भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भरोसेमंद साथी बनकर उभरे हैं शिवराज
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भरोसेमंद साथी बनकर उभरे हैं शिवराज
शिवराज सिंह चौहान, भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भरोसेमंद साथी बनकर उभरे हैं. शिवराज देश भर में भाजपा के सवा दो करोड़ नए मेंबर बनाने के अभियान की कमान संभालेंगे.

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब भाजपा के उस अभियान की कमान संभालेंगे जिसका टारगेट देश भर में सवा दो करोड़ नए मेंबर बनाना है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवराज को यह जिम्मेदारी देकर दो संदेश दिए हैं. एक तो भाजपा के शीर्ष नेताओं में उन्हें जगह देकर यह जाहिर किया है कि शिवराज, शाह की टीम के भरोसेमंद मेंबर हैं. दूसरा, शिवराज के न चाहते हुए भी उन्हें कुछ समय के लिए ही सही मध्यप्रदेश की रोजमर्रा की राजनीति से बाहर कर दिया है.

शिवराज पर यू टर्न

यह पहला मौका नहीं है जब शाह ने शिवराज को लेकर अपनी उदारता का खुलेआम जिक्र किया है. विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के रिकॉर्ड देखें तो शाह हर बार शिवराज को समर्थन देते नजर आए हैं. विधानसभा चुनाव को याद कीजिए. तब भाजपा ने यू टर्न लेते हुए अपनी रणनीति बदलते हुए अपना पूरा कैंपेन शिवराज के आसपास केंद्रित कर दिया था. इसकी वजह शाह थे, जिन्होंने पूरे 230 टिकटों पर शिवराज को अहमियत दी और उम्मीदवार तय किए. लोकसभा चुनाव में भी जब बिखराव दिखाई दिया तो खुद शाह ने शिवराज को चुनाव कैंपेन का प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी तय कर दी. प्रदेश की सभी 29 सीट्स पर शिवराज की दखल से टिकट बांटे गए.



शाह का ड्रीम प्रोजेक्ट है
मध्यप्रदेश में सरकार गंवाने के बाद शिवराज भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने हैं और यह एक स्वाभाविक जिम्मेदारी उन्हें हासिल हुई है. ऐसा भी माना जा रहा है. लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बतौर अमित शाह की कार्यपद्धति से जो वाकिफ है वो जानता है कि शिवराज ने एक लंबी छलांग लगाई है. शाह ने 2019 में भाजपा की जीत का सेहरा अपनी  पार्टी के 11 करोड़ कार्यकर्ताओं को दिया है. भाजपा हर कोने में अपना केसरिया ध्वज देखना चाहती है. इसमें सिर्फ एक कसर बाकी है और वह है दक्षिणी राज्य. यानी मेंबरशिप अभियान शाह का ड्रीम प्रोजक्ट की तरह है.

सवा दो करोड मेंबर्स

शिवराज पर जिसके लिए भरोसा किया गया है वह है सवा दो करोड़ नए मेंबर्स बनाना. साथ ही हर ब्लॉक, मंडल और जिले में संगठन चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करना है ताकि पार्टी संविधान के मुताबिक नए अध्यक्ष का चुनाव हो सके. जब 50 फीसदी जगहों पर यह प्रकिया पूरी होगी तब अध्यक्ष का चुनाव होगा. हालांकि, यह साफ होना अभी बाकी है कि भाजपा किसी को निर्वाचन की अलग से जिम्मेदारी देती है या यहीं टीम राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनावी प्रक्रिया को अंजाम देगी.

नेतृत्व से तालमेल बैठाना जानते हैं

दक्षिणी राज्यों में भाजपा अपना खाता खोल नहीं पाई है, जिसका मलाल शीर्ष नेतृत्व को है. मेंबरशिप अभियान वहां नई शुरुआत कर सकता है. शिवराज पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं. भाजपा के पूर्व अध्यक्ष कुशाभाउ ठाकरे एवं प्रमोद महाजन के साथ उन्होंने जबर्दस्त पारी खेली है. उनकी खूबी है कि शीर्ष स्तर पर जो भी नेतृत्व हो वे उसके साथ अपना तालमेल बैठाना जानते हैं. कई नेता स्वीकार करते हैं कि उनका सहज और अहंकार रहित होना उनके विरोधी को भी रास आने लगता है. दरअसल 13 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहने के कारण भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए भी वे एक जरूरत बन गए हैं.

कमलनाथ सरकार वेट एंड वॉच

यह जरूर है कि अब वे प्रदेश से ज्यादा दिल्ली और दूसरे राज्यों में दौरे पर होंगे. इससे साफ संकेत हैं कि कमलनाथ सरकार को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सोच रुको और इंतजार की है. दो नंबर से बहुमत से दूर इस सरकार को लेकर अभी कोई हड़बड़ी नहीं है. प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को मोर्चा सौंपकर सरकार को घेरने का काम चल सकता है.

अनुभव और कार्यशैली

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि सदस्यता अभियान बहुत बड़ा लक्ष्य है. जिसकी अहम जिम्मेदारी शिवराजसिंह चौहान को सौंपी गई है. वे प्रदेश ही नहीं अब राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा में खास भूमिका निभाएंगे. उनके अनुभव और कार्यशैली के कारण उन्हें यह कमान मिली है.

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