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भोपाल मेमोरियल अस्पताल का ज़िम्मा ICMR को, एम्स में मर्ज नहीं होगा BMHRC

Pooja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 11, 2019, 3:53 PM IST
भोपाल मेमोरियल अस्पताल का ज़िम्मा ICMR को, एम्स में मर्ज नहीं होगा BMHRC
स्वास्थ्य मंत्रालय के इस फैसले से गैस पीड़ितों की उम्मीदें बढ़ी हैं.

भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) की बेपटरी हुई स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने की कोशिशें शुरू हो गईं हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीएमएचआरसी को एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में मर्ज करने से इंकार कर दिया है. अब इसका ज़िम्मा ICMR को दिया गया है, गैस पीड़ितों में इस बात से खुशी की लहर है.

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भोपाल. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब बीएमएचआरसी (BMHRC) को चलाने का जिम्मा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) को दे दिया है. भले ही केंद्र सरकार ने बीएमएचआरसी की बागडोर आईसीएमआर के हाथ में दे दी हो, लेकिन फिलहाल इसकी स्थिति बेहद खराब है. अभी यहां कुल 17 विभाग हैं. इनमें चिकित्सकों के 63 पद स्वीकृत हैं. 63 पद के मुकाबले केवल 21 डॉक्टर ही यहां पर काम कर रहे हैं. बाकी 42 डॉक्टरों के पद खाली हैं. चिकित्सकों की कमी के कारण कई विभाग बंद पड़े हुए हैं. मरीजों को ओपीडी और आईपीडी में इलाज नहीं मिल रहा है. हालांकि अब लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि आईसीएमआर ऑटोनॉमस बॉडी (Autonomous Body) है जो भर्ती और उपकरण खरीदी जैसे फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है.

अब ये होगा फायदा
>> अब बीएमएचआरसी पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान में तब्दील हो जाएगा
>> कई विभागों में डॉक्टर आ जाएंगे, जो यहां पढ़ाई करने के साथ-साथ प्रेक्टिस भी करेंगे

>> डॉक्टर्स ओपीडी से लेकर आईपीडी तक में 24 घंटे सेवाएं देंगे
>> गैस पीड़ित मरीजों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी
>> बीएमएचआरसी में अब चाहे डॉक्टर, कर्मचारियों की भर्ती हो या फिर उपकरण खरीदने के लिए बजट का प्रबंधन करना हो, सभी बिंदुओं पर आईसीएमआर स्वतंत्र रूप से फैसले ले सकेगा क्योंकि ये एक ऑटोनॉमस बॉडी है.>> प्रदेश के जो एमबीबीएस छात्र पीजी की पढ़ाई करने दूसरे राज्यों में जाते हैं, उन्हें भोपाल में बेहतर विकल्प मिल सकेगा

गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण
आईसीएमआर यदि फिर से पीजी इंस्टीट्यूट की कवायद शुरू करता है और बीएमएचआरसी को इसका फायदा मिलेगा. ये ना सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे सेंट्रल इंडिया का पहला पीजी संस्थान होगा. यहां न सिर्फ एमबीबीएस के बाद की पढ़ाई शुरू होगी बल्कि पैरा मेडिकल स्टाफ और सुपर स्पेश्यालिटी सपोर्टिंग स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जा सकेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के इस निर्णय से जहां पुराने शहर में रह रहे लोगों में एक उम्मीद की किरण जगी है तो वहीं गैस त्रासदी के पीड़ितों को एक नया सवेरा होता दिखाई देने लगा है. लोगों की मानें तो जो लोग सालों से उपचार के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे थे अब सरकार के इस फैसले से उन्हें आशा है कि कुछ तो राहत ज़रूर मिलेगी.

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First published: December 11, 2019, 3:49 PM IST
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