एमपी के ये दिग्गज प्रत्याशी लोकसभा चुनाव में खुद को नहीं दे पाएंगे वोट
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एमपी के ये दिग्गज प्रत्याशी लोकसभा चुनाव में खुद को नहीं दे पाएंगे वोट
फाइल फोटो

कांग्रेस-बीजेपी के ये दिग्गज रहने वाले किसी और क्षेत्र के हैं लेकिन चुनाव किसी दूसरे लोकसभा क्षेत्र से लड़ रहे हैं.

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मध्य प्रदेश में भोपाल सहित कुल 8 लोकसभा सीटों के लिए रविवार को मतदान होना है. लेकिन चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों में से कुछ दिग्गज ऐसे हैं जो खुद अपने आप को ही वोट नहीं दे पाएंगे.

चुनाव में एक-एक वोट महत्वपूर्ण होता है. कई बार एक वोट के अंतर से जीत-हार का फैसला हो जाता है. यही वजह है कि इस चिलचिलाती गर्मी में प्रत्याशी हर एक वोट के लिए पसीना बहाते घूमते रहे. लेकिन यही वो प्रत्याशी हैं जो चुनाव में अपने लिए ही वोटिंग नहीं कर पाएंगे.दरअसल ये वो प्रत्याशी हैं जो चुनाव किसी और सीट से लड़ रहे हैं लेकिन उनका नाम किसी दूसरे लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है.

ऐसे प्रत्याशियों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के दिग्गज हैं,जो इस बार अपने वोट से मरहूम रहने वाले हैं. इनमें सबसे पहला नाम भोपाल सीट से मैदान में उतरे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का है. वो भोपाल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन उनका नाम गुना सीट के राघौगढ़ में है. वो राघौगढ़ के रहने वाले हैं. दिग्विजय सिंह करीब डेढ़ महीने से एक-एक वोट के लिए पूरे लोकसभा क्षेत्र में सघन प्रचार अभियान पर पैदल निकले, लेकिन वो खुद को ही वोट नहीं दे पाएंगे.कमलनाथ सरकार में मंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह भी भोपाल में अपने पिता को नहीं कर पाएंगे. उनका नाम भी राघौगढ़ की मतदाता सूची में हैं.



दूसरा नाम गुना-शिवपुरी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया का है. वो भी अपने और अपने परिवार के वोट से वंचित रहेंगे. ज्योतिरादित्य सिंधिया का निवास ग्वालियर का जयविलास पैलेस है. इस नाते उनका नाम ग्वालियर की मतदाता सूची में है. लेकिन वो गुना से चुनाव लड़ रहे हैं.
तीसरे दिग्गज प्रत्याशी बीजेपी नेता नरेन्द्र सिंह तोमर हैं. वो इस बार मुरैना से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन उनका नाम ग्वालियर की मतदाता सूची में है. पिछला चुनाव वो ग्वालियर से ही लड़े थे.

भिंड सीट पर तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी खुद को वोट नहीं कर पाएंगे. यहां से कांग्रेस प्रत्याशी देवाशीष जरारिया ग्वालियर के हैं और उनका नाम वहीं की मतदाता सूची में है. इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी संध्या सुमन राय का नाम भी भिंड के बजाय मुरैना के अम्बाह में मतदाता सूची में है. इस तरह उनका वोट भी उन्हें नहीं मिलेगा.

इतिहास गवाह है कई बार 1 वोट ने प्रत्याशियों की लुटिया डुबा दी थी-
-17 अप्रैल, 1999 को सिर्फ एक वोट से अटल सरकार गिर गई थी. अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 270 और खिलाफ में 269 वोट पड़े थे
-राजस्थान के 2008 विधानसभा चुनाव में सी.पी.जोशी सिर्फ एक वोट से हार गए थे. उनके सामने बीजेपी के कल्याण सिंह चौहान को 62,216 वोट मिले थे जबकि उन्हें 62,215.
-2004 कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस के उम्मीदवार ए.आर.कृष्णमूर्ति भी सिर्फ एक वोट से हार गए थे
-2017 राज्य सभा चुनाव में कड़े मुकाबले के बाद कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल आधे वोट से जीते थे.

-मध्य प्रदेश की धार सीट से बीजेपी की नीना वर्मा एक वोट से  विधानसभा चुनाव जीती थीं हालांकि बाद में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया था और उनकी विधायकी ख़त्म हो गयी थी.

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