आचार संहिता से पहले हुए सरकारी कामों की जांच करे चुनाव आयोग- कांग्रेस
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आचार संहिता से पहले हुए सरकारी कामों की जांच करे चुनाव आयोग- कांग्रेस
Rajasthan Assembly Election 2018

मध्य प्रदेश में अब चुनाव का ऐलान हो चुका है. ऐलान होने से ठीक पहले नेताओं ने आनन-फानन में आधे-अधूरे कामों का भूमिपूजन और शिलान्यास कर डाला. हालांकि भाजपा की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि यह जनता कि सेवा के लिए किया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस हमलावर मूड में हैं.

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मध्य प्रदेश में आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले आनन-फानन में किए जा रहे सरकारी कार्यों को लेकर राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस अब चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करने की तैयारी कर रही है, कि जो काम सरकार ने आखिरी वक्त में किए हैं उनकी जांच होनी चाहिए. शिकायत के मुताबिक एमपी सरकार ने आचार संहिता लगने से ठीक पहले एक हफ्ते में 3 हजार करोड़ से ज्यादा के टेंडर जारी कर दिए. कांग्रेस का आरोप है कि कुछ टेंडर बैक डेट में जारी किए गए हैं, हालांकि भाजपा ने इसे जनता की सेवा करार दिया है.

मध्य प्रदेश में चुनाव का ऐलान हो चुका है. ऐलान होने से ठीक पहले नेताओं ने आनन-फानन में आधे-अधूरे कामों का भूमिपूजन और शिलान्यास कर डाला. हालांकि भाजपा की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि यह जनता कि सेवा के लिए किया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस हमलावर मूड में हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार ने चुनाव के ऐलान से पहले 3 हजार करोड़ से ज्यादा के टेंडर आनन-फानन में जारी किए हैं, जिसमें से कुछ आचार संहिता लागू होने के बाद बैक डेट में जारी किए गए हैं. कांग्रेस इस मामले में चुनाव आयोग से शिकायत करने जा रही है. कांग्रेस का कहना है कि जिस प्रदेश में ई-टेंडरिंग घोटालों की जांच चल रही है वहां इस तरह के टेंडर जांच के दायरे में आने चाहिए.

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कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने आचार संहिता लगने के 6 दिन पहले तक 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर जारी कर दिए. इन टेंडर्स में सबसे ज्यादा सड़क निर्माण से जुड़े पीडब्ल्यूडी विभाग के टेंडर है. इनमें 7 प्रमुख सड़कें, 143 पुल और पुलिया के टेंडर शामिल है. सरकार के इन टेंडर्स में पुल-पुलिस की लागत करीब 650 करोड़ रुपये हैं. सड़कों के निर्माण के लिए करीब 1991.5 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें 700 करोड़ रुपये का जबलपुर एलिवेटेड कॉरीडोर शामिल है.

मामले में प्रदेश भाजपा का कहना है कि सरकार ने आचार संहिता लगने के आखिरी दिन तक जनता के हित में काम किया है. मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण के दिन पांच बड़े निर्णये लिए थे और आखिरी दिन तक वो जनता की सेवा का ही काम कर रहे हैं. कांग्रेस अपने आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के दर पर जाने की तैयारी कर चुकी है.

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