MP News: सावधान! खुद को आर्मी अफसर बताकर आपको ठग सकते हैं सायबर अपराधी, एडवायजरी जारी

Bhopal News. फर्जी कॉल, SMS व ईमेल पर पुष्टि किए बिना विश्वास न करें. अपना अकाउंट नम्बर डेबिट/क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड की जानकारी किसी से साझा न करें. यूपीआई पेमेंट रिसीव करते समय पिन की जरूरत नहीं होती.

Bhopal News. फर्जी कॉल, SMS व ईमेल पर पुष्टि किए बिना विश्वास न करें. अपना अकाउंट नम्बर डेबिट/क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड की जानकारी किसी से साझा न करें. यूपीआई पेमेंट रिसीव करते समय पिन की जरूरत नहीं होती.

Bhopal News. फर्जी कॉल, SMS व ईमेल पर पुष्टि किए बिना विश्वास न करें. अपना अकाउंट नम्बर डेबिट/क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड की जानकारी किसी से साझा न करें. यूपीआई पेमेंट रिसीव करते समय पिन की जरूरत नहीं होती.

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भोपाल. मध्यप्रदेश में अपराधी भी कोरोना की आपदा को अवसर में बदलने में लगे हैं. शातिर सायबर अपराधियों (Cyber Criminals) ने कोरोना वॉरियर्स डॉक्टरों को भी नहीं बख्शा. वो आर्मी अफसर बनकर मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कोरोना योद्धाओं को चपत लगा रहे हैं. आरोपियों ने जांच के नाम पर शहर के दो प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ ठगी की है. सायबर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. साथ ही ऐसी घटना से बचने के लिए राज्‍य सायबर ADG योगेश चौधरी ने एडवाइजरी (Advisory ) जारी की है।

ADG योगेश चौधरी ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि कोरोना महामारी का फायदा उठाते हुये सायबर अपराधी अस्पताल, डाक्टर्स, पैथोलॉजी समेत मेडिकल फील्ड से जुड़े लोगों से संपर्क कर खुद को आर्मी ऑफिसर बताते हैं. आरोपी फोन के जरिए अपने परिवार के लोगों के कोविड समेत अन्य टेस्ट कराने की बात कहते हैं. इसके बाद कोविड टेस्ट और अन्य टेस्ट में आने वाला शुल्क का भुगतान एडवांस करने के नाम पर सायबर अपराधी खाते से पैसे ट्रांसफर कर ठगी करते हैं.

ऐसे ठगते हैं...

योगेश चौधरी ने बताया कि सायबर अपराधी आर्मी अफसर बनकर अस्पतालों, डाक्टर्स और पैथोलॉजी से संपर्क कहते हैं कि उनकी पोस्टिंग प्रदेश से बाहर है. उनके परिवार की कोविड जांच, आंखों की जाँच आदि करवाना है. इसके बाद आरोपी व्हाट्सएप के जरिए फ़ोन पे, गूगल पे और पे टीएम का नंबर मांगते हैं. व्हाट्सएप पर आर्मी की यूनिफार्म में फोटो लगी होती है. नंबर मिलने के बाद सबसे पहले आरोपी अपने खाते से 5-10 रुपए ट्रांसफर करते हैं और खाता चैक करने को कहते. जब खाते में 5-10 रुपए आने पर यकीन होने के बाद अपराधी सभी जांचों का जो भी शुल्क बताया जाता है। उतनी राशि की रिक्वेस्ट फोन पे, गूगल पे या पेटीएम से भेजते हैं. आरोपी आर्मी के नियमों का हवाला देते हुये प्रक्रिया जल्दी करने को कहते हैं. जैसे ही रिक्वेस्ट पर क्लिक कर यूपीआई पिन डाला जाता है, संबंधित के खाते से उतनी राशि निकल जाती है. भोपाल के दो प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ इस तरह तरह की ठगी की वारदात हुई.
एडवायजरी जारी

इसी तरह के अपराध सीए, मेडिकल व्यवसायियों के साथ भी किये जा सकते हैं. ऐसे में राज्य सायबर पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरुक किया है. एडवायजरी में कहा गया है कि आर्मी या सेना की यूनिफार्म का फोटो या आईकार्ड यदि व्हाट्सएप के माध्यम से दिखाया जाता है तो उस पर विश्वास न करें. हमेशा ध्यान रखें कि यूपीआई पेमेंट रिसीव करते समय किसी भी पिन की आवश्यकता नहीं होती. प्राप्त होने वाले फर्जी कॉल, एसएमएस व ईमेल पर बिना पुष्टि करे विश्वास न करें. अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे अकाउंट नम्बर डेबिट/क्रेडिट कार्ड , आधार कार्ड की जानकारी किसी से साझा न करें. यदि आपके साथ ऐसा कोई अपराध हो तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या www.cybercrime.gov.in या Toll Free नम्बर 155260 पर करें.

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