भोपाल आए सिंधिया: मंत्री बनने की आस लगाए बैठे समर्थक बोले- इंतज़ार का फल मीठा होता है

सिंधिया ने सीएम शिवराज से अकेले में चर्चा की.

ज्योतिरादित्य सिंधिया (Scindia) ने सीएम शिवराज (CM Shivraj) से अकेले में गुफ्तगू की. ऐसे में सिंधिया समर्थकों में मंत्री बनने की आस फिर से जगी है.

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भोपाल. ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया समर्थक नेताओं को एक बार फिर मंत्री (Minister) बनने की आस बंध गई है. सिंधिया खेमे के नेता और शिवराज कैबिनेट में मिनिस्टर इन वेटिंग गोविंद राजपूत (Govind Rajput) ने इस सिलसिले में एक बड़ा बयान दिया है. शुक्रवार को न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए गोविंद राजपूत ने कहा उन्हें मंत्री बनने की जल्दबाजी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि इंतजार का फल मीठा होता है. मंत्री बनाने का फैसला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे.

गोविंद सिंह राजपूत के इस बयान के मायने इसलिए भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि शिवराज कैबिनेट में मंत्री रहे गोविंद राजपूत और तुलसी सिलावट को उपचुनाव जीते हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन उन्हें अभी तक दोबारा मंत्री नहीं बनाया गया है. इन दोनों नेताओं को समय अवधि में उपचुनाव ना होने की वजह से अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. माना जा रहा है कि लंबे इंतजार का फल इन दोनों को जल्द ही मीठा मिल सकता है.

सिंधिया-शिवराज मुलाकात
एक महीने के भीतर तीसरी बार भोपाल पहुंचे बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ एक बार फिर मुलाकात हुई. दोनों नेताओं ने अकेले सीएम हाउस में बैठक की. यह माना जा रहा है कि दोनों के बीच संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और निगम मंडलों में होने वाली नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई है. हालांकि, भोपाल एयरपोर्ट पर जब मीडिया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से मंत्रिमंडल को लेकर सवाल किया तो उन्होंने अपना पुराना बयान दोहराया. उन्होंने कहा था कि मंत्रिमंडल का विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है.



उपचुनाव के नतीजों का एक महीना पूरा
शिवराज मंत्रिमंडल को लेकर अटकलों के दौर लगातार जारी है. 10 नवंबर को उपचुनाव के नतीजे आने के बाद अब तक विस्तार नहीं किया गया है. ऐसे में कयास यह लगाए जा रहे हैं कि आखिरकार मंत्रिमंडल विस्तार में देरी किस बात को लेकर हो रही है?  उपचुनाव में शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल रहे तीन मंत्री चुनाव हार गए थे जबकि गोविंद राजपूत और तुलसी सिलावट को चुनाव से पहले इस्तीफा देना पड़ा था. लेकिन यह दोनों चुनाव जीत गए थे और उन्हें अब अपनी शपथ का दोबारा इंतजार है.

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