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संघ ने पेश किया साल भर की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड, जानिए मध्य भारत प्रांत ने क्या विशेष किया ?

मध्य भारत प्रांत में भी कोरोना संक्रमण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लगभग 89 प्रतिशत प्रत्यक्ष शाखाएं शुरू हो गई हैं

मध्य भारत प्रांत में भी कोरोना संक्रमण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लगभग 89 प्रतिशत प्रत्यक्ष शाखाएं शुरू हो गई हैं

Bhopal.भोपाल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य भारत प्रांत के संघ चालक अशोक पांडेय ने कोरोना काल में संघ की ओर से किये गए काम की जानकारी दी.

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भोपाल.राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में आज संघ के साल भर किये गए काम की समीक्षा की गई. आने वाले साल की योजना पर फैसले तय हुए. संघ की ओर से मध्य भारत प्रान्त की उपलब्धियों का खाका पेश किया गया.

भोपाल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य भारत प्रांत के संघ चालक अशोक पांडेय ने कहा वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण पिछले साल मार्च से जून तक प्रत्यक्ष शाखाएं नहीं लगीं. लेकिन संघ का काम फिर भी चलता रहा. स्वयंसेवकों ने तकनीक का उपयोग कर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम और बौद्धिक आयोजन किए. इसके साथ ही कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात में समाज की सहायता के लिए देशभर में स्वयं सेवक सक्रिय हो गए. स्वयं सेवकों ने बड़े स्तर पर राशन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री दी गयी. नागरिकों का जीवन बचाने के लिए बड़े स्तर पर रक्तदान किया.

शाखा कार्य
कोरोना संक्रमण के कारण संघ की जो शाखाएं स्थगित हुई थीं, वो जुलाई-2020 से फिर से शुरू हो गईं हैं. देशभर में लगभग 90 प्रतिशत शाखाएं शुरू हो गई हैं. मार्च-2020 में 38 हजार 913 स्थानों पर 62 हजार 477 शाखाएं और लगभग 29 हजार साप्ताहिक मिलन चल रहे थे. मार्च-2021 की स्थिति में 34 हजार 569 स्थानों पर 55 हजार 652 शाखाएं और लगभग 26 हजार साप्ताहिक मिलन प्रारंभ हो चुके हैं. कोरोना काल में स्वयंसेवकों ने देशभर में सेवाभारती के माध्यम से 92 हजार 656 स्थानों पर सेवा कार्य किए, इसमें 5 लाख 60 हजार से अधिक कार्यकर्ता सक्रिय रहे.
सेवा कार्य


संघ ने दावा किया कि कोरोना काल में 92,656 सेवा स्थानों पर 5,07,656 कार्यकर्ताओं ने 73,81,802 परिवारों तक राशन किट. 4,66,34,730 भोजन के पैकेट, 89,23,131 मास्क और 59,91,570 आयुर्वेदिक काढ़ा पहुंचाया. 1,91,661 अस्थाई निवास, 19,42,179 लोगों को गाड़ी उपलब्ध करवाई गयी. 60,259 यूनिट रक्तदान स्वयं सेवकों ने किया. 2,67,675 घुमंतू जन सहायता के कार्यक्रम चलाए गए. इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों को मार्ग में 1,778 स्थानों पर 44,86,558 भोजन के पैकेट उपलब्ध करवाए गए. 483 स्थानों पर मेडिकल सहायता केंद्र लगाकर 1,45,159 लोगों तक सहायता पहुंचाई और 9,18,358 लोगों को वाहन आदि की सहायता दी गयी.

सबसे बड़ा संपर्क अभियान
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के आह्वान पर स्वयं सेवकों ने निधि समर्पण का अभियान चलाया. कार्यकर्ता देश भर में 5 लाख 45 हजार 737 स्थानों पर पहुंचे और 12 करोड़ 47 लाख 21 हजार परिवारों से संपर्क किया गया. देश में 20 लाख से अधिक कार्यकर्ता अभियान में लगे. मध्यभारत प्रांत में 97 प्रतिशत नगरों के मोहल्ले और गांव में 88 प्रतिशत से अधिक परिवारों तक कार्यकर्ताओं ने संपर्क किया. इस संपर्क अभियान में मध्य भारत प्रांत के 2,193 महिला और 28,348 पुरुष कार्यकर्ताओं के साथ 590 साधु-संत भी शामिल हुए.

ई-माध्यमों से बौद्धिक आयोजन
कोरोना संकट के कारण संघ की प्रत्यक्ष शाखाएं तो स्थगित थीं लेकिन उस दौरान भी ई-माध्यमों का उपयोग करते हुए बौद्धिक प्रबोधन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. देशभर में ऐसे कुल 24,077 प्रबोधन कार्यक्रम किये गए. इनमें 10,36,394 लोगों की उपस्थिति रही.

मध्यभारत में संघ कार्य का विस्तार
मध्य भारत प्रांत में भी कोरोना संक्रमण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लगभग 89 प्रतिशत प्रत्यक्ष शाखाएं शुरू हो गई हैं. कोरोना से छोटे बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए प्रांत में 2,044 स्थानों पर 15 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने अभिनव प्रकल्प ‘बालगोकुलम’ चलाया. इसके अलावा स्वयंसेवकों की ट्रेनिंग के लिए विभिन्न विषयों पर ऑनलाइन वर्ग किए गए.
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