मुरलीधर राव जीत के नए शिल्पी , 222 कॉल सेंटर्स से निकाला विनिंग फॉर्मूला

मुरलीधर राव प्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद लोगों में शुमार हैं. वे मूलत: आंध्रा के हैं लेकिन दक्षिण की सभी भाषाओं में उनकी पकड़ है. जिस कारण उन्हें कर्नाटक और तमिलनाडु का प्रभार दिया गया.

Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: May 17, 2018, 7:56 PM IST
मुरलीधर राव जीत के नए शिल्पी , 222 कॉल सेंटर्स से निकाला विनिंग फॉर्मूला
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Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: May 17, 2018, 7:56 PM IST
कर्नाटक चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भाजपा के संगठन का कोई मुकाबला नहीं है. उत्तर प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट के राज्य, गुजरात और अब कर्नाटक राज्य के चुनाव में भाजपा ने बता दिया है कि बाजी किस तरह पलटी जाती है. कर्नाटक के यह नतीजे जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैजिक अमित शाह की जुनूनी ताकत का नाम हैं. वहीं एक शख्स और भी है जिसने बहुत ही लो प्रोफाइल तरीके से अपना काम करते हुए सफलता को मैदानी हकीकत में बदला है. यह हैं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री पी मुरलीधर राव.

हर विधानसभा में कॉल सेंटर बनाए
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इस पूर्णकालिक प्रचारक ने ग्राउंड लेवल पर न सिर्फ सैंकड़ों प्रयोग किए बल्कि 222 विधानसभा सीटों परो एक कॉल सेंटर स्थापित कर चुनाव मैनेजमेंट का एक नया मॉडल भी स्थापित कर दिया. उत्तरप्रेदश के चुनाव के दौरान ही कॉल सेंटर की प्लानिंग की गई थी लेकिन उसे मैदान में कर्नाटक में ही उतारा जा सका. यह प्रयोग भाजपा के लिए इतना जबर्दस्त साबित हुआ कि उसने कर्नाटक की हर विधानसभा में 15 से 20 हजार कार्यकर्ताओं की मजबूत फौज खड़ी कर दी. जिसमें हर बूथ पर अजा जजा वर्ग से जुड़े पांच से दस कार्यकर्ता अनिवार्य किए गए.

मोदी के भरोसेमंद

भाजपा मे प्रतिनियुक्ति पर आने से पहले मुरलीधर राव विद्यार्थी परिषद के प्रभारी थे. भाजपा की युवा ब्रिगेड पर उनकी खास पकड़ है. जिस कारण वर्तमान में भाजपा के युवा मोर्चे का प्रभार भी उनके पास है. भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के समय सचिव रहे मुरलीधर राव प्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद लोगों में शुमार है. वे मूलत: आंध्रा के हैं लेकिन दक्षिण की सभी भाषाओं में उनकी पकड़ है. जिस कारण उन्हें कर्नाटक और तमिलनाडु का प्रभार दिया गया.

वार रूम रणनीति
बैंगलुरू में बने उनके वार रूम में पूरे देश भर के 550 से ज्यादा युवा काम कर रहे थे उनकी उम्र सिर्फ 25 से 40 के बीच थी. ऐसे सैकड़ों युवा अलग थे जो पिछले छह महीनों से कुछ सप्ताह के लिए वहां आकर काम कर रहे थे. कहा जा सकता है कि करीब दस लाख से ज्यादा युवाओं ने भाजपा के ग्राउंड से लेकर रणनीतिक प्रबंधन का जिम्मा संभाला और कर्नाटक में सफलता की कहानी लिख दी.

सक्सेस मंत्र को जमीन पर उतारा
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी चुनाव का मॉडल 25 पॉइंट फामुर्ला कार्यकर्ताओं को सक्सेस मंत्र की तरह दिया हुआ था. जिसमे है ‌विधानसभा प्रभारी, बूथ लेवल कमेटिया, पन्ना प्रमुख, वाट्सग्रुप, हर पांच बूथ पर एक शक्ति केंद्र, हर बूथ पर दस कार्यकर्ता, पुराने कार्यकर्ता, स्थानीय प्रभावशाली लोगों की कमेटी, जैसी बातें शुमार हैं. लेकिन यह प्लान पूरी तरह से किस तरह जमीन पर उतारा जाए इसके लिए यह कॉल सेंटर का आइडिया लागू किया गया था.

हर विधानसभा से सीधा फीडबैक
प्रत्याशियों की घोषणा के बाद हर विधासभा में यह कॉल सेंटर बनाए गए. दस से बाहर पूर्णकालिक युवा कार्यकर्ताओं की टीम इसमें झोकी गई. वे प्रत्याशी के चुनाव प्रचार से लेकर कार्यकर्ता, वोटर सबको मॉनिटर कर रहे थे. प्रत्याशी का चुनाव प्रचार कैसा हो रहा है, क्या दिक्कतें हैं, वोटर क्या अपेक्षा रख रहा है इसका सीधा फीड बेक रोजाना वार रुम तक पहुंच रहा था.

प्रचार से लेकर मद्दे तक तय किए
पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई बार ऐसा होता है कि प्रत्याशी स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रभाव के कारण चुनाव प्रचार फोकस नहीं हो पाता. और रिजल्ट नहीं मिलता. कॉल सेंटर के कारण उसके प्रचार की रोज की मॉनिटरिंग हो रही थी. उसका भाषण, मुद्दे, उसको बताए जा रहे थे.

ग्रीन लाइन, रेड लाइन तय की
ग्रीन लाइन, येलो लाइन और रेड लाइन ऐसे स्तर पर क्षेत्र को बांटा गया था. कहां जीत सकते हैं, कहां पर मेहनत करनी है और कहां समय खराब होना है. इसकी पूरी जानकारी वार रूम से इन कॉल सेंटर्स के माध्यम से प्रत्याशी तक पहुंच रही थी.

चुनाव का नैरेटिव बदला
कांग्रेस सिध्दरामय्या को फ्री हैंड देकर एंटी इनकमबेंसी फेक्टर को नकारने में मशगूल थी वहीं भाजपा ने येदियुरप्पा और रेड्डी बंधुओं के फीडबेक के बाद आखिरी दिनों में चुनाव का नैरेटिव बदल दिया.

एक टीम अलग थी जो हर विधानसभा से कांग्रेस और जेडीएस के प्रत्याशियों के प्रचार को मॉनिटर कर रही थी. जो मुद्दे जो आरोप लगाए जा रहे थे, उनका काउंटर नैरेटिव वार रूम से तैयार हो रहा था. जो पार्टी के स्टार प्रचारकों से लेकर अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक दिया जा रहा था.

कॉल सेंटर तय हुई वोटिंग की प्लानिंग
कॉल सेंटर का जबर्दस्त प्रभाव चुनाव के आखिरी दिनों में देखने को मिला. जब येदियुरप्पा से हटाकर चुनाव को पीएम मोदी पर फोकस किया गया. स्थानीय भाषाओं में वोटर्स तक आउटपुट पहुंचाया गया. सोशल मीडिया के हैशटैग तय किए गए.

वोटिंग के दिन हर विधानसभा में कार्यकर्ताओं की प्लानिंग और वोटर्स तक पहुंच कर उसे मतदान केंद्र तक लाने का काम भी इन कॉल सेंटर्स से मॉनिटर किया गया.
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