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MAGGI को मिला एक चांस, खुश हुए यंगस्टर्स और बच्चे

MAGGI को मिला एक चांस, खुश हुए यंगस्टर्स और बच्चे

मैगी नूडल्स में तय सीमा से ज्यादा मात्रा में लेड और एमएसजी यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने पर पूरे देशभर में नेस्ले के प्रचलित प्रोडक्ट मैगी के ऊपर बैन लगा दिया गया था. लेकिन अब बच्चों और यंगस्टर्स की फेवरेट मानी जाने वाली मैगी नूडल्स बाजारों में एक बार फिर एंट्री लेने वाली है.

मैगी नूडल्स में तय सीमा से ज्यादा मात्रा में लेड और एमएसजी यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने पर पूरे देशभर में नेस्ले के प्रचलित प्रोडक्ट मैगी के ऊपर बैन लगा दिया गया था. लेकिन अब बच्चों और यंगस्टर्स की फेवरेट मानी जाने वाली मैगी नूडल्स बाजारों में एक बार फिर एंट्री लेने वाली है.

मैगी नूडल्स में तय सीमा से ज्यादा मात्रा में लेड और एमएसजी यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने पर पूरे देशभर में नेस्ले के प्रचलित प्रोडक्ट मैगी के ऊपर बैन लगा दिया गया था. लेकिन अब बच्चों और यंगस्टर्स की फेवरेट मानी जाने वाली मैगी नूडल्स बाजारों में एक बार फिर एंट्री लेने वाली है.

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  • News18
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    मैगी नूडल्स में तय सीमा से ज्यादा मात्रा में लेड और एमएसजी यानी मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने पर पूरे देशभर में नेस्ले के प्रचलित प्रोडक्ट मैगी के ऊपर बैन लगा दिया गया था. लेकिन अब बच्चों और यंगस्टर्स की फेवरेट मानी जाने वाली मैगी नूडल्स बाजारों में एक बार फिर एंट्री लेने वाली है.

    मैगी नूडल्स को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए बैन हटाने का फैसला किया है लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं. मैगी नूडल्स बनाने वाली कंपनी नेस्ले को पहले लैब में उत्पाद टेस्ट कराने होंगे. साथ ही फूड रेगुलेटर अथॉरिटी के साथ मंजूरी लेनी होगी. उसके बाद ही मैगी को प्रोडक्शन के लिए मंजूरी दी जाएगी.

    मैगी पर जांच पूरी होने के लिए छह हफ्ते का वक्त तय किया गया है. अगर लैब जांच में सीसे की मात्रा को स्वीकार्य सीमा से कम पाया जाता है, तो नेस्ले को मैगी नूडल्स बनाने की इजाजत मिल जाएगी.

    इस फैसले के आने के बाद जहां नेस्ले के शेयर्स में भारी उछाल है. वहीं भोपाल के यंगस्टर्स भी इस फैसले से बेहद खुश हैं. खासतौर से वो स्टूडेंट्स जो हॉस्टल में रहते हैं.

    अपने घर से दूर गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली निशा का कहना है कि मैगी पर बैन हटना उनके लिए काफी बड़ी बात है. मैगी पर बैन लगने के बाद उनका बजट बिगड़ गया था क्योंकि जहां एक तरफ उन्हें मैगी के पैकेट पर 10 से 20 रुपए खर्च करने पड़ते थे, वहीं बैन लगने के बाद अगर हॉस्टल में खाना अच्छा न बना हो तो उन्हें बाहर से ही महंगा खाना खरीदकर लाना पड़ता था. यहां तक की बीच में भूख लगने पर भी उन्हें काफी सारे स्नैक्स लाने पड़ते थे क्योंकि उनसे एक बार में भूख नहीं मिटती थी.

    वहीं लड़के भी मैगी पर बैन हटने से खुश हैं. रितेश ने बताया कि कॉलेज और फिर उसके बाद कोचिंग की वजह से उनका हॉस्टल आने का टाइम फिक्स नहीं है. ऐसे में कई बार या तो उनका टिफिन छूट जाता है या फिर टिफिन की सब्जी खराब हो चुकी होती है. ऐसे में मैगी ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थी और अब बैन हटने के बाद एक बार फिर वो बेफिक्र हो कर अपने रूम जाया करेंगे क्योंकि खाने को कुछ मिले न मिले लेकिन मैगी होने पर वो दो मिनट में अपनी भूख मिटा सकते हैं.

    Tags: Bombay high court, Maggi

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