टैक्स चोरी के मामले में शराब कारोबारी सोम डिस्टलरीज के मालिकों को हुई जेल
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टैक्स चोरी के मामले में शराब कारोबारी सोम डिस्टलरीज के मालिकों को हुई जेल
सोम डिस्टलरीज के मालिकों को टैक्स चोरी के मामले में जेल भेजा गया

कोर्ट (Court) ने जब बीमारियों के संबंध में जेपी अस्पताल (j p hospital) की मेडिकल रिपोर्ट देखी तो कोर्ट ने माना कि आरोपियों को कोई गंभीर बीमारी नहीं है.

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भोपाल.भोपाल जिला कोर्ट ने टैक्स चोरी (tax evasion) के मामले में प्रदेश के शराब कारोबारी सोम डिस्टलरीज (Som Distilleries) के डायरेक्टर जगदीश अरोड़ा, उसके भाई अजय अरोड़ा और एक्ज्यूकिटिव विनय सिंह को जेल (JAIL) भेज दिया है. आरोपियों ने स्वास्थ्य खराब होने का हवाला दिया,लेकिन कोर्ट ने अस्पताल से आई रिपोर्ट के आधार पर कोई गंभीर बीमारी होना नहीं पाया.

सैनेटाइजर को बिना टैक्स बेचने के मामले में तीनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुष्पक पाठक की अदालत ने 24 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में पुरानी जेल भेज दिया. डायरेक्टेड जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस ( डीजीजीआई) जोनल यूनिट भोपाल के वरिष्ठ सूचना अधिकारी विनीत कुमार ने आरोपियों के खिलाफ धारा-157, 158, 190, दण्ड प्रक्रिया संहिता एवं 132 सहपठित धारा 69 जीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर बुधवार को गिरफतार किया था. सभी आरोपियों को अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम के जरिए पेश किया था.

पक्ष-विपक्ष के तर्क
अदालत को डायरेक्टेड जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस ( डीजीजीआई) के वकील ने बताया कि आरोपियों ने बिना जीएसटी टैक्स अदा किए करोड़ों रुपए कीमत के सैनेटाइजर बेच दिए हैं. आरोपियों के वकील  ने कहा कि सोम डिस्टलरीज की ओर से कोरोना काल शुरू होने के बाद से सैनेटाइजर का उत्पादन शुरू किया गया है.  सोम डिस्टलरीज ने  पहले दो करोड़ो रुपए जीएसटी के खाते में  जमा कराए हैं और आज भी 6 करोड़ रुपए  जमा कराए गए हैं.अब तक सोम डिस्टलरीज की ओर से 8 करोड़ रुपए जीएसटी के खाते में जमा कराए जा चुके हैं. सोम डिस्टलरीज  को कुल कितना टैक्स जमा कराना है, जीएसटी विभाग की ओर से  इस संबंध में कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है.
गंभीर बीमारी का हवाला


अदालत में आरोपियों के वकील  ने कहा कि उनके क्लाईंट बीमार हैं. उन्हें उचित चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराया जाए. न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुष्पक पाठक ने आरोपियों को जेल में दाखिल कराए जाने से पहले मेडिकल कराने का आदेश दिया. हालांकि कोर्ट ने जब बीमारियों के संबंध में जेपी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट देखी तो कोर्ट ने माना कि आरोपियों को कोई गंभीर बीमारी नहीं है.
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