# विधान सभा चुनाव : सपाक्स पार्टी को है बाग़ियों का इंतज़ार

सपाक्स पार्टी प्रत्याशियों का ऐलान करने से पहले पसोपेश में है. क्योंकि आरक्षित सीटों पर आरक्षण के विरोध का मुद्दा उसे कैसे वोट दिलाएगा. सूत्रों की मानें तो अब पार्टी स्थानीय पार्टियों के साथ गठबंधन की तैयारी में हैं.

Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 12, 2018, 12:27 PM IST
# विधान सभा चुनाव : सपाक्स पार्टी को है बाग़ियों का इंतज़ार
सपाक्स
Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 12, 2018, 12:27 PM IST
मध्य प्रदेश में सवर्ण आंदोलन के बाद अस्तित्व में आई सपाक्स पार्टी के सामने धर्म संकट खड़ा हो गया है. दरअसल सपाक्स पार्टी आरक्षण के विरोध की बुनियाद पर खड़ी है. परेशानी ये है कि प्रदेश की 82 सीटें एससी और एसटी के लिए आरक्षित हैं, इन सीटों पर वो किस आधार पर वोट मांगेगी.

सपाक्स पार्टी प्रत्याशियों का ऐलान करने से पहले पसोपेश में है. क्योंकि आरक्षित सीटों पर आरक्षण के विरोध का मुद्दा उसे कैसे वोट दिलाएगा. सूत्रों की मानें तो अब पार्टी स्थानीय पार्टियों के साथ गठबंधन की तैयारी में हैं.

सवर्ण आंदोलन के बाद राजनीतिक दल बनी सपाक्स पार्टी के सामने अब ये 82 सीटें चैलेंज बनी हुई हैं. सपाक्स पार्टी आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रही है, जबकि इन 82 bhopalbhopalसीटों का अस्तित्व ही जाति विशेष के आधार पर है. अब सपाक्स अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ऊपरी तौर पर तो ये कह रहे हैं कि इन सीटों पर खड़े होने वाले प्रत्याशी पार्टी लाइन पर ही वोट मांगेंगे, लेकिन सवाल ये है कि क्या एससीएसटी वर्ग उन्हें वोट देगा.

हालांकि सपाक्स कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है. इऩ 82 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बजाए वो किसी स्थानीय पार्टी से जुड़़ सकती है.

प्रदेश में 35 सीटें अनुसूचित जाति और 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. इन सीटों के लिए सपाक्स की बातचीत जयस औऱ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चल रही है. सपाक्स को कांग्रेस और बीजेपी की लिस्ट का इंतज़ार है. दोनों दलों के बाग़ी लोगों को सपाक्स टिकट दे सकती है.

बीजेपी और कांग्रेस का कहना है सपाक्स का अस्तित्व इस चुनावों के लिए है। जैसे पार्टी उठी है वैसे ही बैठ भी जाएगी. कांग्रेस और बीजेपी के लिए सपाक्स कोई खास मायने नहीं रखती.लेकिन प्रदेश में तीसरे मोर्चे को लेकर चल रही सुगबुगाहट दोनों पार्टियों के लिए खतरे की घंटी ज़रूर हो सकती है.

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