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BHOPAL : निकाय चुनाव से पहले शिवराज का सवर्ण आयोग का दांव, कितना फायदेमंद फैक्टर 

MP NEWS एमपी में 10 फीसदी सवर्ण वोट हैं.
MP NEWS एमपी में 10 फीसदी सवर्ण वोट हैं.

BHOPAL : 2018 के पहले हुए एससी एसटी (SCST) और और सवर्ण आंदोलन की वजह से शिवराज सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर चंबल संभाग में हुआ था और बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी

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भोपाल.मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने सवर्ण आयोग का जो बड़ा दांव चला है वो उसे कितना फायदा पहुंचा सकता है. गुणा-भाग तो कह रहा है 2018 के चुनाव से पहले सवर्ण आंदोलन के कारण नुकसान झेल चुकी बीजेपी (BJP) अब अपने इस कदम से नफे में ही रहेगी.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गणतंत्र दिवस के मौके पर किए गए ऐलान के मुताबिक सरकार सवर्ण आयोग का गठन करने जा रही है. इस आयोग के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए गुरुवार को बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा हर वर्ग का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है. प्रदेश में एससी एसटी और ओबीसी आयोग पहले से काम कर रहे हैं. अब सरकार ने सवर्ण आयोग के गठन का फैसला किया है. उन्होंने कहा प्रदेश में गरीब सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण का लाभ पहले से दिया जा रहा है. अब उनके हितों का और ध्यान रखते हुए गरीब सवर्णों के लिए ही ये आयोग बनाया गया है.





चुनाव से पहले ऐलान
मध्यप्रदेश में आने वाले दिनों में निकाय चुनाव की आहट सुनाई दे रही है. राज्य निर्वाचन आयुक्त साफ कर चुके हैं कि मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 3 मार्च को कर दिया जाएगा. ऐसे में यह माना जा रहा है कि चुनाव की तारीखों का ऐलान उसके बाद कभी भी किया जा सकता है अगर मार्च में तारीखों का ऐलान हुआ तो अप्रैल में निकाय चुनाव संभावित हो सकते हैं । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सवर्ण आयोग गठन के एलान को निकाय चुनाव के राजनीतिक फायदे के तौर पर देखा जा रहा है.

क्या है सियासी गणित ?
सवर्ण आयोग के गठन का ऐलान वोट बैंक के लिहाज से देखें तो मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीब 52% ओबीसी वोट हैं. जबकि सवर्णों का वोट प्रतिशत करीब 10% ही है. बाकी एससी-एसटी वोट हैं. इस लिहाज से सवर्णों का प्रतिशत उतना ज्यादा तो नहीं है. लेकिन 2018 के पहले हुए एससी एसटी और और सवर्ण आंदोलन की वजह से शिवराज सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर चंबल संभाग में हुआ था और बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी. यही वजह है कि अब सरकार किसी भी वर्ग की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती.
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