पौधे नारियल के खोल में, रीसाइकल किए गए बोतलों और डिब्बे में उगाए गए हैं. वे कहती हैं कि बागवानी मेरी जीन में है. अपने प्रकृति प्रेम की वजह से ही तो मैंने माइक्रोबायोलजी ली है.

वह बताती हैं कि 2019 में उन्होंने मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में कृषि के सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करना शुरू किया. उन्होंने पौधों को उगाने में एक विशेष रुचि डेवलप की. दरअसल वे बच्चों को पौधों के प्रजनन और उनकी आनुवांशिकी जैसे कॉन्सेप्ट के बारे में बढ़ा रही थीं, तो वे चाहती थी कि वे अपने अनुभव से बच्चों को ये बातें बताएं. इसके लिए उन्होंने किसी कॉन्सेप्ट को पढ़ाने से पहले उसे अपने घर में आजमाने को सोचा.

वह पेड़ों की शाखाओं पर ग्राफ्टिंग करतीं और नए पौधे उगातीं. या फूलों के पौधे खरीदतीं और उनसे नए पौधे बनातीं. इन सबके अलावा वह साइट्रस के छिलके पर एक्सपेरिमेंट करके जैव-एंजाइम बनाने और कीड़ों को केवल नीम या पपीता के पत्ते जैसे औषधीय पौधे को खिलाकर वर्मीकम्पोस्ट बनाने का भी प्रयोग करेंगी.



2020 की शुरुआत में मैं सोशल मीडिया पर चीजें देख रही थी. तभी वहां अर्बन गार्डेनिंग कम्यूनिटी वालों को मॉन्टास और फिलोडेंड्रोन जैसे विदेशी पौधों पर चर्चा करते पाया कि वे उनके घर पर बढ़ रहे हैं. मैं उनलोगों के पौधों की विवधता को सुनकर हैरान थी. उस समय मुझे अपना बागीचा बहुत छोटा लगा. तब मैंने स्नेक प्लांट, मॉन्टास और फिलोडेंड्रोन और बेगनबेलिया जैसे कुछ पौधों का ऑर्डर दिया. इन पौधों के लिए मैंने नर्सरी से सीमेंट के गमले खरीदे. उसमें वर्मी कंपोस्ट और ऑर्गेनिक खाद डाले. उन पौधों को लगातार पानी पटाया और फलते-फूलते देखती रही.


साक्षी कहती हैं कि मैंने अपने घर के चारों ओर जगह होने के बावजूद सीमेंट गमले में लगाने का फैसला किया. दरअसल, जमीन में लाल चींटियां हैं और वे पौधों को नष्ट कर देती हैं. मैंने उनसे छुटकारा पाने के लिए कई जैविक तरीके अपनाए, पर अक्सर नाकाम रही.

साक्षी बताती हैं कि सीमेंट के गमलों में पौधे अच्छी तरह से बढ़ हो रहे थे, लेकिन इन पौधों के लिए और अधिक अधिक गमले खरीदने से मैंने खुद को रोक दिया और इको-फ्रेंडली जाने का फैसला किया. मैंने सोचा कि मैं हर दिन नारियल पानी पीती हूं. आखिर नारियल के खोल में नए पौधे क्यों नहीं लगाए जा सकते? उसके बाद मैंने कुछ विदेशी पौधे गमले में, नारियल के सेल में, पानी के बोतलों और केन्स में वर्टिकली उगाए.
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