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हिंदी में कैसे होगी प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई, GMC तैयार, RGVV ने सरकारी प्लान में फंसाया पेंच

MP NEWS. भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में हिंदी में पढ़ाई का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है.

MP NEWS. भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में हिंदी में पढ़ाई का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है.

Professional Course in Hindi : प्रोफेशनल कोर्स हिंदी में पढ़ाने पर एक पेंच फंस रहा है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मु ...अधिक पढ़ें

    भोपाल. मध्यप्रदेश में प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई हिंदी (Hindi) में कराने की तैयारी है. इसकी शुरुआत चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल की पढ़ाई से कर रहा है. भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज GMC में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तीन विषय हिंदी में पढ़ाए जाएंगे.

    प्रोफेशनल कोर्स हिंदी में पढ़ाने के प्रयास बरसों से किये जा रहे हैं लेकिन इसमें सिस्टम ही आड़े आ रहा है. जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है. इसके बाद भी इसे अपनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार नहीं है.

    50 फीसदी की शर्त
    प्रोफेशनल कोर्स हिंदी में पढ़ाने पर एक पेंच फंस रहा है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय RGPV ने ये शर्त रख दी है कि अगर 50 फीसदी छात्र इच्छा जाहिर करते हैं तभी हिंदी में पढ़ाने की इजाजत दी जाएगी. विश्वविद्यालय की इस शर्त ने राज्य सरकार को उलझन में डाल दिया है. तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसे 25 प्रतिशत करने के लिए कहा है. यानि अभी भी हिंदी को पूरी स्वतंत्रता के साथ नहीं अपनाया जा रहा है. यदि किसी क्लास के 25 प्रतिशत छात्र तैयार नहीं हुए, तो कोई भी हिंदी में नहीं पढ़ पाएगा. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद AICTE ने RGPV को भी इंजीनियरिंग की किताबों का हिंदी में ट्रांसलेशन की जिम्मेदारी दी है. लेकिन इस बीच 50 फीसदी की शर्त लगाकर विवि ने पेंच फंसा दिया है.

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    हिंदी में कैसे होगी मेडिकल की पढ़ाई
    भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है. फर्स्ट ईयर के तीन विषय हिंदी में तैयार कराए जा रहे हैं. नेशनल मेडिकल कमीशन ( पूर्व में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) इसकी मंजूरी नहीं देता है, तो उसकी सफलता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. इसका असर गांधी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है. इसकी अपेक्स बॉडी नेशनल मेडिकल कमीशन ने अभी तक हिंदी में पढ़ाई को मंजूरी दी है. जानकार कहते हैं कि जैसे इंजीनियरिंग को एआईसीटीई ने मान्य किया है. वैसे ही, मेडिकल एजुकेशन के लिए भी हिंदी को मान्य कराया जाना चाहिए.

    पहले तकनीकी पेंच खत्म कराना जरूरी
    अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि के पूर्व कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा कहते हैं जब हिंदी को राजभाषा बनाया गया था, तब यह कहा गया था कि हिंदी अंग्रेजी के साथ-साथ चलेगी. सरकार के सभी विभागों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में काम करने थे. लेकिन हिंदी में काम नहीं किए गए. इससे यह पिछड़ गई. मेरे रहते ही मेडिकल एजुकेशन की पढ़ाई के लिए कोर्स कंटेंट हिंदी में तैयार किया जा चुका था. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने हिंदी में पढ़ाने की मंजूरी नहीं दी, जबकि हिंदी में कोर्स तैयार कराने का काम भी उनका ही था.

    स्पष्ट नीति की जरूरत
    प्रो. छीपा का कहना है हिंदी भाषा में पाठ्यक्रम धीरे-धीरे तैयार होता रहेगा. लेकिन तकनीकी पेंच खत्म कराने के लिए एनएमसी से आदेश जारी कराने की जरूरत है. दूसरे देशों में भी हमारे बच्चे पढ़ने जाते हैं. वह जिस भी भाषा में पढ़कर आएं, लेकिन उनका टेस्ट लेकर उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने की मंजूरी दी जाती है. ऐसे में हमारे ही देश में हमारी ही मातृभाषा में पढ़ने वाले को लेकर स्पष्ट नीति जल्द जारी होनी चाहिए.

    Tags: Madhya pradesh news, Medical professionals

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