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मध्यप्रदेश में ऐसे चल रहा है ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल, कोलकाता में है अड्डा

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 22, 2020, 7:05 PM IST
मध्यप्रदेश में ऐसे चल रहा है ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल, कोलकाता में है अड्डा
अप्रैल 2019 में भोपाल और इंदौर में छापे (raid) के दौरान 80 शैल कंपनियों का पता चला था. जनवरी 2019 में एक ऐसे व्यक्ति को जांच के दायरे में लिया गया था, जो 1700 फर्जी कंपनियां (shell company) चला रहा था.

अप्रैल 2019 में भोपाल और इंदौर में छापे (raid) के दौरान 80 शैल कंपनियों का पता चला था. जनवरी 2019 में एक ऐसे व्यक्ति को जांच के दायरे में लिया गया था, जो 1700 फर्जी कंपनियां (shell company) चला रहा था.

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भोपाल.मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में शैल कंपनियों (Shell companies) का जाल है.इन कंपनियों के जरिए ब्लैक मनी (Black money) को व्हाइट (White) करने का खेल चल रहा है.यह खुलासा आयकर विभाग (Income tax department ) के छापे (raid) के दौरान हुआ. छापे में पकड़ी गई कंपनियां फर्ज़ी निकलीं. इनमें से ज़्यादातर का संचालन कोलकाता से हो रहा था.

दरअसल, आयकर विभाग ने बीते पांच साल में करीब पांच हजार शैल कंपनियों का पकड़ा है.छापों में जो काला धन मिला, उसमें से पचास फीसदी राशि को शैल कंपनियों के जरिए नंबर एक में तब्दील किया गया था.चौंकाने वाली बात है कि जितनी शैल कंपनियां बीते पांच साल में पकड़ी गईं, उनमें से 95 फीसदी कोलकाता से चलायी जा रही हैं.आयकर विभाग के छापों में शैल कंपनियों के सबूत मिलते हैं.अप्रैल 2019 में भोपाल और इंदौर में छापे के दौरान 80 शैल कंपनियों का पता चला था. जनवरी 2019 में कटनी के सरावगी के साथ अन्य समूहों पर छापे के सिलसिले में एक ऐसे व्यक्ति को जांच के दायरे में लिया गया था, जो 1700 फर्जी कंपनियां चला रहा था.

ऐसी होती हैं शैल कंपनियां
आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छापों में शैल कंपनियों के खिलाफ सबूत मिले हैं.इन कंपनियों का मतलब है कि जो दिखता है, दरअसल वह है नहीं.कोई भी व्यक्ति कंपनी बना लेता है. फिर ऐसे व्यक्ति ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए इन फर्जी कंपनियों को कैश देते हैं. फिर यही कंपनियां उन्हें चैक के ज़रिए यह राशि अंश पूंजी, शेयर प्रीमियम आदि के रूप में देती है.ऐसा करने से ब्लैक मनी व्हाइट हो जाती है और टैक्स बच जाता है.इन शैल कंपनियों को मुखौटा कंपनी भी कहते हैं.

शैल कंपनियों की आय अघोषित संपत्ति
फर्जी कंपनियों से एंट्री लेकर राशि लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिए अपने फैसले में कहा है कि यदि ऐसी कंपनियों की सत्यता साबित नहीं होती है, तो इनसे आई राशि कंपनी की अघोषित आय मानी जाएगी.इस पर आयकर नियमों के तहत टैक्स लिया जाएगा.केंद्र सरकार भी पिछले दो-तीन साल में तीन लाख शैल कंपनियां बंद कर चुकी है.

EOW की जांच में शैल कंपनियों का खुलासाई टेंडर घोटाले की जांच में पता चला था कि जिन कंपनियों के जरिए किसानों को पैसा दिया गया था, उसी पैसों से किसानों ने राजधानी के पास जमीन खरीदी थी.जब उक्त कंपनियों की जांच की गई, तो इन सभी कंपनियां का पता फर्जी निकला.यह कंपनियां सिर्फ मुखौटा थीं, जो कागजों पर चल रही थीं.यह टेंडर इंदौर नगर निगम से जुड़ा था.

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First published: January 22, 2020, 7:05 PM IST
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