नीति आयोग की बैठक में बोले कमलनाथ, किसान हितैषी संरचनात्मक सुधार जरूरी

कमलनाथ ने ई-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट योजना की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ई-पेमेंट सिस्टम अभी भी पूरी तरह व्यवहार में नहीं आ पाया है. जिससे राज्यों को परेशानी हो रही है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: June 15, 2019, 9:12 PM IST
नीति आयोग की बैठक में बोले कमलनाथ, किसान हितैषी संरचनात्मक सुधार जरूरी
सीएम कमलनाथ ने कृषि उपज के आयात-निर्यात की एक सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करने पर जोर दिया. (File Photo)
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Updated: June 15, 2019, 9:12 PM IST
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सभी राज्यों में कृषि क्षेत्र में संरचनागत सुधारों की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ने के बावजूद कृषि बाजार में सुधारों की आवश्यकता है. ताकि किसानों को उनकी उपज का अच्छे दाम मिल सके. कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार के मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केंटिंग कमेटी अधिनियम और अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम में किसानों के व्यापक हितों को देखते हुए जरूरी संशोधनों की आवश्यकता बताई.

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में राष्‍ट्रपति भवन में नीति आयोग की गवर्निंग कांउसिल की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक मुख्य रूप से भू-जल संवर्धन, कृषि और सूखा राहत, आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया. बैठक में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल सहित केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग अधिनियम में सुधार की जरूरत
कमलनाथ ने ई-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट योजना की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ई-पेमेंट सिस्टम अभी भी पूरी तरह व्यवहार में नहीं आ पाया है. जिससे राज्यों को परेशानी हो रही है. इसी प्रकार किसानों के लिए समस्याओं का समाधान करने की व्यवस्था भी स्थापित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि एक मण्डी में किसी उपज की गुणवत्ता निर्धारित होने पर उसे सभी मण्डियों के लिए उपयुक्त माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग अधिनियम में सुधार कर इसे ज्यादा से ज्यादा किसान हितैषी बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कृषि उपज के आयात-निर्यात की एक सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करने पर जोर दिया. जिससे सभी राज्यों के किसानों को लाभ मिल सके.

भू-जल संवर्धन और वर्षा जल के संवर्धन को सतत विकास के लिए जरूरी
भू-जल संवर्धन और वर्षा जल के संवर्धन को सतत विकास के लिए जरूरी बताते हुए कमलनाथ ने कहा कि भविष्य में जनसंख्या बढ़ने के साथ ही मानव और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी मांग बढ़ेगी. इसे देखते हुए तत्काल भू-जल का संरक्षण करने की आवश्यकता है. सभी राज्यों को इसके लिए जलग्रहण की गतिविधियों में तेजी लाना पड़ेगी. उन्होंने कहा कि भू-जल का संवर्धन सभी राज्यों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है. मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में 40 नदियों को जलग्रहण क्षेत्र का उपचार करने के लिए नदी के बहाव को बरकरार रखने की परियोजना चलाई जा रही है. उन्होंने कहा कि भू-जल संवर्धन के लिए केन्द्रीय भू-जल बोर्ड से तकनीकी सहयोग और केन्द्र से वित्तीय सहयोग की जरूरत होगी. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में सभी जल संरचनाओं को जीवन देने की गतिविधियों को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा.

नीति आयोग को मध्यप्रदेश के सूखा राहत उपायों की तैयारियों से अवगत कराते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून में देरी की सूचनाओं के चलते कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर किसानों के लिए उन्नत किस्म के बीज बाजार से उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर जिला आपदा प्रबंधन की तैयारियों को भी अद्यतन किया गया है. मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को बताया कि विकास के मापदण्डों पर आकांक्षी जिलों की गणना करने की नीति आयोग की अवधारणा को अपनाते हुए 50 विकासखण्डों की पहचान की गई है. जिसमें 29 आदिवासी विकासखण्ड हैं, ताकि इनके विकास की ओर ज्यादा ध्याान दिया जा सके.
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सुरक्षा संबंधी मुद्दों और वामचरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े विषयों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों के लिए विशेष खुफिया शाखाओं का गठन किया जाना चाहिए. जिसमें स्थानीय समुदाय का सक्रिय सहयोग होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रभावित राज्यों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान का सुव्यवस्थित तंत्र स्थापित होना चाहिए और स्थानीय समुदायों में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों को केन्द्र सरकार के सहयोग से लागू किया जाना चाहिए.

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First published: June 15, 2019, 9:12 PM IST
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