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चित्रकूट उपचुनाव : प्रदेश अध्यक्ष बोले, मोदी-शिवराज के बल पर दर्ज करेंगे जीत


भाजपा मुख्यालय.
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प्रदेश में 14 साल से राज कर रही सत्ताधारी भाजपा के लिए राम की नगरी चित्रकूट एक बार फिर चुनौती से कम नहीं है. भले ही उपचुनाव हैं, लेकिन साल 2013 में मोदी-शिवराज के लहर के बावजूद चित्रकूट में भाजपा जीत नहीं पाई थी.

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प्रदेश में 14 साल से राज कर रही सत्ताधारी भाजपा के लिए राम की नगरी चित्रकूट एक बार फिर चुनौती से कम नहीं है. भले ही उपचुनाव हैं, लेकिन साल 2013 में मोदी-शिवराज के लहर के बावजूद चित्रकूट में भाजपा जीत नहीं पाई थी.

चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव के लिए तारीखों के ऐलान के साथ ही भाजपा के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उपचुनाव में कांग्रेस के कब्जे वाली इस सीट पर कमल का पताका फहरा पाएंगे. इसे लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने बड़े भरोसे से कहा कि मोदी-शिवराज की लोकप्रियता और शिवराज सरकार के विकाय कार्यों के बल पर इस बार चित्रकूट जीतेंगे.

उत्तर प्रदेश के सीमा से सटी इस विधानसभा सीट पर 9 नवंबर को वोटिंग और 12 नवंबर को काउंटिंग होगी.चुनाव आयोग के द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक 16 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी, 23 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल हो सकेंगे. कांग्रेस विधायक प्रेम सिंह के निधन के कारण चित्रकूट में उपचुनाव होना है. सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस की ओर से विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की प्रतिष्ठा उपचुनाव में दांव पर होगी. क्योंकि भाजपा स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री की अगुवाई में ही किसी भी चुनाव के मैदान में उतरती है. वहीं चित्रकूट, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कार्यक्षेत्र है.



चित्रकूट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है, कि एक बार 2008 को छोडक़र भाजपा को यहां कभी सफलता नहीं मिली, इसमें भी मतों का अंतर बहुत कम मात्र 700 रहा. दिवंगत कांग्रेस विधायक प्रेमसिंह साल 1998, 2003 और 2013 में भारी मतों के अंतर से जीतते रहे. 2013 विधानसभा चुनाव में प्रेमसिंह ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार को 12 हजार मतों से हराकर जीता था.
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