अपना शहर चुनें

States

EXCLUSIVE: पत्‍नी साधना सिंह को खदान आवंटन कर फंसे सीएम शिवराज!

व्यापम घोटाले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब पत्नी के नाम मैगनीज खदान आवंटन को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर पद और अधिकारों का दुरूपयोग कर पत्नी साधना सिंह की कंपनी को मैगनीज खदान आवंटित करने का आरोप लगाया है.
व्यापम घोटाले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब पत्नी के नाम मैगनीज खदान आवंटन को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर पद और अधिकारों का दुरूपयोग कर पत्नी साधना सिंह की कंपनी को मैगनीज खदान आवंटित करने का आरोप लगाया है.

व्यापम घोटाले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब पत्नी के नाम मैगनीज खदान आवंटन को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर पद और अधिकारों का दुरूपयोग कर पत्नी साधना सिंह की कंपनी को मैगनीज खदान आवंटित करने का आरोप लगाया है.

  • News18
  • Last Updated: June 12, 2015, 6:37 PM IST
  • Share this:
व्यापम घोटाले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब पत्नी के नाम मैगनीज खदान आवंटन को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर पद और अधिकारों का दुरूपयोग कर पत्नी साधना सिंह की कंपनी को मैगनीज खदान आवंटित करने का आरोप लगाया है.

हालांकि, सरकार ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज कर दिया. कांग्रेस के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री के बचाव में दो मंत्री सामने आ गए. न्यूज18 के पास दोनों पक्षों से जुड़े दस्तावेज मौजूद है, जो एक दूसरे के दावों का खंडन कर रहे है.

दरअसल, कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता केके मिश्रा ने खदान आवंटन के दस्तावेज जारी करके आरोप लगाया कि बालाघाट में मैगनीज की एक खदान एसएस मिनरल्स नामक फर्म को आवंटित की गई, जिसके प्रोपराइटर में श्रीमती एसएस सिंह लिखा हुआ है. आवंटन के बाद हुए एग्रीमेंट में श्रीमती एसएस सिंह पत्नी शिवराज सिंह, भोपाल लिखा हुआ है. कांग्रेस ने जो दस्तावेज जारी किए है, वह दस्तावेज हिंदी में है. हालांकि दस्तावेज थोड़े धुंधले हैं कांग्रेस के जारी दस्तावेज में क्या लिखा है आप भी पढ़िए.










कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पद का दुरुपयोग कर अपनी पत्नी साधना सिंह के आधिपत्य वाली कंपनी एसएस मिनरल्स को बालाघाट जिले में मैगनीज खदान आवंटित की थी.

बचाव में सामने आए दो मंत्री

कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता और परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह बचाव में सामने आए. सरकार की तरफ से भी दस्तावेज पेश कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया गया. उन्होंने बालाघाट जिले में आवंटित की गई खदानों के 1991 से 2014 तक के दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस ने जिस गांव का जिक्र किया है, वहां मैगनीज खदान ही नहीं है. साथ ही जो खसरा नंबर बताया गया है वह जगनटोला में है और वह खदान लीला भलावी के नाम आवंटित है. उस खदान पर उनके बेटे अशज़क उईके का आधिपत्य है. दस्तावेज में क्या लिखा है आप भी पढ़िए.





अलग-अलग खसरा नंबर

दिलचस्प बात है कि कांग्रेस ने जो आदेश दिया है वो हिंदी में जबकि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची अंग्रेजी में है. केके मिश्रा ने कहा कि भोपाल की फर्म मेसर्स एस.एस.मिनरल्स को बालाघाट जिले के ग्राम-पौनिया में 17.9एकड़ भूमि 10 वर्ष की लीज पर मैग्नीज खदान के लिए आवंटित की गई. मेसर्स एस.एस.मिनरल्स की प्रोपराईटर साधना सिंह हैं, लेकिन कंपनी के प्रोपराईटर के रुप में साधना सिंह का नाम बदलकर श्रीमती एस.एस.चौहान पत्नी शिवराज सिंह अंकित है. 11 जनवरी 2007 से 21 जनवरी 2017 तक के लिए आवंटित खदान का खसरा नम्बर हैं 83,85/2 ,125/1,125/ 2,125,128, 129,84,85/ 1,80/2, 81/1-2.

सरकार का जवाब

सरकार का दावा है कि जिस खसरे नंबर का दावा किया जा रहा है वो खसरे नंबर जगन टोला गांव के हैं. यह खदान श्रीमती लीला भलावी नाम से है, जिसका रकबा 5.492 हैक्टेयर है. सरकार यह भी तर्क दे रही है कि जिस गांव का जिक्र किया गया वहां मैगजीन खदान नहीं है.



दो सूची, दो भाषा, दो नंबर

कांग्रेस के दावे और सरकार के तर्क के बीच एक दिलचस्प तरीके का विरोधाभास सामने आया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के दस्तावेजों में पत्र क्रमांक एक ही है. बस फर्क इतना है कि कांग्रेस के दस्तावेज हिंदी में है, जबकि सरकार ने सफाई देते हुए खदान आवंटन की जो सूची पेश की है वह अंग्रेजी में है. कांग्रेस की सूची में 79 नंबर पर एसएस मिनरल्स दर्ज है. सरकार के दस्तावेज 65वें नंबर पर लीला भलावी के नाम आवंटन दर्ज है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज