2019 के चुनाव में गुम हुईं 2014 की नेता, बीजेपी ने दिखाया बाहर का रास्ता

जनता के दरबार में भले इन नेताओं का कभी सिक्का चलता हो लेकिन बदलते समीकरणों से 2014 तक राजनीति के दिग्गजों में गिने जाने वाली ये महिला नेता अब साइडलाइन कर दी गयी हैं

Sonia Rana | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 16, 2019, 6:12 PM IST
2019 के चुनाव में गुम हुईं 2014 की नेता, बीजेपी ने दिखाया बाहर का रास्ता
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Sonia Rana
Sonia Rana | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 16, 2019, 6:12 PM IST
मध्य प्रदेश में 2019 का लोकसभा चुनाव इस बार कई मायनों में अलग है. विधानसभा चुनाव 2018 में बदले समीकरण से 2019 लोकसभा चुनाव का पूरा सीन ही बदल गया है.अक्सर अनुभव पर दांव लगाने वाली पार्टियों को अब नए चेहरों पर विश्वास बढ़ गया है.दूसरी पार्टी से आए चेहरों पर भी दांव लगाया जा रहा है. लेकिन इस सबमें वो चेहरे अनदेखे रह गए हैं जो कभी सत्ता के गलियारों में खूब चर्चित रहे हैं. ऐसा लगता है मानो 2019 के चुनाव में इनका रोल सिर्फ सपोर्टर का ही रह गया है.

2018 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने 2019 को लेकर बीजेपी की सोच और नज़रिए को बदल दिया है. इसका असर इस बार बड़े दलों के टिकट पर साफ दिखाई दे रहा है.हालांकि एमपी के बड़े नेताओं को उम्मीद थी कि विधान सभा चुनाव में हार के बाद पार्टी लोकसभा चुनाव में टिकट देगी. लेकिन ये उम्मीद धरी की धरी रह गयी जब बीजेपी ने नए चेहरों को टिकट दे दिया. सवाल ये है कि राजनीति में हमेशा टॉकिंग पॉइंट रहने वाली इन राजनैतिक हस्तियों का अब क्या होगा.



एमपी की ऐसी महिला नेताओं का जिक्र करें जिनकी विधायकी बची ना सांसदी.

1- सावित्री ठाकुर

- 2014 में पहली बार धार से सांसद बनी.कांग्रेस के उमंग सिंगार को 5 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.इसके पहले ज़िला पंचायत अध्यक्ष रहीं.महिला सशक्तिकरण संबंधित कई अहम समितियों की सदस्य रहीं.इस बार बीजेपी ने इनका टिकट काट कर छतर सिंह दरबार को प्रत्याशी बनाया है
2- कुसुम मेहदेले
- पन्ना से बीजेपी विधायक रहीं कुसुम मेहदेले एक बार बाबूलाल गौर की सरकार में और दो बार शिवराज सरकार में मंत्री रहीं.2018 के विधानसभा चुनाव में उनका ऐसा टिकट कटा कि फिर लोकसभा चुनाव में भी उन्हें साइड लाइन कर दिया गया.
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3- निर्मला भूरिया
- पिता दिलीप सिंह भूरिया की मौत के बाद झाबुआ-रतलाम 2015 में सीट से हारीं.4 बार विधायक रहीं निर्मला 18 के अखाड़े में हारीं ...लोकसभा के लिए दावेदारी ठोकी लेकिन टिकट नहीं मिला.
4- ललिता यादव
- राज्य मंत्री रहीं ललिता यादव ने 2018 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद खजुराहो सीट से दावेदारी की.पार्टी दफ्तर के खूब चक्कर भी लगाए लेकिन नतीजा सिफर रहा. पार्टी ने उनकी जगह वीडी शर्मा को टिकट दे दिया.
5- रंजना बघेल
- 3 बार मनावर से विधायक रंजना बघेल, पहली बार मैदान में उतरे हीरालाल अलावा से हारीं.हार के बाद धार लोकसभा सीट के लिए दावेदारी ठोक दी.
6- अर्चना चिटनिस एमपी बीजेपी सरकार में मंत्री रहीं अर्चना चिटनीस ने 18 के दंगल में पटखनी खाते ही खंडवा लोकसभा में दावेदारी करने में देर नहीं लगाई लेकिन पार्टी ने सिटिंग एमपी को मैदान में उतारा.

बात करें सुषमा स्वराज और उमा भारती की, तो इस चुनाव में दोनों अपने आप ही साइडलाइन हो गयी हैं. सुषमा विदिशा से लगातार दो बार से सांसद थीं. लेकिन इस बार सेहत के कारण वो चुनाव नहीं लड़ रही हैं. उमा भारती पिछली बार एमपी छोड़ यूपी चली गयी थीं. वो झांसी से सांसद बनी थीं. लेकिन इस बार उन्होंने अपने आप ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. एमपी से उनकी दूरी बनी हुई है.

जनता के दरबार में भले इन नेताओं का कभी सिक्का चलता हो लेकिन बदलते समीकरणों से 2014 तक राजनीति के दिग्गजों में गिने जाने वाली ये महिला नेता अब साइडलाइन कर दी गयी हैं. सवाल ये है कि अब इनकी राजनीति का क्या होगा.

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