लॉकडाउन के बाद MP में 12 बजे रात तक दुकानें खोलने की तैयारी, CM शिवराज का ये है प्लान
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लॉकडाउन के बाद MP में 12 बजे रात तक दुकानें खोलने की तैयारी, CM शिवराज का ये है प्लान
अब दो से अधिक हथियार कोई व्यक्ति नहीं रख सकेगा.

लॉकडाउन (Lockdown) से व्यापारियों और कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) की सरकार कर रही तैयारी.

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भोपाल. लॉकडाउन के बाद व्यापारी और कारोबारियों के नुकसान की भरपाई के लिए मध्य प्रदेश सरकार कुछ बड़े कदम उठा सकती है. इसके तहत प्रदेश में दुकानें खुलने और बंद करने के वक्त में बदलाव किया जा सकता है. इसके तहत हो सकता है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में दुकानें खोलने का वक्त सुबह 6 से रात 12 बजे तक कर दिया जाए. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने इस सिलसिले में अधिकारियों को प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं.

इसके साथ ही सरकार ने तय किया है कि वह लॉकडाउन (Lockdown) के बाद चीन से बाहर जाने वाली कंपनियों के लिए मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने और निवेश का बेहतर माहौल देगी, ताकि उन कंपनियों को एमपी में अपने कारखाने स्थापित करने के लिए लुभाया जा सके. सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उद्योग और श्रम नीति ऐसी बनाएं, ताकि यह कंपनियां मध्य प्रदेश आने को मजबूर हो जाएं. सीएम ने कहा कि कोरोना संकट के कारण चीन जैसे देशों से कई उद्योग छोड़कर जा रहे हैं. वे अपने उद्योग अन्य देशों में स्थापित करेंगे, यह हमारे लिए अवसर है. हम अपने श्रम कानून और औद्योगिक नीति ऐसी रखें, जिससे प्रदेश में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित हों.

एक रिटर्न का हो सकता है प्रावधान



सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कारोबारियों को सिर्फ एक ऑनलाइन रिटर्न भरना पड़े. फिलहाल प्रदेश में 16 श्रम कानूनों में 61 रजिस्टर के स्थान पर एक रजिस्टर रखने तथा 13 रिटर्न कार्यालय में दाखिल करने के स्थान पर 2 रिटर्न का प्रावधान किया गया है.
दस्तावेजों की संख्या और होगी कम

मौजूदा वक्त में एमपी में सभी रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसों में मांगे जाने वाले दस्तावेजों की संख्या 18 से कम कर 5 और अधिकृत खतरनाक श्रेणी के कारखानों में यह संख्या 21 से कम कर 13 की गई है. सीएम ने निर्देश दिए हैं कि दस्तावेजों की संख्या को और कम किया जाए. फिलहाल ऐसे कारखाने जहां 10 से कम श्रमिक होते हैं, वहां श्रम अधिनियम में निरीक्षण श्रम आयुक्त की अनुमति के बगैर नहीं किया जा सकता. इस संख्या को भी अब 10 से बढ़ाकर 20 किया जाएगा.

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