कोरोना के बाद ब्लैक फंगस का हमला, भोपाल में एक मरीज को गंवाना पड़ीं आंख

कोरोना के इलाज में ऑक्सजीन सपोर्ट वाले मरीज़ों में इस ब्लैक फंगस के अटैक के ज्यादा आसार हैं.

कोरोना के इलाज में ऑक्सजीन सपोर्ट वाले मरीज़ों में इस ब्लैक फंगस के अटैक के ज्यादा आसार हैं.

भोपाल, जबलपुर और इंदौर में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के मरीजों के आंकड़े अब सामने आने लगे हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि इस तरह की बीमारियों में बार-बार स्टीम लेना भी ठीक नहीं है और मरीज को एहतियात बरतने की जरूरत है.

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भोपाल. कोरोना के बाद अब ब्लैग फंगस (Black fungus) यानि काली फफूंद नयी मुसीबत लेकर आ गयी है. कोरोना (Corona) का इलाज करा चुके मरीज़ों में खासतौर से जिन्हें ऑक्सीजन का सपोर्ट लेना पड़ा या स्टेरॉयड की ओवरडोज हुई उनमें ये फंगस पनप रही है. फंगस आंख, नाक, कान या ब्रेन में भी हो सकती है. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती एक मरीज़ को अपनी आंख गंवानी पड़ी. सरकार अब ऐसे मरीज़ों के लिए हमीदिया अस्पताल में अलग से वॉर्ड बना रही है.

कोरोना का इलाज करा चुके मरीजों में अब ब्लैक फंगल इन्फेक्शन अटैक कर रहा है. राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में ब्लैक फंगस के मरीजों का आंकड़ा अब बढ़ने लगा है. भोपाल में अकेले 1 दिन में 8 मरीज सामने आए हैं. राजधानी के हमीदिया अस्पताल में आज दमोह के एक और मरीज को भर्ती किया गया है.

ऑक्सीजन सपोर्ट और स्टॉरायेड के बाद अटैक

ऑक्सजीन देने के बाद मरीजों को नाक के साइनस में ब्लैक फंगस की शिकायत मिल रही है. हालांकि इसको एंडोस्कोपी के मदद से हटा दिया जाता है. लेकिन जरूरी है कि समय रहते ब्लैक फंगस की पहचान कर मरीज को इलाज मुहैया कराया जाए. हमीदिया अस्पताल के आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर ललित श्रीवास्तव के मुताबिक ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है. कैंसर और डायबिटीज के मरीजों पर इसके अटैक का ज़्यादा खतरा है. संक्रमण के ब्रेन में पहुंचने पर यह घातक साबित हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि इसकी समय पर पहचान कर इलाज किया जाए. फिलहाल इस तरह के मरीजों की संख्या कम है लेकिन यदि संक्रमण बढ़ा तो ये एक नयी मुसीबत हो जाएगी.
 हमीदिया अस्पताल में बनेगा अलग से वार्ड

ब्लैक फंगस के केस मिलने के बाद राजधानी के हमीदिया अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए एक अलग से वार्ड बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. 20 बेड्स का अलग से वार्ड बनाया जा रहा है. वार्ड में ईएनटी, न्यूरोलॉजी, नेत्र रोग, डेंटिस्ट्री डिपार्टमेंट के डॉक्टरों की टीम इलाज करेगी. साथ ही अब ब्लैक फंगल इंफेक्शन के इलाज में कारगर साबित होने वाले इंजेक्शन खरीदने की तैयारी शुरू हो गई है.

5 हजार का एक इंजेक्शन



बताया जा रहा है इस इंजेक्शन की भी भारी कमी है. एक इंजेक्शन की कीमत करीब ₹5000 है. कहीं रेमडेसिविर की तरह इसके लिए भी किल्लत और कालाबाज़ारी न शुरू हो जाए इसलिए सरकार अब इस इंजेक्शन के लिए नयी रणनीति बना रही है. प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा फंगल इनफेक्शन पर रिसर्च की जा रही है. अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों का स्टॉक करने के निर्देश दिए गए हैं. हर एक मरीज को इलाज मुहैया कराया जाएगा.


ओवरडोज का असर

भोपाल, जबलपुर और इंदौर में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के मरीजों के आंकड़े अब सामने आने लगे हैं. बताया जा रहा है कोरोना से पीड़ित होने के बाद स्टारायेड के ओवरडोज के कारण भी यह संक्रमण अटैक करता है. डॉक्टरों की सलाह है कि इस तरह की बीमारियों में बार-बार स्टीम लेना भी ठीक नहीं है और मरीज को एहतियात बरतने की जरूरत है.

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